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IndiGo : इंडिगो को लगा बड़ा झटका, मुनाफे से सीधे हजारों करोड़ रुपये के घाटे में पहुंची कंपनी

देश के विमानन क्षेत्र से जुड़ी बड़ी खबर ने कारोबार जगत का ध्यान अपनी (IndiGo) ओर खींचा है। लगातार विस्तार और मजबूत यात्री संख्या के बावजूद देश की सबसे बड़ी एयरलाइन को वित्तीय मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। ताजा नतीजों के बाद विमानन उद्योग में कंपनी की स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

यात्रियों की संख्या और आय में बढ़ोतरी के बावजूद बढ़ती लागत और कई बाहरी चुनौतियों ने कंपनी के प्रदर्शन पर असर डाला है। खासकर रुपये की कमजोरी और परिचालन संबंधी बाधाओं ने कंपनी के वित्तीय नतीजों को प्रभावित किया है।

मार्च तिमाही में दर्ज हुआ भारी घाटा : IndiGo

वित्त वर्ष 2025 26 की मार्च तिमाही में इंडिगो को 2 हजार 536.9 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। इससे एक वर्ष पहले इसी अवधि में कंपनी ने 3 हजार 67.5 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया था। कंपनी के तिमाही नतीजों के अनुसार आय में बढ़ोतरी हुई, लेकिन बढ़े हुए खर्च और अन्य वित्तीय दबावों के कारण अंतिम परिणाम घाटे में रहा।

आय में हुई बढ़ोतरी

मार्च तिमाही के दौरान कंपनी की कुल आय लगभग तीन प्रतिशत बढ़कर 23 हजार 830.7 करोड़ रुपये पहुंच गई। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा 23 हजार 97.5 करोड़ रुपये था। आय बढ़ने के बावजूद कंपनी को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका और कई असाधारण कारकों ने नतीजों को प्रभावित किया।

पूरे वित्त वर्ष में भी नुकसान

कंपनी ने बताया कि पूरे वित्त वर्ष 2025 26 में उसे 2 हजार 393.6 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा (IndiGo) हुआ। हालांकि कंपनी का कहना है कि यदि विदेशी मुद्रा से जुड़े नुकसान और कुछ अन्य विशेष मदों को अलग कर दिया जाए तो स्थिति काफी अलग दिखाई देती है। ऐसी परिस्थितियों को छोड़कर देखा जाए तो कंपनी को 7 हजार 502.5 करोड़ रुपये का लाभ होता।

रुपये की कमजोरी बनी बड़ी वजह

कंपनी के अनुसार रुपये में तेज गिरावट का असर उसके वित्तीय प्रदर्शन पर सबसे ज्यादा पड़ा। विदेशी मुद्रा से जुड़े नुकसान का आंकड़ा करीब 8 हजार 100 करोड़ रुपये रहा, जिसने लाभप्रदता को गंभीर रूप से प्रभावित किया। विमानन कंपनियों के लिए विमान लीज, रखरखाव और कई अन्य भुगतान विदेशी मुद्रा में होते हैं, इसलिए रुपये की कमजोरी का सीधा असर लागत पर पड़ता है।

परिचालन चुनौतियों ने भी बढ़ाई परेशानी

कंपनी ने कहा कि कठिन परिचालन परिस्थितियों ने भी उसके प्रदर्शन को प्रभावित किया। दिसंबर महीने में उड़ानों में आई रुकावटों के कारण लगभग 580 करोड़ रुपये (IndiGo) का असर पड़ा। इसके अलावा नए श्रम कानूनों को लागू करने से जुड़े अतिरिक्त खर्च ने भी वित्तीय दबाव बढ़ाया। इस मद में कंपनी को करीब 1 हजार 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार उठाना पड़ा।

आगे की रणनीति पर नजर

विमानन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में विदेशी मुद्रा की स्थिति, परिचालन स्थिरता और लागत नियंत्रण कंपनी के प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाएंगे। यात्री मांग मजबूत रहने के बावजूद एयरलाइंस के लिए बढ़ती लागत एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी वजह से अब निवेशकों और बाजार की नजर कंपनी की आगामी रणनीति और अगले वित्तीय वर्ष के प्रदर्शन पर टिकी हुई है।

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