MP Paper Leak : परीक्षा घोटालों पर अब होगी तेज कार्रवाई, मध्य प्रदेश में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बने चार विशेष न्यायालय

परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक को लेकर छात्रों का गुस्सा लगातार (MP Paper Leak) बढ़ रहा है। देशभर में इस मुद्दे पर बहस के बीच अब मध्य प्रदेश में भी इसे लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। छात्रों और अभिभावकों के बीच लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग उठ रही थी, जिसे देखते हुए न्यायपालिका ने सख्त रुख अपनाया है।

इसी कड़ी में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए चार विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए हैं। इन अदालतों को निर्देश दिया गया है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर मामलों का निपटारा करने का हरसंभव प्रयास किया जाए।

परीक्षा घोटालों के लिए बने चार विशेष न्यायालय MP Paper Leak

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, फर्जी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा देने, अनुचित साधनों के इस्तेमाल और अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के मामलों की सुनवाई के लिए चार विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित किए हैं।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की पहल पर भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीशों को इन विशेष अदालतों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

किन शहरों में होंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट

भोपाल में प्रवीण पटेल, ग्वालियर में विशाल अखंड, जबलपुर में आनंद कुमार सेहलाम और इंदौर में डॉ. शुभ्रा सिंह को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए नामित किया गया है। ये न्यायालय परीक्षा से जुड़े गंभीर मामलों की सुनवाई करेंगे।

तीन महीने में ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य

हाई कोर्ट ने संबंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिए हैं कि चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन माह के भीतर ट्रायल पूरा कर फैसला सुनाने का हरसंभव प्रयास किया जाए। इसका उद्देश्य परीक्षा घोटालों के मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया को कम करना और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

इन कानूनों के तहत होगी सुनवाई MP Paper Leak

ये विशेष अदालतें लोक परीक्षा अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम 2024 और भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत दर्ज मामलों (MP Paper Leak) की सुनवाई करेंगी। इसके अलावा राज्य या केंद्र सरकार की ओर से जांच एजेंसियों को सौंपे गए परीक्षा घोटाले से जुड़े मामलों की भी सुनवाई इन्हीं अदालतों में होगी।

निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया पर रहेगा जोर

हाई कोर्ट का मानना है कि इस व्यवस्था से परीक्षा घोटालों के मामलों में तेजी से न्याय मिल (MP Paper Leak) सकेगा। साथ ही संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर अंकुश लगेगा और सार्वजनिक परीक्षाओं तथा सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।

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