Welcome New Year : कैसे होता है विदेशों में नव वर्ष का स्वागत...? - Navpradesh

Welcome New Year : कैसे होता है विदेशों में नव वर्ष का स्वागत…?

Welcome New Year: How is the welcome of the new year abroad...?

Welcome New Year

योगेश कुमार गोयल। Welcome New Year : जिस प्रकार भारत में पूरे उत्साह और खूब धूमधड़ाके के साथ विभिन्न प्रांतों में नववर्ष का स्वागत अलग-अलग रीति-रिवाजों एवं परम्पराओं के साथ होता है, वैसे ही कई अन्य देशों में भी अलग-अलग परम्पराओं और मान्यताओं के अनुसार लोग नव वर्ष का स्वागत तथा अभिनंदन करते हैं।

हालांकि हर देश में लोग अपनी-अपनी परम्पराओं के अनुसार एक-दूसरे को नव वर्ष की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हैं और कुछ देशों में इस अवसर पर राजकीय स्तर पर शाही कार्यक्रमों व समारोहों का विशेष आयोजन भी होता है लेकिन विभिन्न देशों में नव वर्ष का स्वागत करने के तौर-तरीके काफी विचित्रता एवं रोचकता लिए हुए हैं। प्रस्तुत है इसी संबंध में दिलचस्प जानकारी।

अमेरिका में नव वर्ष का स्वागत बड़े उत्साह के साथ किया जाता है। यहां नव वर्ष के स्वागत तथा अभिनंदन के लिए मुख्य समारोह वाशिंगटन में व्हाइट हाउस में आयोजित किया जाता है। इसके अलावा देशभर में जगह-जगह पर नव वर्ष के स्वागत के लिए रंगारंग कार्यक्रम आयोजित होते है। नववर्ष के पहले दिन सार्वजनिक अवकाश रहता है।

युवक-युवतियों की जोडिय़ां पूरी-पूरी रात घर से बाहर होटलों, रेस्तरां या क्लबों में जश्न मनाती हैं। लोग गिरिजाघरों में जाकर ईसामसीह की याद में परम्परागत अमेरिकी धुन पर प्रार्थनाएं करते हैं और समस्त मानव जाति के लिए मंगलकामना करते हैं। यहां कुछ स्थानों पर नव वर्ष के अवसर पर काली आंखों वाली मटर खाने की परम्परा भी है।

ब्रिटेन में नव वर्ष के स्वागत के लिए मुख्य समारोह लंदन में आयोजित होता है। इस मौके पर देशभर में अनेक रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। नववर्ष के आगमन पर देशवासी ईसा मसीह की याद में प्रार्थना सभाएं करते हैं और इसके बाद लोग अपने खास दोस्तों व परिवार के लोगों के साथ होटलों में जाकर नाचते-गाते हैं और शराब पीकर जश्न मनाते हैं। यहां यह विचित्र परम्परा भी प्रचलित है कि परिवार का मुखिया इस दिन डाइनिंग टेबल पर एक गर्म पेय से भरा कटोरा रखता है, जिसमें से परिवार का हर सदस्य एक-एक चम्मच भरकर अपने मुंह में डालता है।

इस बारे में मान्यता है कि ऐसा करने से उनका पूरा साल स्वास्थ्य व समृद्धि की दृष्टि से अच्छा रहता है। जापान में नव वर्ष के स्वागत के लिए राजधानी टोक्यो में विशेष कार्यक्रम आयोजित होता है। खुशी के इस अवसर पर परम्परागत नृत्यों सहित अनेक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं, जिनका सभी देशवासी लुत्फ उठाते हैं। यहां नव वर्ष का उत्सव पांच दिन तक चलता है।

नव वर्ष के अवसर पर लोग अपने घरों को बांस तथा चीड़ की लकडिय़ों से सजाते हैं तथा घर में तरह-तरह के व्यंजन बनाते हैं। इस दिन कमल की जड़ के साथ चावल के बने व्यंजन खाना शुभ माना जाता है क्योंकि मान्यता है कि ऐसा करने से उनकी उम्र बढ़ती है। बर्मा में ‘तिजान’ नामक नववर्ष उत्सव तीन दिन तक चलता है।

लोग भगवान बुद्ध की प्रतिमाओं पर सुगंधित जल का छिड़काव कर पूजा-अर्चना करते हैं और उसके बाद मिठाईयां बांटकर एक-दूसरे को नए साल की बधाई देते हैं। जर्मनी में नव वर्ष के स्वागत के लिए राजधानी बर्लिन में विशेष समारोह आयोजित होता है, जिसमें हर तरह के रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं और देशवासी परम्परागत नृत्यों का भी भरपूर आनंद लेते हैं। प्रचलित परम्परा के अनुसार नव वर्ष के मौके पर पिता अपनी पुत्रियों को एक हजार पिन या उनकी कीमत के बराबर कोई उपहार देता है।

