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Vande Bharat 4.0 : रेलवे लाने जा रहा वंदे भारत का चौथा संस्करण, 2047 तक 7,000 किमी समर्पित यात्री कॉरिडोर का लक्ष्य

Vande Bharat 4.0 : भारत अब रेलवे तकनीक के क्षेत्र में “निर्माता से निर्यातक” बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि रेलवे जल्द ही वंदे भारत ट्रेन का चौथा संस्करण (Vande Bharat 4.0) पेश करने जा रहा है, जो प्रदर्शन, आराम और तकनीक के हर मानक पर दुनिया की श्रेष्ठ ट्रेनों की बराबरी करेगा।

https://youtu.be/zuj9nMJItc8

रेल मंत्री ने भारत मंडपम में आयोजित 16वें अंतरराष्ट्रीय रेल उपकरण प्रदर्शनी (IREE 2025) का उद्घाटन किया। यह विश्व की दूसरी सबसे बड़ी रेलवे प्रदर्शनी है, जिसकी थीम है – ‘फ्यूचर-रेडी रेलवे’। 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस मेले में 15 से अधिक देशों की 450 कंपनियां आधुनिक रेल तकनीक, मेट्रो सिस्टम, इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार प्रदर्शित कर रही हैं।

भारत बनेगा रेल निर्माण का वैश्विक केंद्र

वैष्णव ने कहा कि “भारत अब न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और कई देशों को रेल इंजन और कोच निर्यात भी कर रहा है।” उन्होंने बताया कि वंदे भारत-3 ट्रेनें पहले से ही तकनीकी रूप से अत्याधुनिक हैं ये 0 से 100 किमी प्रति घंटा की गति सिर्फ 52 सेकंड में पकड़ती हैं, जो जापान और यूरोप की कई ट्रेनों से तेज़ है। अगले 18 महीनों में वंदे भारत-4 ट्रेन लॉन्च की जाएगी, जिसमें बेहतर टॉयलेट, आरामदायक सीटें, और उच्च गुणवत्ता वाले कोच शामिल होंगे। इसे “दुनिया की सर्वश्रेष्ठ यात्री ट्रेन” के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है।

2047 तक 7,000 किमी समर्पित यात्री कॉरिडोर

“विकसित भारत विजन” के तहत रेलवे ने वर्ष 2047 तक 7,000 किमी लंबे समर्पित यात्री कॉरिडोर विकसित करने की योजना बनाई है। इन ट्रैकों को 350 किमी/घंटा डिजाइन स्पीड और 320 किमी/घंटा परिचालन गति के लिए तैयार किया जाएगा। ये पूरी तरह स्वदेशी सिग्नलिंग सिस्टम और अत्याधुनिक कंट्रोल सेंटर से लैस होंगे। रेल मंत्री ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में 35,000 किमी नई रेल लाइनें बिछाई गईं, जबकि 46,000 किमी ट्रैक का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है।

https://youtu.be/S9g4tvfmaC8

वर्तमान में देश में चल रही ट्रेनें

156 वंदे भारत ट्रेनें

30 अमृत भारत ट्रेनें

4 नमो भारत ट्रेनें

वित्त वर्ष 2024–25 में रिकॉर्ड उत्पादन हुआ

7,000+ कोच, 42,000 वैगन और 1,681 लोकोमोटिव बनाए गए। देश का पहला 9,000 हॉर्सपावर का इलेक्ट्रिक इंजन भी चालू हो गया है। रेलवे ने इस वर्ष 1 लाख 16 हजार करोड़ रुपये का बजट नवाचार के लिए निर्धारित किया है। इसमें स्वदेशी ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जैसे प्रमुख प्रोजेक्ट शामिल हैं – जिसका 99 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। भारतीय रेल अब अमेरिका को पछाड़कर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी माल-ढुलाई नेटवर्क बन चुकी है।

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