छत्तीसगढ़

खर्वे मौतकांड का सनसनीखेज खुलासा, 4 महीने में 8 कत्ल करने वाला ‘सीरियल किलर

रामसहाय गिरफ्तार, कुत्ते पर किया था जहर का ट्रायल

बलौदाबाजार/कसडोल/नवप्रदेश। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम खर्वे में पिछले चार महीनों से हो रही रहस्यमयी मौतों के पीछे छुपा खौफनाक सच सामने आ गया है। पुलिस ने गांव के ही 46 वर्षीय रामसहाय जायसवाल को गिरफ्तार किया है, जिसने एक-एक कर अपने ही 8 परिचितों को मौत के घाट उतार दिया। आरोपी इतना शातिर था कि वह मृतकों को अस्पताल ले जाने से लेकर उनके कफन-दफन तक में शामिल होता था ताकि किसी को शक न हो। ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने जब 7 शवों को कब्र से खोदकर निकाला और फॉरेंसिक जांच की, तब जाकर इस सामूहिक हत्याकांड की परतें खुलीं।

रंजिश, अंधविश्वास और कर्ज… हत्यारा एक, वजह अनेक!

आमतौर पर सीरियल किलिंग के मामलों में हत्या का एक ही मकसद होता है, लेकिन खर्वे मौतकांड में आरोपी रामसहाय ने हर हत्या अलग-अलग वजहों और सनक के चलते की। आरोपी ने बद्री, बुठालु, विनोद और महेतरू राम की हत्या सिर्फ इसलिए की क्योंकि वे उससे गाली-गलौज करते थे या चुनावों को लेकर उनका पुराना विवाद था। वहीं, छत्तुराम पर उसे अपनी पत्नी पर बुरी नजर रखने का शक था। हत्याकांड में अंधविश्वास और पैसे का भी बड़ा हाथ रहा। आरोपी का मानना था कि गजानंद उस पर ‘बैगा-गुनिया’ (जादू-टोना) करता है, जिसकी वजह से वह कर्ज में डूबा है और उसके जीवन में सुख-शांति नहीं है, इसी सनक में उसने गजानंद को मार डाला। इसके अलावा उसने चैतूराम से 50,000 का कर्ज लिया था, जिसके ब्याज और मूलधन से छुटकारा पाने के लिए उसने चैतूराम को ही रास्ते से हटा दिया। जमीन के विवाद में उसने बुधराम की भी जान ले ली।

‘कातिल’ का पहला शिकार: बेजुबान पर जहर का ट्रायल!

इस पूरे मौतकांड का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि आरोपी रामसहाय ने इंसानों को अपना निशाना बनाने से पहले एक बेजुबान कुत्ते पर जहर का परीक्षण (ट्रायल) किया था। वह देखना चाहता था कि चूहा मारने की दवा (सुहागा) कितनी तेजी से असर करती है। उसने गांव के ही एक कुत्ते को चुपके से जहर दिया और जब कुछ ही देर में उसकी तड़पकर मौत हो गई, तो आरोपी को यकीन हो गया कि उसका यह ‘हथियार’ अचूक है। इसके बाद ही उसने बेखौफ होकर गांव के लोगों को शराब में जहर मिलाकर पिलाना शुरू किया।

पहले मर्डर से आखिरी कत्ल तक

ग्राम खर्वे में चार महीने के भीतर हुआ यह खौफनाक घटनाक्रम आरोपी की सनक को दिखाता है। आरोपी ने फरवरी में बद्री और बुठालु को जहर दिया। जब ये दोनों मौतें सामान्य मान ली गईं, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ गया। इसके बाद मार्च के महीने में उसने तीन लोगों (छत्तुराम, बुधराम और विनोद कुमार) को निशाना बनाया। एक ही महीने में तीन मौतें होने के बावजूद गांव वाले इसे बीमारी या इत्तेफाक समझते रहे। अप्रैल में उसने कार्तिक की जान लेने की कोशिश की, जो इलाज के बाद बच गया और पुलिस के लिए सबसे बड़ा चश्मदीद बना। इसके बाद उसने तीन और हत्याएं कीं। आखिरकार 6 जून को ग्रामीणों की सजगता से पुलिस को आवेदन मिला और कातिल का दुस्साहस हमेशा के लिए रुक गया।

