Bhent Mulakat : डेनेक्स फैक्टरी के पांचवे यूनिट छिंदनार का हुआ MOU |

Bhent Mulakat : डेनेक्स फैक्टरी के पांचवे यूनिट छिंदनार का हुआ MOU

Bhent Mulakat: MoU signed for the fifth unit of Denex Factory, Chhindnar

Bhent Mulakat

रायपुर/नवप्रदेश। Bhent Mulakat : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राज्यव्यापी भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के तहत आज बस्तर संभाग के दौरे पर है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सामने डेनेक्स एफपीओ एवं एक्सपोर्ट हाउस, तिरपुर के बीच एमओयू हुआ। डेनेक्स फैक्टरी के पांचवे यूनिट छिंदनार का एमओयू हुआ।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के सामने डेनेक्स एफपीओ एवं एक्सपोर्ट हाउस, तिरपुर के बीच एमओयू हुआ।

मुख्यमंत्री ने (Bhent Mulakat) कटेकल्याण में स्थापित नई डेनेक्स फैक्टरी का किया निरीक्षण। डेनेक्स कपड़ा फैक्टरी के श्रमिकों से मुख्यमंत्री ने की मुलाकात। मुख्यमंत्री बघेल ने डेनेक्स में काम करने वाली उद्यमी महिलाओं की मेहनत और लगन की तारीफ कर उनका उत्साहवर्धन किया। फैक्टरी के कार्य और उत्पाद को लेकर श्रमिकों से चर्चा हुई। विदेश से डेनेक्स में बने कपड़ों की मांग को देखते हुए सीएम ने महिलाओं का हौसला बढ़ाया। तय कार्यक्रम के मुताबिक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सोमवार को हेलिकॉप्टर के जरिए रायपुर से दंतेवाड़ा जिले से कटेकल्याण गए।

पारंपरिक ढेंकी चावल बनाने वाली महिलाओं से की मुलाकात

इस दौरान CM बघेल ने (Bhent Mulakat) फैक्टरी में पारंपरिक ढेंकी चावल बनाने वाली महिलाओं से मुलाकात की। उन्होंने महिलाओं से ढेंकी चावल के बारे में ली जानकारी। ढेंकी चावल बनाने वाली महिलाओं को शुभकामनाएं दी।

बतादें कि किसान अपने खेती के काम में जैविक खाद का उपयोग करते हैं। इसी प्रकार यहां धान की खेती की जाती है जिसमें किसी भी प्रकार की कोई भी रासायनिक खाद एवं दवाइयों का प्रयोग नहीं किया जाता है।

ढेंकी एक पुरानी शैली का चावल मिल है, यह कठोर लकड़ी की बनी होती है। जिसमें एक ओर पैर से दबाया जाता है और दूसरी ओर लोहे की एक मूसल समान लगी होती है। जब चावल की बालियों में भार के कारण बल पड़ता है तो सुनहरी भूसी अलग हो जाती है। पहले गांव के प्रत्येक घरों में ढेंकी होती थी। गांव में सुबह-सुबह ढेंकी की ढक-ढक की आवाज होती थी, जिससे गांव के लोग सुबह उठकर अपने-अपने दैनिक कार्यों में लग जाते थे। ढेंकी से प्राप्त चावल बहुत स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है। ढेंकी चावल बनाने की पारंपरिक शैली आज भी नेपाल, बांग्लादेश और भारतीय राज्यों असम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में देखने को है।

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