मध्यप्रदेश

Horticulture Farming : खेती में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी, अब बागवानी फसलों पर सरकार का खास जोर

मध्यप्रदेश में कृषि वर्ष को लेकर सरकार की तैयारियां अब जमीन पर दिखाई देने लगी हैं। गांवों में किसानों के बीच नई खेती पद्धतियों और ज्यादा मुनाफे वाली फसलों को लेकर चर्चा बढ़ रही है। कृषि विभाग की बैठकों और योजनाओं के बाद किसानों में भी यह जानने की उत्सुकता बढ़ी है कि आने वाले समय में किस तरह खेती से ज्यादा आमदनी हासिल की जा सकेगी।

प्रदेश के कई इलाकों में अब पारंपरिक खेती के साथ बागवानी फसलों की तरफ रुझान बढ़ता दिखाई दे रहा है। किसानों का कहना है कि यदि बाजार और तकनीक का सही साथ मिले तो फल, सब्जी और मसाला फसलें बेहतर कमाई का जरिया बन सकती हैं। सरकार भी इसी दिशा में बड़े स्तर पर काम करने की तैयारी में जुटी हुई है।

उद्यानिकी फसलों का बढ़ेगा दायरा

Mohan Yadav के नेतृत्व में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का फैसला लिया गया है। इसी के तहत प्रदेश में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र बढ़ाने के लिए 1 लाख 32 हजार 147 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

फल सब्जी और मसाला फसलों पर फोकस

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की योजना के अनुसार फल फसलों के लिए 18 हजार हेक्टेयर, सब्जियों के लिए 54 हजार हेक्टेयर और मसाला फसलों के लिए 56 हजार हेक्टेयर क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा पुष्प उत्पादन, औषधीय फसल और संरक्षित खेती को भी बढ़ावा देने की योजना तैयार की गई है।

किसानों को मिलेगी आधुनिक सुविधा

सरकार की तरफ से किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए उन्नत पौध सामग्री, तकनीकी प्रशिक्षण और आधुनिक सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के साथ पॉली हाउस, शेडनेट और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए भी सहायता दी जा रही है ताकि किसान कम लागत में ज्यादा उत्पादन कर सकें।

उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी

प्रदेश में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2022 23 में जहां कुल क्षेत्रफल करीब 25 लाख 96 हजार हेक्टेयर था, वहीं 2025 26 में यह बढ़कर 28 लाख 60 हजार हेक्टेयर से ज्यादा हो गया।

उत्पादन में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है।

कई क्षेत्रों में बढ़ रहा उत्पादन

मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, महाकौशल और चंबल जैसे क्षेत्रों में अलग अलग उद्यानिकी फसलों का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। आम, संतरा, अमरूद, पपीता, प्याज, टमाटर, लहसुन और मिर्च जैसी फसलें किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही हैं। सरकार अब किसानों को बाजार और निर्यात से जोड़ने पर भी जोर दे रही है।

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