Cyber Fraud : साइबर फ्रॉड ठगी से रहें सावधान…

Cyber ​​Fraud: Beware of Cyber ​​Fraud...

Cyber Fraud


कुमार अभिनव। Cyber Fraud : इंटरनेट के उपयोग में वृद्धि के साथ, पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया पर आपराधिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है। साइबर कानून का मुख्य उद्देश्य कंप्यूटर अपराध, ऑनलाइन डेटा चोरी और इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में धोखाधड़ी को रोकना है। इसके अलावा साइबर अपराधियों के लिए आईटी एक्ट की विभिन्न धाराएं हैं, जिसके तहत उन्हें सजा दी जाती है।

देश के आधे (52त्न) इंटरनेट उपयोगकर्ता इस बात को लेकर भ्रमित हैं कि साइबर अपराध से खुद को कैसे बचाया जाए, और इससे भी अधिक (68त्न) का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि वे जो जानकारी ऑनलाइन देखते हैं वह किसी विश्वसनीय स्रोत से आती है या नहीं। जिसका सीधा फायदा साइबर अपराधियोंको होता है। इस समय सोशल मीडिया की पहुंच युवा से लेकर बूढ़े तक पहुंच चुकी है। और तथ्य यह है कि युवा और बूढ़े मुख्य रूप से इससे प्रभावित होते हैं।

उदाहरण के लिए, लॉकडाउन की अवधि ने साइबर अपराधियों के लिए उनका सीधा फायदा उठाना बहुत आसान बना दिया है। नतीजतन, साइबर अपराधियोंको अपराध करने से नहीं रोका जा सका है। कोविड-19 महामारी के चलते अधिकतर जगहों पर डिजिटल लेनदेन हो रहा है। ज्यादातर साइबर अपराधी छुट्टियोंको निशाना बनाकर ऐसे घोटालों में शामिल होते हैं।

वर्तमान में साइबर अपराधी आकस्मिकताओंका लाभ उठाने के लिए हमला कर रहे हैं। इससे हैकर्स इंटरनेट उपयोगकर्ताओं से महत्वपूर्ण डेटा चुरा सकते हैं या उपयोगकर्ता के डिवाइस को नियंत्रित कर सकते हैं और भविष्य के हमलों के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, साइबर अपराधी इंटरनेट उपयोगकर्ताओंको धोखा देने के लिए नकली वेबसाइट बनाते हैं और विभिन्न सामाजिक नेटवर्क के माध्यम से इस बात को फैलाते हैं। हैकर्स पहले, वो आपको आपके इनबॉक्स में आपके पसंदीदा ब्रांड के ‘विशेष ऑफर’ भेजेंगे। फिर, वे आपको आपकी खरीद की डिलीवरी के बारे में एक ईमेल भेजेंगे, और जैसे ही जनता ऐसी वेबसाइट के माध्यम से कुछ सामान खरीदती है, वे अप्रत्याशित ग्राहक से ऑनलाइन भुगतान करनेका आग्रह करते हैं और भुगतान होने के बाद ग्राहकको कभी भी ऑर्डर किया गया सामान प्राप्त नहीं होता है । और इस तरह के प्रभाव मुख्य रूप से त्योहारोंको लक्षित करके साइबर अपराधियोंद्वारा देखे जा सकते हैं।

साइबर अपराध (Cyber Fraud) कंप्यूटर नेटवर्क के माध्यम से की जाने वाली आपराधिक गतिविधि है। जबकि ज्यादातर साइबर क्राइम फायदे के लिए किए जाते हैं। जिसमें कंप्यूटरको हैकिंग, फि़शिंग अपराध माना जाता है और इसका उपयोग किसी भी अपराध या अपराधी (चोरी, जासूसी, चाइल्ड पोर्नोग्राफी और अन्य घृणा अपराध) को करने के लिए एक उपकरण के रूप में किया जाता है।

विभिन्न एयरलाइनों और बसों ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग की व्यवस्था की है। त्योहारों और कार्यक्रमों के लिए टिकट खरीदते समय जनताको विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए, क्योंकि हर साल एक साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्ट के अनुसार टिकट बुकिंग पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

बीते कुछ दिनों से वॉट्सऐप,फेसबुक वीडियो कॉल स्कैम किया जा रहा है। साइबर अपराधियों सोशल मीडिया ( जैसे फेसबुक )पर उपयोगकर्ताओंको लड़की की फेक प्रोफाइल बनाकर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते आ रहे है। फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार कर लेने के कुछ दिन बाद सोशल मीडिया के माध्यम से अपने व्हाट्सएप, वाइबर, इमो आदि नंबरोंका पता लगाकर वे वीडियो कॉल करते है और अश्लील हरकतें करने लगेंगे और वीडियो रिकॉर्ड कर लेंगे। बाद में वे वीडियो के आधार पर आपको धमकाना शुरू कर देते हैं। यदि आप उनको मागे हुवे पैसाका भुगतान नहीं करते हैं, तो यह वीडियो आपके फेसबुक पर साझा किया जाएगा। साइबर सुरक्षा विश्लेषक कुमार अभिनवका कहना है किसीको बदनाम करने के लिए साइबर अपराधी फोटो या वीडियो मॉर्फ करते है और न्यूड फोटो या वीडियो में तब्दील किया जाता है और उसे वायरल कर कर रहे हैं ।

ऐसे आपराधिक समूह मुख्य रूप से समाज में महिलाको लक्षित करते आरहे हैं। अभिनवका कहना है जागरूकता के अभाव में ही लोग किसी भी चीज़ पर भरोसा करके गलतियां कर बैठते हैं जिससे हैकर्स के लिए साइबर क्राइम (Cyber Fraud) को अंजाम दे पाना बेहद आसान हो जाता है ।अभिनव कहता हैं कि इन सबसे बचनेका सबसे सरल उपाय ये है कि आप जो भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म स्तेमाल कर रहे हों, जैसे फेसबुक पर अन्जान व्यक्तियो के साथ मत जुडे। अन्जान व्यक्तियो के साथ किए हुवे बातेको सबूत के तौर पर स्क्रीनशॉट और रिकॉर्डिंग अपने पास भी रखें। व्हाट्सएप, वाइबर, इमो आदि नंबरोंको किसी अन्जान व्यक्तियो के साथ सेयर मत कीजिए।

अपने व्हाट्सएप, वाइबर, इमो आदि नंबरों पर आने वाली अनजान वीडियो कॉल लेने से पहले कैमरेको कवर करें। आप नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर जाकर या cybercrimegov.in पर जाकर शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। साइबर शाखा ऑनलाइन और ऑफलाइन दर्ज की गई शिकायतों पर डील करता है। फर्जी ईमेल आईडी, कस्टमर केयर नंबर आदि के बहकावे में न आएं।

सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत पहचान न पेश करें। इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्सका इस्तेमाल मुख्य रूप से साइबर अपराधी आम जनता को लुभाने के लिए करते हैं। इंटरनेट पर मौजूद साइबर अपराध के प्रकारों से खुद को शिक्षित करके, आप उन सभी ऑनलाइन अपराधों से अवगत हो जाते हैं। जब आप मैसेंजर पर ईमेल चेक कर रहे हों या चैट कर रहे हों, तो किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए मैसेज के साथ अटैच किए गए लिंक पर क्लिक करते समय सावधान रहें।

यदि आप किसी साइबर अपराध में शामिल रहे हैं, तो आप नजदीकी पुलिस स्टेशन या पुलिस मुख्यालय में जाकर साइबर सेल में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यदि आप शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, तो आप ई-मेल के माध्यम से पुलिस में शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं।

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