उम्मीदों की उखड़ती सांसों को आज भी ट्रेन का इंतजार
जीतेन्द्र नामदेव
कवर्धा/नवप्रदेश। Even today, the gasping breath of hope waits for the train: कबीरधाम जिले के विकास की सबसे बड़ी उम्मीद मानी जाने वाली डोंगरगढ़-कवर्धा-कटघोरा रेल परियोजना आठ वर्ष बाद भी फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी है। 6 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल और तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने हजारों लोगों की मौजूदगी में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमिपूजन किया था। उस समय दावा किया गया था कि रेल संपर्क से जिले की तस्वीर बदल जाएगी, लेकिन आज तक न रेल की पटरी बिछ सकी, न निर्माण कार्य शुरू हुआ और न ही लोगों का इंतजार खत्म हुआ।
भूख हड़ताल हुई, ऐतिहासिक साइकिल यात्रा निकली, रेलवे संघर्ष समिति ने लगातार आंदोलन किए, जनप्रतिनिधियों ने ज्ञापन सौंपे और संसद तक यह मुद्दा पहुंचा, फिर भी परियोजना की रफ्तार आगे नहीं बढ़ सकी। अब भी जिले के लोग पूछ रहे हैं कि आखिर भूमिपूजन के बाद विकास की रेल कब दौड़ेगी।
डोंगरगढ़-कवर्धा-कटघोरा रेल परियोजना करीब 295 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित रेललाइन है। इसमें कबीरधाम जिले के लगभग 61 किलोमीटर क्षेत्र को रेल नेटवर्क से जोडऩे की योजना है। परियोजना के दायरे में जिले के लगभग 50 गांव आएंगे, जिनमें लोहारा तहसील के 15, कवर्धा के 23 और पंडरिया के 12 गांव शामिल हैं। प्रस्तावित रेललाइन में कुल 27 स्टेशन बनाए जाने हैं, जिनमें सहसपुर लोहारा, पंडरिया, गंडई, छुईखदान, मुंगेली, तखतपुर और काठाकोनी प्रमुख हैं।
आंदोलन अभी थमा नहीं
रेलवे संघर्ष समिति ने इस रेल परियोजना को स्वीकृति दिलाने और निर्माण शुरू कराने के लिए वर्षों तक आंदोलन चलाया। मार्च 2009 में वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव के नेतृत्व में बिलासपुर से डोंगरगढ़ तक ऐतिहासिक साइकिल यात्रा निकाली गई। इसके बाद जनजागरण अभियान, भूख हड़ताल किया गया। वर्ष 2010 में बिलासपुर रेल जोन के महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर परियोजना को प्राथमिकता देने की मांग की गई। संसद में भी कई बार यह मुद्दा उठाया गया, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हो सका।
भूमिपूजन के बाद आखिर क्यों थम गई रफ्तार
6 अक्टूबर 2018 को परियोजना का भूमिपूजन हुआ और उसी दिन विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई। इसके बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और परियोजना की गति भी धीमी पड़ गई। सितंबर 2020 में केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बावजूद निर्माण कार्य धरातल पर नहीं उतर सका। जिले के लोगों का कहना है कि वर्षों से केवल घोषणाएं और आश्वासन मिल रहे हैं, जबकि परियोजना आज भी प्रतीक्षा में है।
रेल नहीं, जिले के भविष्य का सवाल
विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना केवल रेल सुविधा तक सीमित नहीं है। रेललाइन बनने से व्यापार, उद्योग, कृषि, पर्यटन और खनिज परिवहन को नई गति मिलेगी। किसानों को बाजार, विद्यार्थियों को बेहतर आवागमन, मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। रेलवे स्टेशन विकसित होने से स्थानीय कारोबार भी बढ़ेगा। इसलिए इस परियोजना को कबीरधाम की आर्थिक जीवनरेखा माना जा रहा है।
कांग्रेस को भूलना नहीं चाहिए कि भारतीय जनता पार्टी इकलौती ऐसी पार्टी है जो जो कहती है, वो करती भी है। कांग्रेसियों को प्रदेश और कवर्धा जिले के विकास की चिंता भी भाजपा पर ही छोड़ देनी चाहिए। बात मेडिकल कॉलेज की हो या रेल लाइन की तो हमें कांग्रेस की बयानबाजी पर कुछ नहीं कहना, जनता को भाजपा पर विश्वास है कि जिस पार्टी ने छत्तीसगढ़ को बनाया है, संवारेगी भी वो ही। – जसविंदर बग्गा,
प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा, छत्तीसगढ़
डोंगरगढ़-कटघोरा नई रेल लाइन के शीघ्र निर्माण प्रारंभ कराने को लेकर मैं लगातार प्रयासरत हूं। केंद्र व राज्य सरकार भी इस दिशा में गंभीर है। पूर्व में लोकसभा सत्र में मुद्दा उठाने के साथ-साथ केंद्रीय रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव से मुलाकात कर आग्रह कर चुका हूं। संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान दिल्ली में पुन: केंद्रीय रेल मंत्री से मुलाकात कर उक्त विषय में चर्चा कर शीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ कराने के लिए आग्रह करूंगा। विभागीय प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। उम्मीद है शीघ्र ही नई रेल लाइन का निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। – संतोष पांडेय, सांसद, राजनांदगांव
2018 में भूमिपूजन किया गया, लेकिन आज तक न पटरी बिछी और न निर्माण शुरू हुआ। यदि परियोजना आगे नहीं बढ़ी है तो सरकार को इसकी वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। केवल घोषणाओं से विकास नहीं होता। जनता को समयबद्ध कार्ययोजना और धरातल पर निर्माण कार्य दिखाई देना चाहिए। – नवीन जायसवाल, जिलाध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी, कबीरधाम
रेलवे संघर्ष समिति ने स्वर्गीय पंडित अर्जुन प्रसाद शर्मा के मार्गदर्शन में वर्षों तक लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया। साइकिल यात्रा, जनजागरण और ज्ञापन के माध्यम से इस परियोजना को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया गया। यह किसी दल का आंदोलन नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास का अभियान था। – सुधीर केसरवानी, व्यवसाई , कबीरधाम
कटघोरा-कवर्धा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना वर्षों से पूरे अंचल की आकांक्षा रही है। रेलवे संघर्ष समिति ने लगातार जनजागरण और जनसंपर्क अभियान चलाकर इस मांग को जीवित रखा। अब समय आ गया है कि सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर निर्माण कार्य शुरू किया जाए, ताकि क्षेत्र की जनता का वर्षों पुराना सपना साकार हो सके। – पंडित वीरेंद्र शर्मा, संयोजक, रेलवे विचार मंच



