
तिरुवनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक शुक्रवार सुबह से ही कांग्रेस खेमे में हलचल तेज (Kerala CM) रही। पार्टी दफ्तरों के बाहर नेताओं और समर्थकों के छोटे छोटे समूह लगातार नई चर्चाओं में जुटे दिखाई दिए। सबसे ज्यादा सवाल इसी बात को लेकर उठ रहे हैं कि आखिर केरल की कमान किस चेहरे को सौंपी जाएगी। कई विधायक भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और राजनीतिक गलियारों में अलग अलग दावे सुनाई दे रहे हैं।
राजधानी में बैठकों का दौर बढ़ने के साथ माहौल और गर्म हो गया। पार्टी के पर्यवेक्षकों ने पिछले दो दिनों में विधायकों से लगातार बातचीत की और अब उनकी रिपोर्ट शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने वाली है। कांग्रेस के भीतर यह चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है कि अंतिम फैसला किस नाम के पक्ष में जाएगा और क्या नेतृत्व कोई चौंकाने वाला फैसला ले सकता है।
आज सौंपी जाएगी पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट (Kerala CM)
कांग्रेस पर्यवेक्षक शुक्रवार दोपहर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपनी रिपोर्ट सौंप सकते हैं। इसके लिए पहले विधायकों के साथ सामूहिक बैठक हुई और बाद में एक एक विधायक से अलग बातचीत भी की गई। इन्हीं चर्चाओं और राय के आधार पर पूरी रिपोर्ट तैयार की गई है।
के सी वेणुगोपाल को मिला सबसे ज्यादा समर्थन
पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं में के सी वेणुगोपाल का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक बड़ी संख्या में विधायक उनके समर्थन में दिखाई दिए हैं। बताया जा रहा है कि करीब 40 से ज्यादा विधायकों ने उनके पक्ष में राय रखी है। इसी वजह से उन्हें फिलहाल सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
हालांकि अंतिम फैसला अभी पूरी तरह साफ नहीं माना जा रहा। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि राहुल गांधी के करीबी होने की वजह से नेतृत्व उनके नाम पर अलग तरीके से विचार कर सकता है। ऐसे में आखिरी समय तक स्थिति बदलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा।
रमेश चेन्निथला का नाम भी चर्चा में Kerala CM
अगर वेणुगोपाल के नाम पर सहमति नहीं बनती है तो रमेश चेन्निथला को दूसरा बड़ा विकल्प माना जा रहा है। पार्टी के कई विधायक उनके अनुभव को अहम मान रहे हैं। बताया जा रहा है कि दो दर्जन के करीब विधायक उनके समर्थन में राय रखते हैं।
वीडी सतीशन को सहयोगी दलों का सहारा
वीडी सतीशन का नाम भी तेजी से चर्चा में बना (Kerala CM) हुआ है। कांग्रेस के साथ साथ सहयोगी दलों का समर्थन भी उनके पक्ष में बताया जा रहा है। कई सहयोगी दलों का मानना है कि विपक्ष के नेता के तौर पर उन्होंने जमीन पर लगातार सक्रिय भूमिका निभाई है।
सहयोगी दलों के भीतर यह राय भी सामने आई है कि मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी ऐसे नेता को मिलनी चाहिए जो सीधे विधानसभा से जुड़ा हो और जनता के बीच लगातार सक्रिय रहा हो। इसी कारण सतीशन के नाम को भी गंभीरता से देखा जा रहा है।



