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High Court Dowry Case : पारिवारिक विवाद में अदालत ने रखी बड़ी शर्त, रकम जमा करने के बाद ही मिलेगी राहत

पारिवारिक विवाद से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी और आदेश ने कानूनी गलियारों में चर्चा (High Court Dowry Case) बढ़ा दी है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राहत देने से पहले एक महत्वपूर्ण शर्त तय की, जिसके बाद पक्षकारों और अधिवक्ताओं के बीच फैसले को लेकर बातचीत तेज हो गई। अदालत ने साफ कर दिया कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना अंतरिम सुरक्षा का लाभ नहीं मिल सकेगा।

मामला पति पत्नी के बीच चल रहे विवाद और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को टकराव की जगह बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की सलाह दी। इसके साथ ही विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया गया।

एक लाख रुपये जमा करने की शर्त : High Court Dowry Case

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पति को निर्देश दिया है कि वह मीडिएशन सेंटर में एक लाख रुपये जमा करे। राशि जमा करने के बाद उसकी रसीद संबंधित पुलिस अधीक्षक को प्रस्तुत करनी होगी। अदालत ने कहा कि इसके बाद ही गिरफ्तारी पर रोक संबंधी आदेश प्रभावी माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि तय समय के भीतर राशि जमा नहीं किए जाने की स्थिति में दी गई अंतरिम सुरक्षा स्वतः समाप्त हो जाएगी।

शर्त पूरी नहीं हुई तो याचिका भी होगी निरस्त

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर रकम जमा नहीं की जाती है तो केवल गिरफ्तारी से राहत ही समाप्त नहीं होगी, बल्कि आपराधिक याचिका भी बिना किसी अतिरिक्त आदेश के स्वतः खारिज मानी जाएगी। साथ ही यह व्यवस्था भी दी गई है कि यदि भविष्य में दोनों पक्षों के बीच अंतिम समझौता हो जाता है तो जमा की गई राशि को उसी समझौते में समायोजित किया जा सकेगा।

दहेज प्रताड़ना का दर्ज है मामला

मामला बिलासपुर के राजकिशोर नगर निवासी अंकुर गौरहा, उनके पिता राकेश गौरहा और मां रेखा गौरहा (High Court Dowry Case) से जुड़ा है। इनके खिलाफ अंकुर की पत्नी भाव्या गौरहा ने सारंगढ़ थाने में दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए प्राथमिकी और आगे की दंडात्मक कार्रवाई को रद्द करने की मांग की थी।

याचिका में लगाए गए ये तर्क

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि शिकायत में लगाए गए आरोप निराधार, मनगढ़ंत और दुर्भावना से प्रेरित हैं। उनका कहना था कि शिकायत काफी समय बाद दर्ज कराई गई और उसमें दहेज मांग या क्रूरता से जुड़े स्पष्ट तथा भरोसेमंद आरोप नहीं हैं। इन तर्कों के आधार पर एफआईआर को निरस्त करने की मांग की गई थी।

मध्यस्थता के जरिए समाधान पर जोर

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यह मूल रूप से वैवाहिक विवाद से जुड़ा मामला है, इसलिए इसे बातचीत और मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया (High Court Dowry Case ) जाना चाहिए। अदालत ने पति और पत्नी दोनों को 8 जून 2026 को हाईकोर्ट के मीडिएशन सेंटर में उपस्थित होने का निर्देश दिया है ताकि विवाद के समाधान की संभावनाओं पर चर्चा की जा सके।

29 जून तक गिरफ्तारी पर रोक

कोर्ट ने फिलहाल याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए 29 जून 2026 तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। हालांकि यह राहत कई शर्तों के अधीन रहेगी। अदालत ने यह भी कहा है कि सभी याचिकाकर्ताओं को जांच में पूरा सहयोग करना होगा।

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