Polyhouse Farming : दो एकड़ की खेती से खुली नई राह, हजारों फूलों ने किसान की मेहनत को बना दिया मिसाल

गुना जिले में इन दिनों एक किसान की खेती आसपास के गांवों में चर्चा का विषय बनी (Polyhouse Farming) हुई है। पारंपरिक खेती से अलग रास्ता चुनने वाले इस युवा किसान ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर ऐसा काम किया है, जिसे देखने और समझने के लिए दूसरे किसान भी पहुंच रहे हैं। फूलों की खेती से मिलने वाले बेहतर परिणाम ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

खेती में नई तकनीकों को अपनाने की बढ़ती रुचि के बीच इस पहल को बड़ी सफलता माना जा रहा है। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और प्रशासन के सहयोग से जिले में संरक्षित खेती को बढ़ावा मिल रहा है। इसी कड़ी में बिलाबावड़ी के किसान हृदेश अग्रवाल ने दो एकड़ क्षेत्र में जिले का पहला व्यावसायिक जरबेरा पॉलीहाउस तैयार कर नई पहचान बनाई है।

50 हजार पौधों से शुरू हुआ उत्पादन Polyhouse Farming

32 वर्षीय हृदेश अग्रवाल पहले सरसों तेल प्रसंस्करण के व्यवसाय से जुड़े थे। बाद में उन्होंने आधुनिक उद्यानिकी की ओर कदम बढ़ाया और पॉलीहाउस में जरबेरा की 19 अलग अलग रंगों की करीब 50 हजार पौध लगाए। यह परियोजना राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना के तहत स्थापित की गई है, जिसमें उन्हें लगभग 60 लाख रुपये का अनुदान मिलने की प्रक्रिया है।

किसान के अनुसार 15 मार्च को पौधों का रोपण किया गया था और 15 जून से फूलों का उत्पादन शुरू हो गया। उनका कहना है कि जरबेरा फूल की मांग पूरे साल बनी रहती है। इसकी खेती अपेक्षाकृत आसान है और एक बार लगाए गए पौधे करीब 7 से 8 वर्षों तक लगातार उत्पादन देते हैं।

आधुनिक तकनीक से बढ़ रही गुणवत्ता

पॉलीहाउस में ड्रिप सिंचाई, मिस्टर और फॉगर जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं लगाई गई हैं। इन तकनीकों की मदद से तापमान और आर्द्रता का संतुलन बनाए रखा जाता है, जिससे पौधों का विकास बेहतर होता है और अच्छी गुणवत्ता के फूल तैयार होते हैं।

जयपुर और दिल्ली तक पहुंचेगा उत्पादन

यहां तैयार होने वाले जरबेरा फूलों की आपूर्ति मुख्य रूप से जयपुर और दिल्ली के बाजारों में की जाएगी। तकनीकी विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्रति एकड़ करीब 20 लाख फूलों का उत्पादन संभव है। इससे किसानों को बेहतर आमदनी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

विभाग से मिला प्रशिक्षण और सहयोग

उपसंचालक उद्यान के पी एस किरार ने बताया कि किसान को विभाग की ओर से पुणे स्थित प्रशिक्षण संस्थान में आधुनिक संरक्षित खेती का प्रशिक्षण दिलाया (Polyhouse Farming) गया। इसके साथ ही समय समय पर तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया गया, जिससे परियोजना को सफल बनाने में मदद मिली।

उन्होंने बताया कि जिले में उच्च मूल्य वाली फसलों और संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उनका मानना है कि यह पहल दूसरे किसानों को भी नई तकनीकों के साथ खेती करने के लिए प्रेरित करेगी।

अब आगे की है बड़ी तैयारी

हृदेश अग्रवाल अपने इस उद्यम को और आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रहे हैं। भविष्य में वह कोल्ड चेन और ऑटोमेटेड फर्टिगेशन सिस्टम स्थापित करना चाहते हैं ताकि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार (Polyhouse Farming) हो सके। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था के साथ खेती को लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है।

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