Delisting Tribal Rights : प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद बढ़ीं उम्मीदें, क्या अब डीलिस्टिंग पर आगे बढ़ेगी सरकार

जशपुरनगर में आदिवासी समाज के बीच इन दिनों डीलिस्टिंग और मतांतरण रोधी कानून को लेकर चर्चा (Delisting Tribal Rights) तेज हो गई है। प्रधानमंत्री से प्रतिनिधि मंडल की मुलाकात के बाद गांवों से लेकर सामाजिक बैठकों तक इस मुद्दे पर नए सिरे से बातचीत शुरू हो गई है। लोगों का मानना है कि लंबे समय से उठाई जा रही मांगों पर अब केंद्र स्तर पर गंभीरता दिखाई दे सकती है।
मुलाकात की खबर सामने आने के बाद जनजातीय संगठनों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। कई स्थानों पर इसे आदिवासी समाज की मांगों को लेकर महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। इसी बीच आने वाले संसद सत्र को लेकर भी उम्मीदें बढ़ी हैं और लोगों की नजर अब केंद्र सरकार की अगली पहल पर टिकी हुई है।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद बढ़ी उम्मीद : Delisting Tribal Rights
जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत के नेतृत्व में आदिवासियों के प्रतिनिधि मंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इस मुलाकात को सार्थक बताया है। प्रतिनिधि मंडल का कहना है कि बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने डीलिस्टिंग और मतांतरण से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से सुना।
मंच से जुड़े पदाधिकारियों का मानना है कि प्रधानमंत्री के सकारात्मक रुख से यह संकेत मिला है कि आने वाले समय में केंद्र सरकार आदिवासियों की इन प्रमुख मांगों पर आगे बढ़ सकती है। इसी विश्वास के साथ संगठन अब संसद के मानसून सत्र में संबंधित विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास तेज करने की तैयारी में है।
गृह मंत्री और उप राष्ट्रपति को भी सौंपा जाएगा ज्ञापन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने के बाद अब प्रतिनिधि मंडल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की तैयारी (Delisting Tribal Rights) कर रहा है। इस दौरान उन्हें भी डीलिस्टिंग और मतांतरण रोधी केंद्रीय कानून की मांग से जुड़ा ज्ञापन सौंपा जाएगा।
हाल ही में दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम में गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए थे। उन्होंने इस आयोजन को आदिवासियों का कुंभ बताते हुए इसकी सराहना की थी। ऐसे में इन मुद्दों को लेकर उनका रुख भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केंद्रीय नेताओं से संपर्क अभियान जारी रहेगा
जनजातीय सुरक्षा मंच के रोशन प्रताप ने बताया कि दिल्ली में आयोजित समागम डीलिस्टिंग और मतांतरण के विरोध को लेकर आदिवासी समाज का अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है। इसके बाद संगठन ने अपनी मांगों को लेकर जनप्रतिनिधियों से लगातार संपर्क बनाए रखने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने का अभियान जारी रहेगा। संगठन की कोशिश है कि मानसून सत्र के दौरान इन मांगों को लेकर ठोस प्रगति देखने को मिले।
आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी
जनजातीय सुरक्षा मंच से जुड़े नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री (Delisting Tribal Rights) से हुई मुलाकात ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी है। उनका मानना है कि आदिवासी समाज की दो प्रमुख मांगों पर केंद्र सरकार जल्द कोई पहल कर सकती है। इसी उद्देश्य से संगठन लगातार संवाद और जनसंपर्क अभियान चलाते हुए दबाव बनाए रखेगा।
मंच के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन और संपर्क अभियान दोनों जारी रहेंगे। अब सबकी नजर संसद के मानसून सत्र और केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।



