Balod : देवपाण्डुम झरना में छुपे है कई रहस्य, ब्रिटिश काल का धन…अब पर्यटन स्थल…

Balod District, Tribal block, District Panchayat Daundi, Dependent Village Devpandum,

Balod District Devpandum

लक्ष्मीकांत बंसोड़

डौंडी। बालोद जिला (Balod District) के एक मात्र आदिवासी ब्लाक (Tribal block) अंतर्गत जनपद पंचायत डौंडी (District Panchayat Daundi) के ग्राम पंचायत रजही आश्रित ग्राम देवपाण्डुम (Dependent Village Devpandum) में पत्थरों की मनमोहक प्राकृतिक नदी है, जिसकी खासियत यह कि साल के बारह महीने इस नदी में कलकल की मधुर ध्वनि से झरना बहती है।

पत्थरों के मध्य बनी सुरंग गुफा आकर्षण का केंद्र

नदी के अगल बगल पहाड़ व पत्थरों के मध्य बनी सुरंग गुफा आकर्षण का केंद्र है। ग्राम देवपाण्डुम के इस झरना में अनेक देवी देवताओं का वास है मान्यता ये कि 12 ग्रामों के ग्रामीण मिलकर देवाताओं को पूजने अपनी आस्था रखते है, यहां कई रहस्य छुपा हुआ है, इस दृश्य को देखने छत्तीसगढ़ के तमाम स्थलों के लोग यहां सदियों से आते जा रहे है।

किन्तु बरसाती दिनों यहां की झरना सौंदर्य को निहारने आमजनों की खासी भीड़ उमड़ती आते आ रही है। गांव के ग्रामीणों ने पुरातत्व विभाग व शासन से मांग किया है कि इस स्थल को पर्यटन स्थल बनाया जाय। ताकि पर्यटक के अलावा यहां कि वस्तुस्तिथि से देश विदेश के लोग भलीभांति परिचित हो सके।

पत्थरों से बना झरना पूर्णरूप से प्राकृतिक

ग्राम पंचायत रजही के आश्रित ग्राम देवपाण्डुम के ग्रामीण रामाधीन कुरेटी, झगरू राम कुरेटी सहित अन्य लोगों ने बताया कि पत्थरों का यह झरना पूर्णरूप से प्राकृतिक है धोबी घाट से पानी का स्रोत बारह महीने प्रवाहित होता आ रहा है, झरना के नीचे देवदाहरा व आगे को धुटा मारदी नदी के नाम से जाना जाता है यहां का पानी खरखरा जलाशय में जाकर समाहित होता है।

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झरना के ऊपर दुर्गम पहाड़ में शीतला व दूसरे छोर पर दंतेश्वरी मूर्ति व अन्य देवी देवता स्थापित किया गया है। किंतु मंदिर का निर्माण अब तक नही किया गया है आसपास के 12 गांव के ग्रामीण जन मिलजुल कर देवी देवताओं की आस्थापूर्वक पूजा अर्चना पूर्वजों जमाने से करते आ रहे है। वही प्राकृतिक झरना का लुफ्त उठाने व पिकनिक मनाने छत्तीसगढ़ के लोगों की भीड़ हमेशा यहां जमा होती है।

गुफा का राज आज तक किसी ने नहीं जाना

इस झरना के ठीक पीछे दो किमी दूर जंगल में एक और पत्थर की छोटी नदी है यहां भी बारह माह झरना का पानी बहता है। ऊपर पत्थरों के बीच सुरंग वाली गुफा है, इस गुफा के आरपार आज तक कोई नही जा पाया चूंकि अंदर घनघोर अंधेरा है, गुफा के अंदर दस मीटर साईड में एक सुरंग से लोग अंदर बाहर निकलने का आनंद लेते है।

लेकिन मुख्य सुरंग कहा से कहा तक बना हुआ है इस रहस्य का राज- राज ही है। यह गुफा प्राकृतिक है अथवा इसे ब्रिटिश काल मे बनाया गया हो इसकी जानकारी किसी के पास नही है। इस गुफा सामने देवपाण्डुम ग्रामीण जोड़ा गरदा पाठ देव मूर्ति स्थापित कर ग्रामीण हरेली – होली पर्व व गांव बनाने वक्त सदियों से पूजा अर्चना करते आ रहे है।

धन निकालने पर होगी मौत

राजा महाराजा काल मे यहां धन गड़े होने की बात तथा धन निकालने की कोशिश में जान जाने की बात भी कहते है ग्रामीण देवपाण्डुम गांव से रामाधीन व झगरुराम के अनुसार उनके पीढ़ी दादा- परदादा व पिता द्वारा उन्हें अवगत कराया गया कि ब्रिटिश काल में राजा महाराजा और अंग्रेजो के मध्य छिड़ी जंग में उस समय राजा महाराजा द्वारा इस झरना जंगल मे सोने चांदी का धन छुपाकर गड़ाया गया है, जानकारी बाद गड़े धन निकालने में कोई भी आमजन व तांत्रिक किस्म के लोग आज तलक सफल नही हो पाए है।

यही नही जिन्होंने यह हिमाकत कोशिश की उसकी जान भी चली गई। जिसका ताजा उदारहण बताते ग्रामीण कहते है कि सालों साल पूर्व 12 गांव के कुछ लोग यहां धन गड़े होने की सूचना पर एकराय होते हुए लालचवश गड़े धन स्थल पर खनन करने लग गए तभी एक व्यक्ति को देव सवार हो गया, सवार देव ने तेल व तिल की मांग कर कहा कि यदि गड़ा धन चाहते हो तो मानव नर की बलि देनी पड़ेगी।

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Dependent Village Devpandum

तब धन लालच में खनन कर रहे व्यक्तियों ने यह मान लिया कि यहां देवताओं का वास है तभी से देवपाण्डुम व 12 ग्राम के लोगों की आस्था देव देवियों पर टिकी हुई है। ग्रामीणों के ही अनुसार इसके बाद इस कहानी को सुनकर वर्तमान 35 वर्ष पूर्व जिले के अन्य राजनांदगांव क्षेत्र से कुछ लालची तत्व के लोग गड़े धन को निकालने रात्रि समय पहुँचे,शांत माहौल में ठकठक की आवाज सुनकर ग्रामीण उक्त स्थल पहुँचे वो दुम दबाकर भाग निकले परंतु वे एक महीने के अंदर पुन: उसी स्थल रात्रि गड़े धन निकालने धमक गए।

जहां सब्बल, कुदाली, फावड़ा व अन्य लोहे की औजार के साथ जनरेटर साथ लेकर खुदाई की प्रक्रिया अपना रहे थे तभी खनन करने वालो में घटना स्थल ही एक स्वजन की प्राण पखेरू उड़ गई और वे मृत व्यक्ति को लेकर वहां से नौ दो ग्यारह हो गए। ग्रामीणों की माने तो उसी समय से ग्रामवासी उक्त धन स्थल मे घोड़ा,हाथी, सांकल, व ईष्ट देवी स्थापित कर आस्था की ज्योत जलाते आ रहे है। वही उक्त स्थल को ईंट से घेरकर भी रखा गया है।

ग्रामीणों की इस कथन में सच्चाई कहा तक है यह तो पुरातत्व विभाग जानें। लेकिन बात प्राकृतिक सौंदर्य की हो तो यकीनन यह पर्यटन के लिए उपयुक्त स्थल हो सकता है। जिसकी मांग देवपाण्डुम के ग्रामीण शासन प्रशासन से कर रहे है।

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