छत्तीसगढ़

High Court Railway Officers : मजदूरों की परेशानी पर अदालत सख्त, रेलवे अफसरों से पूछा आखिर बिना सुविधाओं के काम क्यों

बिलासपुर में उसलापुर गुड्स शेड को लेकर चल रहा विवाद अब अदालत की सख्त निगरानी में पहुंच (High Court Railway Officers) गया है। सुनवाई के दौरान अदालत में जैसे ही मजदूरों और व्यापारियों को हो रही परेशानियों का मुद्दा उठा, माहौल गंभीर हो गया। श्रमिक संगठनों का कहना है कि जिस स्थान पर माल ढुलाई का बड़ा काम शिफ्ट किया गया है, वहां आज भी कई जरूरी सुविधाओं का अभाव है।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने रेलवे प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई। न्यायालय ने साफ शब्दों में कहा कि मजदूर भी इंसान हैं और उन्हें सम्मानजनक माहौल के साथ बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए। अदालत की इस टिप्पणी के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

रेलवे अधिकारियों से अदालत ने जताई नाराजगी : High Court Railway Officers

उसलापुर गुड्स शेड से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने रेलवे अधिकारियों से कई अहम सवाल पूछे। अदालत ने कहा कि यदि स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं थीं तो वहां संचालन शुरू करने का फैसला क्यों लिया गया।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने रेलवे प्रशासन को मजदूरों और व्यापारियों के लिए पीने के पानी, बिजली, सड़क, शेड, हमालों की व्यवस्था और विश्राम कक्ष जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एनके व्यास की एकल पीठ में हुई।

यूनियनों ने याचिका में उठाए गंभीर मुद्दे

रेलवे माल गोदाम मजदूर यूनियन और नया माल गोदाम ट्रक यूनियन की ओर से अधिवक्ताओं के माध्यम से याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया कि बिलासपुर रैक प्वाइंट गुड्स शेड को बंद कर पूरा काम उसलापुर स्थानांतरित कर दिया गया, जबकि वहां आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि स्थल पर श्रमिकों और व्यापारियों के लिए जरूरी व्यवस्थाओं का अभाव है। इसके समर्थन में तस्वीरें भी प्रस्तुत की गईं। साथ ही संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि कई जरूरी सुविधाएं अब तक विकसित नहीं हो सकी हैं।

अदालत ने पूछा कितने दिन में पूरी होंगी सुविधाएं

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने रेलवे प्रशासन से पूछा कि गुड्स शेड में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में कितना समय लगेगा। इस पर रेलवे पक्ष की ओर से आवश्यक कार्यों के लिए कुछ समय मांगा गया। हालांकि याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत को बताया कि पूरे ढांचे को विकसित करने में काफी अधिक समय लग सकता है। इस पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अब इस मामले की निगरानी अदालत स्वयं करेगी।

मानसून से पहले बढ़ी चिंता

याचिका में यह भी बताया गया कि आगामी मानसून के दौरान उर्वरक और अन्य आवश्यक सामग्री की आवक प्रभावित (High Court Railway Officers) हो सकती है। इसी चिंता को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से रेलवे को पत्र भेजकर बिलासपुर रैक प्वाइंट को कुछ समय तक चालू रखने का आग्रह किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अचानक पूरी व्यवस्था स्थानांतरित करने से व्यापारिक गतिविधियों और माल परिवहन पर असर पड़ सकता है।

परिवहन लागत और महंगाई का मुद्दा भी उठा

याचिका में यह तर्क भी रखा गया कि यदि व्यापार विहार क्षेत्र से जुड़ा पूरा माल उसलापुर के रास्ते लाया और भेजा जाएगा तो वाहनों को अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे परिवहन खर्च बढ़ेगा और उसका असर वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि उसलापुर क्षेत्र में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा दबाव बनाने और धमकी देने जैसी शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन इस संबंध में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

17 जून को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 जून तय की है। इससे पहले रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन को विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि मजदूरों और व्यापारियों से जुड़े इस मामले में अब प्रत्येक पहलू पर नजर रखी जाएगी और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर जवाबदेही भी तय की जाएगी।

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