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CJI BR Gavai Farewell : देश के लिए जो भी कर पाया, उसका संतोष रहेगा: सीजेआइ गवई

देश के 52वें प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) बीआर गवई (CJI BR Gavai Farewell) को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की औपचारिक पीठ के समक्ष भावभीनी विदाई दी गई। वे 23 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इस वर्ष 14 मई को पदभार ग्रहण करने के बाद अपने छह माह के कार्यकाल में उन्होंने वक्फ कानून, पर्यावरण संरक्षण, न्यायिक सुधार (Indian Judiciary News) और संवैधानिक मुद्दों पर कई महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसले सुनाए। विदाई समारोह में न्यायमूर्ति गवई ने अपनी चार दशक लंबी न्यायिक यात्रा को याद किया। उन्होंने कहा, “जब मैं इस अदालत से आखिरी बार बाहर जाऊंगा, तो संतोष रहेगा कि देश के लिए जो भी संभव था, मैंने किया।

https://youtu.be/n406wvRiF78

अपने अंतिम कार्य दिवस पर उन्होंने ट्रिब्यूनल सुधार कानून 2021 को रद्द करने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि न्यायपालिका और न्यायाधिकरणों की स्वतंत्रता संविधान के मूल ढांचे (Supreme Court Judgments) का हिस्सा है और उससे समझौता नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमानी और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कविताएं सुनाईं, जिससे समारोह का वातावरण भावुक हो गया।

इस अवसर पर नवनियुक्त सीजेआइ न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन समेत कई न्यायाधीश मौजूद थे। महाराष्ट्र के अमरावती जिले से आने वाले न्यायमूर्ति गवई देश के पहले बौद्ध और दूसरे दलित CJI हैं। उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में दो दशक से अधिक की सेवा के दौरान उन्होंने 400 से अधिक फैसले (BR Gavai Retirement) लिखे। छह अक्टूबर को एक वकील द्वारा जूता फेंकने की घटना के बावजूद उनके धैर्य और संयम की व्यापक सराहना हुई।

सीजेआइ गवई की पीठ के कुछ अहम फैसले

वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 पर सुनवाई में उन्होंने कानून की संवैधानिकता को मानते हुए कुछ प्रविधानों पर अंतरिम रोक लगाई, पर पूरे कानून पर स्थगन लगाने से इन्कार किया। राज्यपालों द्वारा विधेयकों पर निर्णय लंबित रखने के मुद्दे पर उनकी पीठ ने कहा कि अदालत समयसीमा निर्धारित नहीं कर सकती, लेकिन राज्यपालों के पास “अनिश्चितकाल तक लंबित रखने” का अधिकार नहीं है। पर्यावरण मामलों में उनकी पीठ ने अरावली पर्वतमाला की एकरूप परिभाषा स्वीकार करते हुए संबंधित क्षेत्रों में नई खनन पट्टों पर रोक लगाई।

सरंडा वन क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने की प्रक्रिया तीन माह में पूरी करने का निर्देश दिया और उसकी सीमा से एक किमी दायरे में खनन पर प्रतिबंध लगाया। देशभर के टाइगर रिज़र्व के चारों ओर ईको-सेंसिटिव ज़ोन एक वर्ष में अधिसूचित करने का आदेश भी उनकी पीठ ने दिया। उन्होंने पर्यावरणीय उल्लंघन वाली परियोजनाओं को शुरू होने के बाद ग्रीन क्लीयरेंस देने की अनुमति फिर बहाल की।

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इसी पीठ ने JSW स्टील की 19,700 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी देकर BPSL से जुड़े लगभग आठ वर्ष पुराने विवाद का समाधान किया। न्यायिक सुधारों के क्षेत्र में उन्होंने जिला जज पद के लिए सात वर्ष अधिवक्ता अनुभव को मान्यता दी और नए कानून स्नातकों को सीधे न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल होने से रोका। ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स एक्ट 2021 के कई प्रावधानों को असंवैधानिक ठहराते हुए उन्होंने संसद को न्यायिक निर्णयों को मामूली बदलाव के साथ निरस्त करने की सीमा भी स्पष्ट की।

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