Colonial Guard of Honour System End : छत्तीसगढ़ में मंत्रियों व पुलिस अफसरों को गार्ड ऑफ ऑनर की परंपरा खत्म

छत्तीसगढ़ शासन ने पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ाने और औपनिवेशिक सोच से जुड़ी परंपराओं को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल पर राज्य में सलामी गारद (गार्ड ऑफ ऑनर) की वर्तमान व्यवस्था (Colonial Guard of Honour System End) में व्यापक संशोधन किया गया है।
राज्यपाल रमेन डेका के निर्देशानुसार गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य शासन ने सलामी गारद की समीक्षा कर यह निर्णय लिया है कि अब पुलिस बल को अनावश्यक औपचारिकताओं से मुक्त कर उन्हें उनकी मूल जिम्मेदारियों पर केंद्रित किया जाएगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
सामान्य दौरों में सलामी गारद समाप्त
नए आदेश के तहत राज्य के भीतर सामान्य दौरों, आगमन-प्रस्थान एवं निरीक्षण के दौरान अब गृहमंत्री, समस्त मंत्रीगण, पुलिस महानिदेशक सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सलामी गारद (गार्ड ऑफ ऑनर) नहीं (Colonial Guard of Honour System End) दी जाएगी। जिला भ्रमण, दौरे या निरीक्षण के समय पूर्व में प्रचलित सलामी व्यवस्था को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है। इससे पुलिस बल का समय और ऊर्जा सुरक्षा, कानून-व्यवस्था तथा जनसेवा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में अधिक प्रभावी रूप से उपयोग हो सकेगा।

राष्ट्रीय एवं राजकीय आयोजनों में यथावत व्यवस्था
यह प्रतिबंध राष्ट्रीय और राजकीय समारोहों पर लागू नहीं होगा। गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), शहीद पुलिस स्मृति दिवस (21 अक्टूबर), राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर), राजकीय समारोहों तथा पुलिस दीक्षांत परेड जैसे अवसरों पर औपचारिक सलामी गारद पूर्ववत दी जाती रहेगी।
संवैधानिक पदों के लिए प्रोटोकॉल जारी
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रोटोकॉल के अनुसार संवैधानिक पदों पर आसीन महानुभावों एवं विशिष्ट अतिथियों के लिए सलामी गारद की व्यवस्था पहले की तरह यथावत रहेगी। यह निर्णय शासन की प्रशासनिक सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता और आधुनिक, जनोन्मुखी व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे पुलिस बल का मनोबल बढ़ेगा और कार्यक्षमता में सकारात्मक सुधार आएगा।



