Vegetable Farming : दो एकड़ से शुरू हुई मेहनत ने बदल दी तस्वीर, अब विदेश तक पहुंच रही गांव की सब्जियां

खंडवा के एक छोटे से गांव से शुरू हुई खेती की यह कहानी आज दूसरे किसानों के लिए मिसाल (Vegetable Farming) बन चुकी है। कभी सीमित जमीन पर सब्जियां उगाने वाले किसान ने अपनी सोच और मेहनत के दम पर ऐसा मॉडल तैयार किया कि अब आसपास के सैकड़ों किसान भी उससे जुड़कर बेहतर आमदनी हासिल कर रहे हैं। गांव में तैयार होने वाली सब्जियां अब देश ही नहीं, विदेश के बाजारों तक पहुंच रही हैं।

इस सफलता ने इलाके के किसानों में नई उम्मीद जगाई है। आधुनिक खेती, सामूहिक प्रयास और गुणवत्ता पर ध्यान देने का नतीजा यह है कि छोटी शुरुआत आज बड़े कृषि कारोबार में बदल चुकी है।

दो एकड़ से शुरू हुआ सफर, अब 400 एकड़ में खेती Vegetable Farming

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के जावर गांव के किसान अश्विन बादल सिंह सावले ने करीब चार वर्ष पहले दो एकड़ जमीन पर टमाटर और खीरे की खेती शुरू की थी। पहली फसल से अच्छे परिणाम मिलने के बाद उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया और गांव के किसानों को साथ जोड़कर एक कृषक उत्पादक संगठन बनाया। आज इस एफपीओ से 160 किसान जुड़े हैं और सामूहिक रूप से लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक तकनीक से सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं।

देश के बड़े शहरों से लेकर दुबई तक पहुंच रही फसल

एफपीओ के जरिए तैयार टमाटर, खीरा, करेला, लौकी और नींबू जैसे उत्पाद देश की प्रमुख मंडियों में भेजे (Vegetable Farming) जा रहे हैं। मुंबई, नई दिल्ली, लखनऊ, लुधियाना, नोएडा और पठानकोट सहित कई बड़े बाजारों में इनकी अच्छी मांग है। अश्विन के अनुसार उनके खेतों में तैयार टमाटर मुंबई के व्यापारियों के माध्यम से दुबई तक निर्यात किया जाता है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलती है।

गुणवत्ता पर खास ध्यान बना सफलता की वजह

विदेशी बाजार की जरूरतों को देखते हुए खेती के हर चरण में गुणवत्ता बनाए रखी जाती है। बीज चयन, उत्पादन, ग्रेडिंग, पैकिंग और परिवहन तक पूरी प्रक्रिया पर विशेष निगरानी रखी जाती है। इसी वजह से उत्पादों को बेहतर बाजार और निर्यात का अवसर मिल रहा है।

किसानों की आय में हुआ बड़ा इजाफा

एफपीओ मॉडल का सबसे बड़ा फायदा किसानों की बढ़ी हुई आय के रूप में सामने आया है। संगठन से जुड़े किसानों को प्रति एकड़ लगभग 4 से 5 लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है। सामूहिक उत्पादन और बेहतर विपणन व्यवस्था ने खेती को अधिक लाभकारी बना दिया है।

सोलर ड्रायर से बढ़ा मुनाफा

अश्विन ने अपने फार्म पर छह सोलर ड्रायर भी लगाए हैं। इनके जरिए टमाटर, मिर्च, करेला, नींबू और आम जैसे उत्पादों को सुखाकर मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जाते हैं। जब बाजार में कीमत कम होती है, तब फसल को सुरक्षित रखकर बाद में बेहतर दाम पर बेचा जाता है। यही उत्पाद निर्यात के लिए भी भेजे जाते हैं।

कंपनी से समझौते की उम्मीद

अश्विन ने बताया कि एक बड़ी कंपनी के साथ भी बातचीत (Vegetable Farming) चल रही है। समझौता होने पर मिर्च, टमाटर, नींबू और आम जैसे उत्पाद सीधे कंपनी को उपलब्ध कराए जा सकेंगे, जिससे किसानों को स्थायी बाजार मिलने की संभावना और मजबूत होगी।

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