ACB-EOW Action: तीन रिश्वतखोरी मामलों में एसीबी-ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में पेश किए अभियोग पत्र, बाबू और एएसआई पर चलेगा मुकदमा
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने रिश्वतखोरी के तीन अलग-अलग मामलों में कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए विशेष न्यायालयों में अभियोग पत्र (चार्जशीट) पेश कर दिए हैं। तीनों मामलों में आरोपियों को शिकायतकर्ताओं से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उनके खिलाफ न्यायालय में विधिवत मुकदमा चलेगा।

एसीबी-ईओडब्ल्यू के अनुसार तीनों मामले कोरबा, बिलासपुर और सक्ती जिले से जुड़े हैं। आरोपियों में दो बाबू और एक सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) शामिल हैं। सभी के खिलाफ जांच पूरी होने के बाद संबंधित विशेष न्यायालयों में अभियोग पत्र दाखिल कर दिया गया है।
कोरबा में 40 हजार रुपये लेते पकड़ा गया था बाबू ACB-EOW Action
पहला मामला कोरबा जिले का है। 29 मई 2026 को उपरोड़ा स्थित बैढ़ों पोंड़ी कार्यालय में पदस्थ बाबू प्रदीप मिश्रा को शिकायतकर्ता अनुदलाल बघेल से 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए एसीबी की टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय, कोरबा में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया है।
बिलासपुर में एडीएम कार्यालय का बाबू गिरफ्तार हुआ था
दूसरा मामला बिलासपुर का है। 10 मई 2026 को अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम) कार्यालय में पदस्थ बाबू विजय पाण्डेय को शिकायतकर्ता देवेंद्र कश्यप से 15 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए ट्रैप कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया था। इस प्रकरण की जांच पूरी होने के बाद विशेष न्यायालय (पीसी एक्ट), बिलासपुर में चार्जशीट दाखिल की गई है।
सक्ती में एएसआई 20 हजार रुपये लेते पकड़ा गया था
तीसरा मामला सक्ती जिले के चंद्रपुर थाना क्षेत्र का है। यहां 10 मई 2026 को सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) एस.एन. मिश्रा को शिकायतकर्ता शिव बरेठ से 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने रंगे हाथ पकड़ा था। इस मामले में विशेष न्यायालय (पीसी एक्ट), जांजगीर-चांपा में अभियोग पत्र पेश किया गया है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चलेगा मुकदमा
एसीबी-ईओडब्ल्यू ने बताया कि तीनों मामलों में जांच पूरी होने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) के प्रावधानों के तहत आरोपियों के खिलाफ अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। न्यायालय में अभियोग पत्र दाखिल होने के बाद अब संबंधित मामलों की सुनवाई होगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। शिकायत मिलने पर त्वरित जांच और ट्रैप कार्रवाई की जा रही है, ताकि भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।


