श्रीराम के लिए पुल बनाने वाली वानर सेना को अब इसीकी दरकार - Navpradesh

श्रीराम के लिए पुल बनाने वाली वानर सेना को अब इसीकी दरकार

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कांकेर/नवप्रदेश। जिस वानर सेना (vanar sena) ने लंका जाने के लिए भगवान श्रीराम के लिए समुद्र में पुल (bridge) बनाया था, आज उसीको पुल की दरकरार  है। कांकेर/ नरहरपुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत दुधावा जलाशय के टापू (island) में फंसे (stranded) बंदरों (monkeys) को सुरक्षित निकालने लिए अब पुल बनाना बेहद जरूरी हो गया है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि वानरों के लिए यह पुल नहीं बन पा रहा है।

वन विभाग के अमले की टीम वानर सेना (vanar sena) के रेस्क्यू में जुटी है, लेकिन अभियान शुरू हुए चार दिन का समय बीत जाने के बावजूद भी बंदरों को सुरक्षित नहीं निकाला जा सका है। माकूल संसाधनों के अभाव में वन विभाग के अमले के प्रयास भी नाकाफी से लग रहे हैं। जलाशय की गहराई वन विभाग के लिए पुल बनाने में बड़ी चुनौती बन रही है। बता दें कि बंदरों (monkeys) को झुंड करीब दो माह पहले भोजन की तलाश में दुधावा जलाशय के टापू में गया था।

इसी दौरान हुई बारिश से अचानक दुधावा जलाशय में पानी अधिक बढ़ जाने से बंदर टापू (island) में फंस गए (stranded)। तब से लेकर आज तक बंदर भूखे-प्यासे टापू में फंसे हुए हैं। भूख प्यास से अब उनकी हालत बिगड़ती जा रही है। संकट में फंसे इन बंदरों की संख्या करीब 100 से ज्यादा बताई जा रही है।

मोटरबोट के जरिए खाना पहुंचा रहा वन विभाग

वन विभाग के अमले ने मोटर बोट के जरिए मौके पर पहुंचकर भूखे बंदरों (monkeys) को भोजन पहुचाने की कवायद शुरू कर दी है। बंदरों को निकलने का रेस्क्यू अभियान भी प्रारंभ किया गया है, लेकिन दुधावा जलाशय में भरे पानी और गहराई के कारण विभाग को रेस्क्यू करने में बड़ी परेशानी उठानी पड़ रही है। लगातार चौथे दिन बाद भी वन विभाग द्वारा रेस्क्यू पूरा नहीं किया जा सका है।

अब डालियां खाने को मजबूर

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टापू में कोई फलदार वृक्ष नहीं है। जो बंदरो कीं भूख को मिटा सके, हालत ये है की भूखे बंदरों ने पेड़ों की पत्तियां खाई। जब पत्तियां भी खत्म हो गई तो बंदरों ने पेड़ की डाली को तोड़ कर खा रहे है और अपना भूख मिटा रहे है । भूख के चलते बंदरों को आपस में लड़ते हुए भी देखा जा सकता है। वन अमला के द्वारा दिन में एक बार ही जो भोजन दिया जा रहा है, जो पर्याप्त नहीं है।

भोजन पहुंचाने के दावों पर भी सवाल

विभाग ने भूखे बंदरों को बचाने के लिए अभियान तो शुरू कर दिया, लेकिन शनिवार को सुबह बंदरों के लिए भोजन ही देना भूल गया। विभाग ने दावा किया था कि बंदरों तक रोज सुबह शाम 10-10 बोरी फल और सब्जियां टापू भेजी जाएंगी। शनिवार को बंदरों के लिए भोजन नहीं भेजा गया। इसलिए अब इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।

गहराई नापने में ही चला गया दिन

बंदरों के टापू में फंसने की जानकारी सामने आने के बाद शनिवार को वन विभाग की टीम चारामा से बांस और बल्ली लेकर पहुंची। सुबह 11:00 बजे काम शुरू किया गया। अस्थाई पुल बनाने का काम शुरू किया गया। करीब 100 मीटर तक ही बल्लियों को खड़ा किया जा सका। आगे गहराई अधिक होने के कारण नाव की जरूरत पडऩे लगी तो काम बंद हो गया मजदूर काम बंद कर बांध के किनारे नाव का इंतजार करते बैठे रहे शाम 4:00 बजे वन विभाग जूनवानी से पतवार से चलने वाली छोटी नाव का इंतजाम इसके बाद शाम को फिर से काम शुरू किया गया। नाव लेकर निकले मजदूर बांध की गहराई नापते रह गए। शाम 5:00 बजे काम बंद दिया गया। इस तरह गहराई नापने में ही पूरा दिन चला गया।

लाए गए 20 फीट लंबे 100 बांस व 70 बल्लियां

दुधावा जलाशय में पानी अधिक होने और गहरे होने के कारण भी वन विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है । पुल बनाने वाले पहले चरण में 20 फीट लंबे सौ बांस व 5 फीट लंबी 70 बल्लियां लाई गई हैं। काम में विभाग और गांव के कुल 27 लोग जुटे हुए हैं। दुधावा के 18 तैराक भी रेस्कयू में जुटे हुए है। शुरू में डुबान खेत होने से गहराई कम होने की आशंका लगाई जा रही थी। इसलिए आसानी से बल्ली पानी के निचले सतह में गड़ रही थी। लेकिन कुछ दूरी के बाद बांस का हिस्सा शुरू होने से बांस नहीं गड़ रहा है। इसी के चलते रेस्कयू में परेशानी आ रही है।

इनका कहना है

दुधावा में फंसे बंदरों को निकालने के लिए बीते 3 दिन से लगातार वन विभाग द्वारा रेस्क्यू किया जा रहा है। साथ ही बंदरों के खाने का इंतजाम विभाग द्वारा किया जा रहा है। बहुत जल्द ही बंदरों को टापू से निकाल लिया जाएगा ।
-कैलाश सिंह ठाकुर, वन परिक्षेत्र अधिकारी, नरहरपुर रेंज


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