ऐसा करना यहां सुख-समृद्धि एवं सौभाग्य का सूचक माना जाता है। बेटियों को पिन भेंट करने की प्रथा के कारण ही इस मौके को यहां ‘पिनपिनी’ के नाम से भी जाना जाता है। दक्षिण अफ्रीका में भी नव वर्ष के अवसर पर देशभर में रंगारंग कार्यक्रमों व परम्परागत नृत्यों का सिलसिला चलता है तथा नववर्ष (Welcome New Year) के आगमन की खुशी में मछली का बना एक विशेष प्रकार का भोजन तथा चावल आपस में बांटने की परम्परा है। इटली में लोग इस मौके पर रंग-बिरंगे नए कपड़े पहनकर घूमते हैं और एक-दूसरे को नव वर्ष की बधाई देते हैं।

हमारे यहां प्रचलित होली के त्यौहार की भांति यहां नव वर्ष के अवसर पर एक-दूसरे पर सादा जल डालने की परम्परा है, जिसे ‘छपाका’ कहा जाता है। दरअसल लोगों का विश्वास है कि छपाका उन्हें वर्ष पर्यन्त स्वस्थ बनाए रखता है। चीन में राजधानी बीजिंग सहित सभी नगरों, कस्बों व गांवों में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहां प्रचलित परम्परा के अनुसार नव वर्ष पर लोग रात्रि के समय पैसों का पेड़ बनाकर उसे पुराने सिक्कों व फूलों से सजाते हैं क्योंकि ऐसी धारणा है कि ऐसा करने से पूरा साल उनके यहां धन की वर्षा होगी।

टलैंड में नववर्ष की पूर्व संध्या पर लोग अपने-अपने घरों में एक ही कमरे में एकत्रित होकर आने वाले मेहमान की प्रतीक्षा करते हैं और मेहमान के आते ही उसका खूब आदर-सत्कार करते हैं। नववर्ष के पहले दिन को यहां ‘डेसले डे’ के नाम से जाना जाता है। वेटिकन सिटी में इस अवसर पर अनेक धार्मिक कार्यक्रम होते हैं और नव वर्ष के प्रारंभ होने की प्रार्थना के बाद पोप लोगों को विश्व शांति का संदेश देते हैं।

स्पेन में नववर्ष के आगमन के साथ ही ठीक 12 बजे बारह ताजे अंगूर खाने की परम्परा है ताकि वर्ष के पूरे बारहों महीने वे स्वस्थ रहें। यूगोस्लाविया के आदिवासी बहुल इलाके बंका में इस विशेष अवसर को लोग बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं। यहां के आदिवासियों द्वारा अपने खास दोस्तों के साथ इस अवसर पर अपनी-अपनी पत्नियों की पांच दिनों के लिए एक-दूसरे से अदला-बदली करने की भी परम्परा है। दक्षिण अफ्रीका के कुछ भागों में प्रचलित विचित्र परम्परा के अनुसार नवविवाहित दम्पति को इस दिन खूंखार सांड से लडऩे के लिए छोड़ दिया जाता है और दम्पति इस सांड को मारकर अपने इष्टदेव को चढ़ाते हैं।

ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से इष्टदेव की कृपा से जीवन भर वे रोगमुक्त रहते हैं। तिब्बत में नव वर्ष का उत्सव वर्ष का सबसे बड़ा त्यौहार होता है। नव वर्ष की पूर्व संध्या पर खूबसूरत लड़कियां अपने हाथों में मशाल थामे दहकते अंगारों पर नंगे पैर नृत्य करती हैं और कुछ जगहों पर युवक अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर आपस में तलवारबाजी भी करते हैं।

तिब्बत की राजधानी ल्हासा के राजमहल में लामा लोग अपने चेहरों पर अलग-अलग आकृतियों वाले बड़े-बड़े मुखौटे लगाकर ‘दानव नृत्य’ करते हैं। दानव नृत्य के अलावा ‘ठठरी नृत्य’ तथा ऐसे ही कुछ अन्य नृत्यों का भी आयोजन होता है। इन नृत्यों के आयोजन के संबंध में मान्यता है कि ऐसा करने से उनका नया वर्ष (Welcome New Year) सुख-समृद्धि, सम्पन्नता और खुशहाली से बीतता है।

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