
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही प्रदेश के सहायक शिक्षकों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ (CG Budget Session 2026) गई हैं। सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन ने सरकार से बजट में “मोदी की गारंटी” के तहत वर्षों से लंबित वेतन विसंगति को दूर करने और क्रमोन्नति वेतनमान लागू करने की मांग की है।
फेडरेशन का कहना है कि सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में सहायक शिक्षकों की वेतन असमानता समाप्त करने और सभी शिक्षकों को क्रमोन्नति वेतनमान देने का वादा किया था, जिसे अब बजट के माध्यम से लागू किया जाना चाहिए।
फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने कहा कि सहायक शिक्षक लंबे समय से वेतन विसंगति की समस्या से जूझ रहे हैं और समान कार्य करने के बावजूद उन्हें अन्य शिक्षकों की तुलना में कम वेतनमान मिल रहा है।
इससे शिक्षकों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है और इसका असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बजट सत्र सरकार के लिए अपने वादों को पूरा करने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर है और सहायक शिक्षकों को न्यायोचित वेतनमान देने के लिए ठोस घोषणा की जानी चाहिए।
फेडरेशन ने यह भी मांग की है कि प्रदेश के सभी सहायक शिक्षकों को हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ दिया जाए, जैसा कि याचिकाकर्ता शिक्षकों (CG Budget Session 2026) को दिया जा रहा है।
इसके साथ ही पूर्व सेवा अवधि की गणना, पूर्ण पेंशन का लाभ, पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता और लंबित वित्तीय लाभों के भुगतान पर भी स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से लंबित इन मुद्दों का समाधान न होने से शिक्षकों में निराशा बढ़ रही है।
फेडरेशन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इस बार बजट में सहायक शिक्षकों की मांगों को लेकर स्पष्ट घोषणा नहीं की गई तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। फेडरेशन का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायक शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और जब तक उनके हितों की सुरक्षा नहीं होगी, तब तक शिक्षा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार संभव नहीं है।
बजट सत्र से पहले फेडरेशन के पदाधिकारियों ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी मांगों से अवगत (CG Budget Session 2026) कराया है। अब प्रदेश के हजारों सहायक शिक्षकों की नजर बजट पर टिकी हुई है और सभी को उम्मीद है कि सरकार उनकी वेतन विसंगति और अन्य लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर राहत प्रदान करेगी।



