छत्तीसगढ़

High Court Child Protection : मासूम बच्चों की बात सुन अदालत भी हुई गंभीर, सौतेली बहन के साथ भेजने से अदालत ने किया साफ इनकार

बिलासपुर में हुई सुनवाई के दौरान अदालत का माहौल उस समय बेहद भावुक (High Court Child Protection ) हो गया, जब दो मासूम बच्चों ने न्यायालय के सामने अपनी पूरी पीड़ा बताई। कोर्ट कक्ष में मौजूद लोगों के बीच भी बच्चों की बातों को लेकर गहरी चर्चा होती रही। बच्चों ने बेहद शांत लेकिन साफ शब्दों में कहा कि वे किसी कैद में नहीं हैं और जहां रह रहे हैं वहां खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

सुनवाई के दौरान बच्चों ने जो बातें कहीं, उसने पूरे मामले को अचानक गंभीर बना दिया। अदालत के सामने जब बच्ची ने अपने साथ हुई घटनाओं का जिक्र किया तो माहौल पूरी तरह बदल गया। इसके बाद अदालत ने तत्काल पूरे मामले की जानकारी और कानूनी तथ्यों की पुष्टि कराई।

सौतेली बहन ने लगाई थी याचिका : High Court Child Protection

सरगुजा इलाके की रहने वाली एक महिला ने अदालत में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। महिला ने आरोप लगाया था कि उसकी नाबालिग सौतेली बहन और भाई को अवैध तरीके से रोका गया है। उसने बच्चों को अपने साथ रखने की मांग भी की थी।

अदालत को दी गई पूरी जानकारी

मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि बच्चों को किसी तरह से बंधक बनाकर नहीं रखा गया है। उनकी सुरक्षा और कानूनी संरक्षण को देखते हुए उन्हें बाल संप्रेक्षण गृह में रखा गया है। इसके बाद अदालत ने दोनों बच्चों को पेश करने का निर्देश दिया।

बच्चों ने सुनाई दर्दभरी कहानी

पुलिस सुरक्षा के बीच दोनों बच्चों को अदालत में पेश किया गया। वहां भाई और बहन ने पूरी घटना बताई। बच्चों ने कहा कि याचिकाकर्ता महिला के पति ने नाबालिग बच्ची के साथ तीन बार दुष्कर्म किया था। इस मामले में पुलिस थाने में अपराध दर्ज किया जा चुका है और आरोपी फरार बताया गया है।

अदालत ने तुरंत कराई पुष्टि

बच्चों के बयान के बाद अदालत ने पूरे मामले की प्रशासनिक और कानूनी स्तर (High Court Child Protection ) पर जांच कराई। जानकारी सही पाए जाने के बाद अदालत ने बच्चों को सौतेली बहन की सुपुर्दगी में देने से साफ इनकार कर दिया।

फिलहाल संप्रेक्षण गृह में ही रहेंगे बच्चे

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने दोनों बच्चों को अभी बाल संप्रेक्षण गृह में ही कड़े कानूनी संरक्षण के बीच रखने का अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने प्रतिवादी समाज सेविका को भी जवाब पेश करने के लिए समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 29 जून को होगी।

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