रायपुरः सेंट्रल जोन में 39 लापता लोगों को खोजकर परिजनों से मिलाया

रायपुर। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के सेंट्रल जोन में लापता व्यक्तियों की तलाश के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान में पुलिस ने अब तक 39 लोगों को खोजकर उनके परिजनों से मिलवा दिया है। कुल 50 गुमशुदगी के मामलों में से 39 का पता लगाया जा चुका है, जबकि शेष 11 लोगों की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार, अब तक मिले सभी 39 व्यक्तियों से पूछताछ और जांच में किसी के साथ अपराध अथवा अनिष्ट होने की बात सामने नहीं आई है।
डीसीपी सेंट्रल जोन तारकेश्वर पटेल के निर्देशन और एडिशनल डीसीपी विवेक शुक्ला के मार्गदर्शन में विभिन्न थानों की टीमों ने यह अभियान चलाया। पुलिस ने लगातार पतासाजी, तकनीकी साक्ष्यों और आपसी समन्वय के माध्यम से लापता व्यक्तियों का पता लगाया।
पुलिस के मुताबिक, लापता होने के पीछे अलग-अलग व्यक्तिगत और पारिवारिक कारण सामने आए हैं। इनमें काम की तलाश में बाहर चले जाना, परिवार से नाराज होकर घर छोड़ना, मानसिक अस्वस्थता के कारण बिछड़ जाना, प्रेम संबंधों के चलते घर से जाना और विवाह कर लेना शामिल है। कुछ लोग नवरात्रि के दौरान परिजनों को बिना बताए डोंगरगढ़ दर्शन के लिए चले गए थे।
थानावार गुमशुदगी और बरामदगी की स्थिति

| थाना | कुल प्रकरण | मिले व्यक्ति |
|---|---|---|
| कोतवाली | 5 | 4 |
| गोलबाजार | 4 | 3 |
| मौदहापारा | 12 | 11 |
| गंज | 7 | 4 |
| सिविल लाइन | 10 | 6 |
| तेलीबांधा | 8 | 7 |
| देवेंद्र नगर | 4 | 4 |
| कुल | 50 | 39 |
एफआईआर दर्ज होने का मतलब अपहरण नहीं
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गुमशुदगी के मामलों को लेकर कुछ भ्रामक जानकारियां प्रसारित की गई थीं, जिनमें इन्हें कई लोगों के अपहरण की घटनाओं के रूप में प्रस्तुत किया गया। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार 22 मई 2026 के बाद प्राप्त गुमशुदगी की सूचनाओं पर भारतीय न्याय संहिता के तहत एफआईआर दर्ज कर तलाश और जांच की जा रही है। एफआईआर दर्ज होना केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, इससे अपहरण अथवा अन्य अपराध प्रमाणित नहीं होता। पुलिस ने नागरिकों से अपुष्ट सूचनाएं साझा नहीं करने की अपील की है।



