मध्यप्रदेश में इन दिनों मत्स्य पालन को लेकर नई हलचल देखने को मिल (Fisheries Policy) रही है। गांवों से लेकर जिला मुख्यालय तक इस बात की चर्चा है कि आने वाले समय में मछली उत्पादन को बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही है। अधिकारियों की बैठकों और नई योजनाओं को लेकर लोगों में भी उत्सुकता बढ़ गई है।
मत्स्य पालन से जुड़े किसान और कारोबारियों की नजर अब सरकार के अगले कदमों पर है। प्रदेश में स्थानीय स्तर पर मछली बीज की उपलब्धता बढ़ाने, नए रोजगार तैयार करने और उत्पादन को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से काम शुरू होने की बात सामने आई है। माना जा रहा है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल सकती है।
हर जिले में बनेगी मछली बीज केंद्र की व्यवस्था Fisheries Policy
प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जिले में कम से कम एक हैचरी यानी मछली बीज उत्पादन केंद्र विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण मछली बीज उपलब्ध कराना है ताकि उत्पादन में तेजी लाई जा सके और किसानों को दूसरे क्षेत्रों पर निर्भर न रहना पड़े।
सरकार की एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के तहत 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर काम आगे बढ़ रहा है। इन परियोजनाओं के लिए कार्यादेश भी जारी किए जा चुके हैं। इससे मत्स्य क्षेत्र में नए निवेश के साथ रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
ढाई साल में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य
सरकार ने अधिकारियों को अगले ढाई वर्षों के भीतर ऐसी व्यवस्था तैयार करने के निर्देश (Fisheries Policy) दिए हैं जिससे प्रदेश को दूसरे राज्यों से मछली बीज खरीदने की जरूरत न पड़े। हर जिले में हैचरी बनने से स्थानीय स्तर पर पर्याप्त बीज उपलब्ध होगा और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है।
मोती उत्पादन को भी मिलेगा बढ़ावा
मत्स्य पालन के साथ साथ मोती उत्पादन को भी नई दिशा देने की योजना बनाई गई है। इसके लिए दूसरे राज्यों के सफल मॉडल का अध्ययन कर उन्हें प्रदेश में लागू करने की तैयारी की जाएगी। माना जा रहा है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय का एक नया स्रोत विकसित हो सकेगा।
कोल्ड चेन और निर्यात पर रहेगा जोर
बढ़ते उत्पादन को ध्यान में रखते हुए कोल्ड चेन, प्रसंस्करण और भंडारण सुविधाओं का तेजी से विस्तार करने की योजना बनाई गई है। इसके साथ मछली उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात के लिए जरूरी नेटवर्क विकसित करने पर भी जोर रहेगा ताकि उत्पादन का बेहतर मूल्य मिल सके और मछुआरों की आमदनी बढ़े।
जल संरक्षण और पर्यटन पर भी बनेगी कार्ययोजना
सरकार ने नदियों के संरक्षण, जलीय जीवों की सुरक्षा और जल आधारित पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया है। साथ ही जलाशयों और नदी क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि मछुआ किसान क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत अंतर्देशीय जल क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान (Fisheries Policy) पर है। वहीं वर्ष 2023 और 24 के लिए अंतर्देशीय मत्स्य पालन के क्षेत्र में सिवनी जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है। नई योजनाओं के साथ प्रदेश अब मछली उत्पादन, मछली बीज निर्माण, मोती उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने की तैयारी में है।
