Navpradesh Interview : मोदी सरकार-2 का एक साल रहा स्वर्णिम: डॉ. रमन सिंह

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रायपुर। छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) के पूर्व मुख्यमंत्री (former cm) व भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह (dr. raman singh) ने मोदी सरकार के छह साल के कार्यकाल को अभूतपूर्व उपलब्धियों से भरा बताया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार-2 (modi government-2) के एक साल (one year) में वे काम हुए, जिनका लोग शताब्दियों से इंतजार कर रहे थे। यह स्वर्णिम काल इतिहास में दर्ज हुआ है।

हमारे कार्यकर्ता इन उपलब्धियों को बताने व भाजपा के घोषणापत्र का हिसाब देने के लिए लोगों के बीच जा रहे हैं। साथ ही वे कोविड 19 को लेकर लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उन्होंने प्रदेश सरकार के कामकाज को लेकर कहा कि उसके पास कोई उपलब्धि नहीं है। सरकार के प्रति लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कल किस दिशा में जाएगा, पता नहीं।

हालांकि प्रदेश (chhattisgarh) के पूर्व मुख्यमंत्री (former cm) डाॅ. सिंह (dr. raman singh) ने यह भी स्वीकार किया कि राज्य में अभी कोई बड़ा परिवर्तन संभव नहीं है। नवप्रदेश के संपादक यशवंत धोटे व उनकी टीम के साथ खास बातचीत में डॉ. सिंह ने प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक हालातों, भाजपा की आगे की रणनीति, केंद्र की मोदी सरकार के छह साल, कोरोना महामारी जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी।

पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश…

सवाल: मोदी सरकार के एक साल पूरा होने पर आपकी जो वर्चुअल रैलियां चल रही हैं, उससे आप क्या मैसेज देना चाहते हैं?

जवाब- उपलब्धियां अपनी जगह हैं। इन उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने का काम साथ ही साथ कोविड 19 को लेकर जनता को जागरूक करने के लिए हमारे कार्यकर्ता जनता के बीच जा रहे हैं। वे लोगों को सोशल डिस्टंसिंग, मास्क, सेनिटाइजर का इस्तेमाल आदि तमाम उपायों के बारे में बता रहे हैं। साथ ही ये भी बता रहे हैं कि मोदी सरकार -2 (modi government-2) के जो एक साल (one year) पूरे हुए हैं उनमें अद्भुत काम हुए हैं।

शताब्दियों तक जिन कामों का देश की जनता ने इंतजार किया वो काम इस एक साल में हुए हैं। रामजन्मभूमि को लेकर विवाद सदियों से चल रहा था उसका निराकरण हुआ। सबसे बड़ी बात कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 A, जिसके लिए डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की शहादत हुई, उसे हटा दिया गय। उनकी शहादत के वक्त नारे लगे थे कि इस देश में दो विधान, दो प्रधान व दो निशान नहीं चलेंगे। इस नारे की संकल्पना अब जाकर साकार हुई है।

सीएए भी अपने आप में इतिहास रचने वाला है। अफगानिस्तान , पाकिस्तान, बांग्लादेश में रहने वालों को प्रताडि़त किया गया, उनके घर लूटे गए, जलाए गए, उनके खिलाफ धर्मांतरण का षड्यंत्र चलता रहता है। इन लोगों को नागरिकता देने का ये काननू है। लंबे समय से इसकी मांग उठ रही थी। ये स्वर्णिम काल इतिहास में दर्ज हो चुका है। तीन तलाक का मुद्दा भी इन कामों में है, जिसने करोड़ों मुस्लिम बहनों के जीवन में सु:खद परिवर्तन लाया।

इसके लिए हिम्मत व हौसला चाहिए और वो किसी में है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में है। 2014-19 ऐतिहासिक कालखंड रहा। तब मूल मंत्र था भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में विजय का। रीति व नीति में परिवर्तन का। अभूतपूर्व सफलता भी मिली। 30 करोड़ लोगों के खाते खोले गए। उन्हें डीबीटी से जोड़ा गया। भ्रष्टाचार की कड़ी से उन्हें मुक्त किया गया। विभिन्न योजनाओं के पैसे अब सीधे उनके खाते में जाने लगे। 10 करोड़ शौचालय बने। ढाई करोड़ आवास बने, तीन करोड़ लोगों के घर बिजली पहुंची। व्यापक रूप में अंत्योदय की संकल्पना साकार हुई।

एयर स्ट्राइक हुआ, सर्जिकल स्ट्राइक हुआ, जीएसटी कानून बना, 2022 तक फसलों के एमएसपी को लागत मूल्य से दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया, अभी कोविड 19 महामारी से उपजे संकट से निपटने 20 लाख करोड़ के पैकेज जैसे बड़े कदम उठाए गए। ये बातें हम एक बार में बता नहीं सकते। विस्तार से बताने जनता के दरवाजे तक जा रहे हैं। भाजपा कार्यकर्ता 25 लाख घरों तक जा रहे हैं। लोगों को मोदीजी का पत्र दे रहे हैं। हम जनता के सामने अपने घोषणा पत्र का हिसाब देने जा रहे हैं।

सवाल: आप 15 साल राज्य के मुख्यमंत्री रहे, मौजूदा सरकार का 16 माह का कार्यकाल हुआ है, इसे आप किस रूप में देखते हैं?

