छत्तीसगढ़

Vehicle Misuse : दौरे के नाम पर चल रही गाड़ी पर उठे सवाल, जनपद के अधिकारी पर लगे गंभीर आरोप

रिपोर्टर : साहिल राज लहरे

बम्हनीडीह क्षेत्र में इन दिनों एक सरकारी वाहन के उपयोग को लेकर चर्चाओं (Vehicle Misuse) का दौर तेज है। जनप्रतिनिधियों की ओर से लगाए गए आरोपों ने स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को लेकर पंचायत क्षेत्र में चर्चा गर्म है और लोग पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

आरोपों के सामने आने के बाद अब यह मुद्दा केवल वाहन उपयोग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचा है।

निजी उपयोग का आरोप : Vehicle Misuse

जनपद पंचायत बम्हनीडीह के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पर आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायतों के दौरे के लिए अधिग्रहित स्कार्पियो वाहन का उपयोग निजी कार्यों में किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों का दावा है कि उक्त वाहन का इस्तेमाल नियमित रूप से निवास स्थान से कार्यालय आने जाने के लिए किया जाता है।

आरोपों के अनुसार वाहन का उपयोग प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने में किया जा रहा है, जिससे शासन पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस व्यवस्था के कारण हर माह सरकारी राशि खर्च हो रही है और लंबे समय से यह स्थिति जारी रहने से लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका है।

अधिकारियों को जानकारी होने का दावा

मामले को लेकर यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित उच्च अधिकारियों को वाहन उपयोग की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जिला स्तर के अधिकारियों तक यह विषय पहुंच चुका है, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव दिखाई नहीं दे रहा। उनका आरोप है कि यदि समय रहते जांच और कार्रवाई की जाती तो शासन को होने वाले संभावित नुकसान को रोका जा सकता था।

चालक व्यवस्था पर भी उठे सवाल

विवाद का एक दूसरा पहलू वाहन चालक की व्यवस्था को लेकर भी सामने आया है। आरोप है कि अधिग्रहित वाहन के संचालन के लिए वाहन मालिक द्वारा चालक उपलब्ध कराने के बजाय जनपद पंचायत के सरकारी चालक से वाहन चलवाया जा रहा है।

जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इससे शासन को दोहरा आर्थिक भार उठाना (Vehicle Misuse) पड़ रहा है। एक ओर वाहन अधिग्रहण का भुगतान किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी चालक की सेवाएं भी इसी कार्य में लगाई जा रही हैं।

जांच की मांग तेज

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर जांच की मांग बढ़ती जा रही है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए ताकि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सके।

क्या बोले जिला पंचायत सीईओ

जिला पंचायत जांजगीर-चांपा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गोकुल रावटे ने कहा कि अधिग्रहित वाहन का निजी उपयोग किया जाना (Vehicle Misuse) गलत है। उन्होंने बताया कि पहले भी इस संबंध में निर्देश दिए जा चुके हैं कि वाहन का उपयोग निजी कार्यों में नहीं किया जाए। यदि ऐसे आरोप सामने आए हैं तो मामले की जांच कराई जाएगी।

Related Articles

Back to top button