संपादकीय: ट्रेड डील पर झुके डोनाल्ड ट्रंप

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतिक्षित ट्रेड डील को आखिरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड टं्रप की मंजूरी मिल गई। इस तरह भारत और अमेरिका के अंतरिम रूपरेखा पर सहमति की मुहर लग गई। गौरतललब है कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदे जाने से चिढ़कर और अपनी शर्तों पर ट्रेड डील कराने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर पचास प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। किन्तुु भारत अमेरिका के दबाव में नहीं आया और यह ट्रेड डील अधर में लटक गई थी।
डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ अटैक से भारत को आर्थिक क्षति तो उठानी पड़ी लेकिन भारत ने इस क्षति की भरपाई के लिए यूरोपीय देशों के अलावा और कई देशों के साथ व्यापार समझौते कर लिये। जिससे डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बन गया वैसे भी उनके टैरिफ वार के कारण भारतीय उत्पाद अमेरिका में बेहद महंगे हो गये थे और वहां महंगाई बढऩे के साथ ही डॉलर के कमजोर होने का भी खतरा पैदा हो गया था।
नतीजतन डोनाल्ड ट्रंप को भारत के आगे झुकना पड़ा और उन्होंने भारत पर लगने वाले पचास प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया और ट्रेड डील में भारत की शर्तों को स्वीकार भी का लिया। उल्लेखनीय है कि अमेरिका अपने खद्यान और डेयरी उत्पाद को भारत में खपाने के लिए दबाव बना रहा था लेकिन भारत ने इससे स्पष्ट इंकार कर दिया। अब इस डील के मुताबिक भारत के किसाान और पशुपालकों के हित पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। यह बात अलग है कि विपक्ष इस डील की यह कहकर आलोचना कर रहा है कि यह डील भारतीय किसानों के लिए अहितकर है।
कांग्रेस पार्टी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अमेरिका के आगे घुटने टेकने का आरोप लगा रही है लेकिन भारत के वाणिज्य और उद्दोग मंत्री पीयूष गोयल और कृष्रि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए किसानों को भरोसा दिलाया है कि इस डील से भारतीय किसानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा उल्टे उन्हें लाभ होगा।
इस ट्रेड डील का भारतीय उद्योग जगत ने भी स्वागत किया है और कहा है कि इस डील से भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा वैश्विक निवेशकों के विश्वास का प्रतिक है और इससे भारत को लाभ होगा। भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग ने भी इस समझौते को ऐतिहासिक कदम बताते हुए इसका स्वागत किया और कहा है कि इससे हीरा और रत्नों के व्यापार को मजबूती मिलेगी और यह रत्न उद्योग के लिए टर्निंग प्वाइंट सिद्ध होगा।
अमेरिका और भारत के बीच होने वाले इस ट्रेड डील से भारत के लिए 500 अरब डॉलर का बाजार खुलेगा जो आगामी पांच सालों के भीतर होगा। निश्चित रूप से इस ट्रेड डील से भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में जो बर्फ जम गई थी वह भी पिघलेगी और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत होने का दोनों को ही लाभ मिलेगी। अमेरिका द्वारा भारत पर पचास प्रतिशत टैरिफ लगाये जाने से भारत के ज्वैलरी, दवाई, कपड़ा और जूता सहित हस्तशिल्प और कालीन उद्योगों पर जो संकट के बादल गहराने लगे थे वे अब छट जाएंगे और इन सभी उद्योगों को संजीवनी मिलेगी। रही बात कृषि की तो इस डील से भारतीय किसानों को भी कोई विशेष नुकसान नहीं होगा।
यह बात सरकार को किसान संगठनों को समझानी पड़ेगी और उन्हें विश्वास में लेना पड़ेगा क्योंकि विपक्ष अब इस ट्रेड डील के खिलाफ किसानों को बरगला सकता है और फिर से देश में किसान आंदोलन खड़ा करने की कवायद कर सकता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस ट्रेड डील का भारत सरकार जल्द से जल्द विस्तृत ब्यौरा देश के सामने पेश करेगी और इसे लेकर विपक्ष जो आशंकाएं व्यक्त कर रहा है उसका निराकरण करेगी।
बहरहाल भारत ने ट्रेड डील को लेकर अमेरिका के दबाव को पूरी तरह से नकार कर सारी दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि आज की तारीख में भारत भी एक बड़ी ताकत बन गया है जो अपनी शर्तों पर ही ट्रेड डील करेगा। भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ ही दुनिया का सबसे बड़ा बाजार भी है ऐसे में कोई भी देश यहां तक की अमेरिका भी भारत की अंदेखी नहीं कर सकता और न ही भारत पर अपनी शर्तें लाद सकता है।



