छत्तीसगढ़

Nano Urea : नई तकनीक अपनाई तो बदली किस्मत, कम खर्च में किसान को मिला बेहतर उत्पादन

खेती में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल अब ग्रामीण इलाकों तक तेजी से पहुंच (Nano Urea) रहा है। कई किसान पारंपरिक तरीकों के साथ नई तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने में सफलता हासिल कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से खेती में आ रहे बदलाव का असर अब खेतों में साफ दिखाई देने लगा है।

बालोद जिले के एक किसान की सफलता इन दिनों आसपास के गांवों में चर्चा का विषय बनी हुई है। कम लागत, बेहतर फसल और आसान प्रबंधन के कारण दूसरे किसान भी उनके अनुभव से सीख लेने में रुचि दिखा रहे हैं। आधुनिक उर्वरक तकनीक ने उनके खेती के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।

आधुनिक खेती की मिसाल बने किसान : Nano Urea

बालोद जिले के डौण्डीलोहारा विकासखंड के वनांचल ग्राम कोडेकसा निवासी प्रगतिशील किसान हीराराम चुरगियां ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग कर खेती में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन और तकनीकी सलाह के बाद उन्होंने पारंपरिक दानेदार उर्वरकों की जगह आधुनिक नैनो उर्वरकों का उपयोग शुरू किया।

पांच वर्षों से कर रहे उपयोग

करीब पांच एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले हीराराम पिछले चार से पांच वर्षों से नैनो उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नई तकनीक अपनाने के बाद खेती के परिणाम पहले की तुलना में काफी बेहतर हुए हैं।

लागत में आई कमी

हीराराम बताते हैं कि नैनो उर्वरकों के इस्तेमाल से खेती की लागत कम हुई है। पहले जहां भारी खाद की बोरियों को ढोना और उनका प्रबंधन करना पड़ता था, वहीं अब यह परेशानी काफी हद तक समाप्त हो गई है। इससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है।

फसल की गुणवत्ता में सुधार

किसान के अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसलों की बढ़वार बेहतर (Nano Urea) हुई है। धान की फसल पूरे मौसम में हरी भरी बनी रहती है और उत्पादन के साथ गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि पहले की तुलना में फसलों में कीट और रोगों का असर भी कम हुआ है।

दूसरे किसान भी हो रहे प्रेरित

हीराराम की सफलता का असर आसपास के क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। कोडेकसा सहकारी समिति क्षेत्र सहित आसपास के कई किसान अब नैनो उर्वरकों की ओर रुख कर रहे हैं और इन्हें खरीदकर अपने खेतों में उपयोग कर रहे हैं।

वैज्ञानिक खेती पर जोर

हीराराम का मानना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों (Nano Urea) को अपनाएं तो कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इससे आय बढ़ाने के साथ खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

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