जवाब: जब हम अपना घोषणा पत्र लेकर जा रह हैं, तो दूसरे हाथ में उनका भी घोषणा पत्र भी लेकर जाते हैं। अपने 18 माह के कार्यकाल में भूपेश जी ने लोगों से वादाखिलाफी की। छल किया। जनता को गुमराह कर सरकार में बैठने का काम किया। शराबबंदी की बात कही। करोड़ों महिलाओं ने विश्वास किया। कभी कसमें खाने वाले आज भूल गए कि उन्होंने शराबबंदी का वादा किया था।

सबसे बड़ा मुद्दा- दो साल का बोनस कहां दिया। धान के लिए 2500 रुपए देने की बात कही, उसको भी चार किश्तों में बांट दिया। सरकार कर्ज में डूब गई है। मुझे कहा जाता है कि मैंने कर्ज लिया। मैं 15 साल मुख्यमंत्री रहा। मेरे कार्यकाल में 42 हजार करोड़ का कर्ज लिया गया है।

जबकि मौजूदा सरकार अब 26-30 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। यदि कर्ज का ऐसा ही एवरेज चला तो छत्तीसगढ़ का हर एक व्यक्ति कर्ज के बोझ में दब जाएगा। ये सरकार सिर्फ झूठे वादे कर रही है।अवैध शरबा बिक्री से राज्य में हर माह 100 करोड़ रुपए की अफरा-तफरी हो रही है।

हर शराब दुकान पर अवैध बिक्री का एक काउंटर बना हुआ है। ये खुलेआम हो रहा है। राज्य में लॉकडाउन में खुलेआम शराब बिकी, ये सरकार की असफलता को दर्शाता है। विकास के सारे काम ठप है। इनकी कोई उपलब्धि नहीं रही है। मनरेगा को छोड़कर राज्य में कोई काम नहीं हो रहा है। उसका भी पेमेंट सही समय पर नहीं कर रहे हैं।

सवाल: मजदूरों को लेकर आपने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है, वो किस लिहाज से है?

जवाब- हमारे मजदूर भाई ढाई लाख की संख्या में छत्तीसगढ़ में आए हैं। उसमें से इन्होंने सिर्फ 30-40 हजार लोगों को इन्होंने ट्रेन चढ़ाया। बाकि सब या तो बस से आया पैदल या धक्के खाते आए हैं। प्रवासी मजदूरों के नाम पर 1000 रुपए जमा करना था। गुजरात में 2000 रुपए, बिहार में 1000 प्रति मजदूर दिए गए। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से मजदूरों को एक रुपया नहीं दिया गया। न उनकी दवा के लिए न उनके बच्चों के लिए कोई पैसा दिया गया।

और क्वारंटाइन सेंटर… तो मैं कहता हूं ये यातनागृह हैं। मजदूरों को स्कूलों के बरामदे में ठूस दिया गया है। न अच्छे खाने-पीने की व्यवस्था है न सोशल डिस्टंसिंग का पालन हो रहा है। हिंदुस्तान में छत्तीसगढ़ राज्य में सरपंच व कोटावारों के भरोसे क्वारंटाइन सेंटर चल रहे हैं। लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। आज ये हालत हो गई है कि छत्तीसगढ़ में जितने भी मजदूरों के परिवार हैं, उनकी पीड़ा व तकलीफ को सुनने वाला कोई नहीं है।

सवाल: भाजपा के कुछ नेता मौजूदा सरकार की उम्र तय करने में लगे हैं, ये किस परिप्रेक्ष्य में हो रहा है?

जवाब: सरकार के प्रति जनता में आक्रोश है। जनता के मन में अंदर ही अंदल उबाल आ रहा है। लेकिन मैं इस बात को मानने वालों में से नहीं हूं। सरकार पूर्ण बहुत में है। 18 महीने हुए हैं और कोई ऐसी परिस्थिति छत्तीसगढ़ नहीं दिख रही है कि कोई बड़ा परिवर्तन फिलहाल संभव है। लेकिन सरकार के प्रति लोगों की नाराजगी निश्चित रूप से दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। इनके कामों से विधायकों के आक्रोश से किस दिशा में कल जाएगा ये कोई नहीं कह सकता।


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