छत्तीसगढ़

DMF Fund : खनन वाले गांवों को बदलने की तैयारी तेज, मुख्यमंत्री ने अफसरों को दिए बड़े निर्देश

सीजी भास्कर, 17 मई। रायगढ़ में हुई समीक्षा बैठक के दौरान खनन प्रभावित इलाकों को लेकर सरकार (DMF Fund) का फोकस साफ नजर आया। बैठक में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और कई योजनाओं की स्थिति पर लंबी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों से सीधे तौर पर पूछा कि जिन इलाकों से सबसे ज्यादा खनिज निकल रहा है, वहां के लोगों को उसका फायदा जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा।

बैठक के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है। खासकर दंतेवाड़ा, रायगढ़ और कोरबा जैसे जिलों को लेकर अधिकारियों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में खनन प्रभावित गांवों में कई नई सुविधाओं पर काम शुरू हो सकता है।

डीएमएफ राशि के इस्तेमाल पर जोर : DMF Fund

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला खनिज न्यास की राशि का उपयोग केवल भवन और निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका सीधा लाभ गांवों में रहने वाले लोगों तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिन क्षेत्रों में खनन गतिविधियां चल रही हैं, वहां विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाए।

मॉडल विलेज बनाने की तैयारी

मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिया कि खनन प्रभावित गांवों को मॉडल विलेज के रूप में विकसित किया जाए। इन गांवों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल मैदान और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए ताकि लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी न हो।

अतिरिक्त तकनीकी अमले की होगी व्यवस्था

बैठक में यह भी सामने आया कि कई जिलों में विकास कार्यों की संख्या तेजी (DMF Fund) से बढ़ी है, लेकिन तकनीकी और इंजीनियरिंग स्टाफ पर्याप्त नहीं है। इस पर मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को अतिरिक्त डिवीजन बनाने और जरूरी तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

गुणवत्ता और पारदर्शिता पर फोकस

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि डीएमएफ राशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ किया जाए। उन्होंने समय सीमा के भीतर काम पूरा करने और लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया।

खनिज क्षेत्र के लोगों को पहले लाभ देने की बात

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन इलाकों से राज्य को खनिज संपदा (DMF Funda) मिलती है, वहां रहने वाले लोगों को विकास का पहला अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशीलता के साथ काम करने और योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाने को कहा।

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