पुलिस इन्वेस्टिगेशन ऑफिशियल, ऐसे बेनकाब हुआ ‘कातिल’

ग्राम खर्वे में दहशत का कारण बनी इन मौतों की गुत्थी को सुलझाने के लिए पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और पारंपरिक पुलिसिंग का बेजोड़ तालमेल दिखाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में 7 मृतकों के शवों को कब्र से बाहर निकाला गया और मेकाहारा रायपुर के डॉक्टरों की विशेष टीम से उनका पोस्टमार्टम कराया गया। कातिल को कानून के शिकंजे में कसने के लिए डीएनए और विसरा के सैंपल फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित किए गए। जांच के दौरान ग्राउंड टीम को सबसे बड़ी कामयाबी तब मिली, जब पता चला कि आरोपी ने ‘चूहा मारने की दवा’ के नाम पर सुहागा/जहर हासिल किया था, जिसके बाद कड़ी पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

मामले का खुलासा

इस बहुचर्चित मामले का खुलासा आईजी रायपुर अमरेश मिश्रा के कुशल मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक (स्क्क) ओ.पी. शर्मा के सीधे निर्देशन में किया गया। इस टीम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह के मार्गदर्शन और एसडीओपी कसडोल कौशल किशोर वासनिक के नेतृत्व में निरीक्षक प्रवीण मिंज और साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक प्रणाली वैद्य की तकनीकी टीम ने हर संदिग्ध मौत के पैटर्न को आपस में जोड़कर आरोपी को दबोचा।

रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने मामले का सनसनीखेज खुलासा किया

आईजी के अनुसार, आरोपी रामसहाय इतना चालाक था कि हर हत्या के बाद वह खुद पीडि़तों को अस्पताल ले जाता था और समाज के सामने हमदर्दी जताने के लिए उनके अंतिम संस्कार और कफन-दफन में शामिल होता था। यही वजह थी कि लंबे समय तक गांव वाले इन मौतों को सामान्य या बीमारी मानते रहे। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने सभी वारदातों में एक ही तरीके (शराब में सुहागा/जहर मिलाकर पिलाना) का इस्तेमाल किया। वह हर बार अपने किसी परिचित को निशाना बनाता था ताकि आसानी से विश्वास जीता जा सके। आईजी ने बताया कि ग्रामीणों की आशंका के बाद मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया। कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में 7 शवों का उत्खनन (कब्र से निकालना) कराकर डॉक्टरों की स्पेशल टीम से पोस्टमार्टम कराया गया। फॉरेंसिक लैब से मिले वैज्ञानिक साक्ष्यों, डीएनए, विसरा रिपोर्ट और तकनीकी कडिय़ों को जोडऩे के बाद ही इस ‘सीरियल किलर’ को बेनकाब किया जा सका।

घटनाक्रम की टाइमलाइन

  • 06 फरवरी 2026 बद्री की मौत
  • 20 फरवरी 2026 बुठालु की मौत
  • 12 मार्च 2026 छत्तुराम की मौत
  • 20 मार्च 2026 बुधराम की मौत
  • 31 मार्च 2026 विनोद कुमार की मौत
  • 14 अप्रैल 2026 कार्तिक को जहर देने का प्रयास
  • 28 अप्रैल 2026 गजानंद की मौत
  • 29 अप्रैल 2026 चैतूराम की मौत
  • 14 मई 2026 महेतरू राम की मौत
  • 06 जून 2026 ग्रामीणों ने एसडीओपी कसडोल को आवेदन दिया
  • जांच के बाद आरोपी रामसहाय जायसवाल गिरफ्तार

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