Supreme Court Hearing : ‘कौन सा कुत्ता किस मूड में, ये पता नहीं होता’, स्ट्रे डॉग्स पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
Supreme Court Hearing
सुप्रीम कोर्ट में आज अरावली संरक्षण, स्ट्रे डॉग्स, सोनम वांगचुक की रिहाई और बांके बिहारी मंदिर से जुड़े मामले पर सुनवाई (Supreme Court Hearing) हुई। सुप्रीम कोर्ट अरावली की सटीक परिभाषा और पहाड़ियों के संरक्षण पर विचार करेगा। पूर्व वन अधिकारी आरपी बलवान की याचिका पर यह सुनवाई हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरण के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों (Supreme Court Hearing) के मामले का स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं और रेबीज के बढ़ते मामलों पर सुनवाई कर रहा है। इस मामले में बड़ी संख्या में आवेदन कोर्ट को मिले हैं। कोर्ट ने कहा कि इतने आवेदन तो इंसानों के केस में भी नहीं आते।
स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा और पशु कल्याण के संतुलन को लेकर भी सुनवाई हुई। तीन जजों की विशेष बेंच ने मामलों पर विस्तृत विचार किया। कोर्ट ने कहा, “कौन सा कुत्ता किस मूड में है, ये पता नहीं होता,” और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया।
कपिल सिब्बल ने दी दलील
नोएडा की आठ साल की मासूम बच्ची के पिता ने आरोप लगाया कि नोएडा प्राधिकरण आवारा कुत्तों (Stray Dogs) से जुड़ी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आरडब्ल्यूए को सोसाइटी को नो डॉग जोन घोषित करने का अधिकार मिलना चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि वे कुत्ता प्रेमी और पर्यावरण प्रेमी के रूप में उपस्थित हैं। उन्होंने ‘कैच–स्टेरिलाइज–वैक्सीनेट–रिलीज़ (CSVR)’ मॉडल का उदाहरण दिया और कहा कि दुनिया भर में इसका सफल प्रयोग हुआ है।
सुको ने पूछा
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अन्य जानवरों का क्या? मुर्गियों और बकरियों की जान का क्या? क्या उनकी जान, जान नहीं है? सिब्बल ने कहा कि उन्होंने चिकन खाना बंद कर दिया है क्योंकि पिंजरों में रखा जाना बेहद क्रूर है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर एक बाघ आदमखोर हो जाए तो इसका अर्थ यह नहीं कि सभी बाघों को मार दिया जाए। कोर्ट ने संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखने और नीति निर्धारण में विवेकपूर्ण निर्णय लेने का निर्देश दिया।
कुत्ते गायब हो गए
सुप्रीम कोर्ट में स्ट्रे डॉग्स पर सुनवाई के दौरान एनिमल एक्टिविस्ट ने कहा कि हम सभी स्ट्रे डॉग्स (Stray Dogs) को शेल्टर में रखने की बात कर रहे हैं। अगर कुत्ते गायब हो गए तो कचरे और बंदरों की समस्या का क्या होगा? पिछले वर्ष नोएडा में आवारा कुत्तों के हमले में घायल हुई आठ साल की मासूम के पिता ने कहा कि एक अन्य मामले में आठ साल के बच्चे की मौत हो गई थी।
राज्यों के हलफनामे में हाईवे का डेटा नहीं
राज्यों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे के मुताबिक 2,691 आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाकर गौशालाओं में भेजा गया है। हालांकि हाईवे के उन हिस्सों का कोई डेटा नहीं है जो आवारा मवेशियों के कारण संवेदनशील हैं। हलफनामे में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि कितने शेल्टर उपलब्ध हैं। एनएचएआई और पशुपालन विभाग के बीच समन्वय का विवरण भी नहीं है। पकड़े गए मवेशियों को आखिर कहां ले जाया जा रहा है, यह सवाल भी उठा।
स्ट्रे डॉग्स पर याचिकाकर्ता ने क्या कहा
स्ट्रे डॉग्स पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल एक वरिष्ठ नागरिक हैं, जिन्हें कुत्ते ने काटा है। उन्होंने कहा कि यहां कई कुत्ता प्रेमी मौजूद हैं, लेकिन हम कुत्तों के खिलाफ नहीं हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि आवारा कुत्तों पर नियंत्रण (Stray Dogs) जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नीति निर्धारण और कार्यान्वयन में राज्य सरकारों को अधिक प्रभावी कदम उठाने होंगे। यह सुनवाई न केवल आवारा कुत्तों (Stray Dogs) के प्रबंधन के लिए बल्कि पूरे देश में सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा और पशु कल्याण के संतुलन के लिए आदर्श मार्गदर्शक सिद्ध होगी।
