Lakhpati Didi : कभी घर तक सीमित थीं, अब कारोबार से बदल दी अपनी पहचान

गांव की महिलाओं की सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी इन दिनों चर्चा (Lakhpati Didi) में है। सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ एक छोटा प्रयास आज बड़ी उपलब्धि में बदल चुका है। आत्मविश्वास, मेहनत और सामूहिक प्रयास के दम पर कुछ महिलाओं ने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि पूरे गांव में नई पहचान भी बनाई है।
उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर सकती हैं। आज उनकी उपलब्धि आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
स्व सहायता समूह से बदली जिंदगी : Lakhpati Didi
बिलासपुर जिले की तखतपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बेलपान की राधा कृष्ण महिला स्व सहायता समूह की पांच महिलाओं ने अपने प्रयासों से सफलता की नई मिसाल कायम की है। समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं ने आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य तय किया और योजनाओं का लाभ लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया।
मिला आर्थिक सहयोग
महिलाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 15 हजार रुपये की आरएफ राशि और 60 हजार रुपये की सीआईएफ सहायता प्राप्त हुई। इसके अलावा बैंक से 6 लाख रुपये का ऋण भी उपलब्ध कराया गया। इस आर्थिक सहयोग ने उनके व्यवसाय की शुरुआत को मजबूती प्रदान की।
मसालों और खाद्य उत्पादों का शुरू किया कारोबार
प्राप्त राशि का उपयोग करते हुए महिलाओं ने हल्दी, मिर्च और अन्य मसालों के प्रसंस्करण का कार्य शुरू (Lakhpati Didi) किया। इसके साथ ही मुरकु और पापड़ निर्माण का व्यवसाय भी प्रारंभ किया गया। गुणवत्ता और निरंतर मेहनत के कारण उनके उत्पादों की मांग धीरे धीरे बढ़ती गई।
हर सदस्य की आय पहुंची लाखों में
समूह की महिलाओं के अनुसार आज प्रत्येक सदस्य प्रतिमाह लगभग 45 हजार से 50 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही है। इस तरह उनकी वार्षिक आय 5 लाख रुपये से अधिक पहुंच चुकी है, जिससे वे लखपति दीदी के रूप में पहचान बना चुकी हैं।
परिवारों की स्थिति हुई मजबूत
बढ़ी हुई आय का असर उनके परिवारों पर भी दिखाई दे रहा है। अब बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करना पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है। महिलाओं का कहना है कि आर्थिक मजबूती से उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
समूह की सदस्य बताती हैं कि पहले गांव में उनकी कोई विशेष पहचान (Lakhpati Didi) नहीं थी, लेकिन आज लोग उन्हें सफल उद्यमी के रूप में जानते हैं। उनकी यह उपलब्धि आसपास के गांवों की महिलाओं को भी स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।



