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IT Refund Alert : धारा-245 का नोटिस आया तो अटक सकता है ITR रिफंड, जानें क्या करें

आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने के बाद आमतौर पर करदाताओं को 4-5 सप्ताह में रिफंड (Refund) मिल जाता है। लेकिन कई मामलों में आयकर विभाग (Income Tax Department) की ओर से धारा-245 (Section 245) का नोटिस जारी किया जाता है। इसका मतलब है कि करदाता के रिफंड में कटौती हो सकती है या पूरा रिफंड पुराने टैक्स बकाया में समायोजित किया जा सकता है।

क्या है धारा-245 का नोटिस IT Refund Alert

धारा-245 (Section 245) के तहत आयकर विभाग को यह अधिकार है कि यदि किसी करदाता पर पिछले आकलन वर्ष (Assessment Year) का टैक्स बकाया है, तो उसे मौजूदा वर्ष के रिफंड (Refund) से समायोजित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में पहले करदाता को नोटिस भेजा जाता है।

इन वजहों से रुक सकता है रिफंड

रिफंड में कटौती या रोक के प्रमुख कारणों में पुराना टैक्स बकाया (Outstanding Tax), गलत ITR फाइलिंग, टीडीएस (TDS) या टैक्स क्रेडिट (Tax Credit) में अंतर और आकलन के बाद बनी नई कर मांग शामिल हैं।

नोटिस मिलने पर तुरंत करें जवाब

धारा-245 (Section 245) का नोटिस मिलने पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। करदाता को आमतौर पर 30 दिन के भीतर आयकर पोर्टल (Income Tax Portal) पर लॉग-इन कर ‘रेस्पांस टू आउटस्टैंडिंग डिमांड’ (Response to Outstanding Demand) में जवाब देना होता है। यदि विभाग की मांग सही है तो उसे स्वीकार किया जा सकता है, अन्यथा जरूरी दस्तावेजों के साथ आपत्ति दर्ज करनी होगी।

असहमति पर देने होंगे ये दस्तावेज IT Refund Alert

यदि करदाता विभाग की मांग से सहमत नहीं है तो उसे फॉर्म-16 (Form-16), फॉर्म-26एएस (Form-26AS), एआईएस (AIS), टीआईएस (TIS), निवेश संबंधी दस्तावेज, टैक्स भुगतान चालान, कैपिटल गेन (Capital Gain) का विवरण और पहले दाखिल किए गए रिटर्न सहित अन्य रिकॉर्ड जमा करने होंगे।

पूरा रिफंड भी हो सकता है समायोजित

अगर बकाया टैक्स रिफंड से अधिक है तो पूरा रिफंड (Refund) समायोजित होने के बाद भी करदाता को अतिरिक्त टैक्स जमा करना पड़ सकता है। इसलिए समय पर नोटिस का जवाब देना और टैक्स रिकॉर्ड अपडेट रखना जरूरी है।

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