EXCLUSIVE : NCL Singrauli में ओबीसी के साथ एक दशक से होते आ रहा धोखा

EXCLUSIVE : NCL Singrauli में ओबीसी के साथ एक दशक से होते आ रहा धोखा

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  • ओबीसी को 27 की जगह एनसीएल दे रहा सिर्फ 15 फीसदी आरक्षण
  • मिलने थे 263 पद मिले महज 138
  • डब्ल्यूसीएल नागपुर में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण का मिल रहा पूरा लाभ
  • लामबंद हुए संगठन, पीएम से लेकर राष्ट्रपति तक शिकायत, आंदोलन के चेतावनी

सिंगरौली/नवप्रदेश। मध्यप्रदेश के सिंगरौली (Singrauli) जिले में स्थित नॉर्दर्न कोल फील्ड्स लिमिटेट (NCL)  द्वारा आरक्षण नियमों  के उलंघन (Violation of Reservation Rule) का मामला प्रकाश में आया है। अखिल भारतीय अपाक्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजी. ए. पी. पटेल ने बताया कि भर्तियों के लिए उम्मीदवारों से संपूर्ण भारत  से आवेदन बुलाने के बाद भी एनसीएल (NCL) द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27% के स्थान पर केवल 15% आरक्षण (Rreservation) दिया जा रहा है।

जबकि वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड (WCL) , नागपुर द्वारा ओबीसी (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। ओबीसी संगठनों ने अब एनसीएल सिंगरौली द्वारा किए जा रहे इस अन्याय के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। अखिल भारतीय अपाक्स तथा ओबीसी महासभा ने साफ कर दिया है कि यदि एनसीएल द्वारा अपनी भूल सुधारकर ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण नहीं दिया जाता है तो उसके खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

पटेल ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, केन्द्रीय कार्मिक, सामजिक न्याय व कोयला मंत्री, पिछड़ा वर्ग संसदीय समिति, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, केंद्रीय कार्मिक व कोयला सचिव, अध्यक्ष कोल इण्डिया लिमिटेड कोलकोता व अध्यक्ष व निदेशक एनसीएल सिंगरौली से की है।

ये है मामला

 पटेल ने बताया कि एनसीएल सिंगरौली की हाल ही में जारी पांच रोजगार अधिसूचना क्रमांक 109 दिनांक 25.01.2020, 145 दिनांक 07.02.2020, 187 दिनांक 22.02.2020, 188 दिनांक 22.02.2020 व 466 दिनांक 11.07.2020  में एनसीएल सिंगरौली ने विज्ञापित कुल 975 पदों की भर्ती में ओबीसी के लिए केवल 138 (लगभग 14 फीसदी) पद आरक्षित रखे हैं। जबकि भारत सरकार के आरक्षण नियमों के अनुसार सिंगरौली स्थित एनसीएल (NCL) में ओबीसी (OBC ) के लिए वास्तव में 27% यानी 263 पद आरक्षित किये जाने थे। यह राष्ट्रपति एवं भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय तथा भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय द्वारा आरक्षण-प्रतिशत देने बनाये आरक्षण नियमों का खुला उलंघन (violation of reservation rule) है।

एनसील अखिल भारतीय भर्ती को बता रहा स्थानीय

अब इस मामले में एनसीएल सिंगरौली अपने बचाव में बता रहा है कि  ये भर्तियां स्थानीय व क्षेत्रीय लोगों (उम्मीदवारों) के लिए हो रही है। अतः इसमें स्थानीय मध्यप्रदेश हेतु निर्धारित 15% ओबीसी आरक्षण दिया जा रहा है।‘ जबकि रोजगार सूचनाओं से स्पष्ट है कि इन सभी भर्तियों हेतु सम्पूर्ण भारत के नागरिकों / उम्मीदवारों से आवेदन पत्र आमंत्रित किये गए हैं।

एक नजर नियमों पर

-इंजी. एपी पटेल ने बताया कि लोक उद्यम मंत्रालय नई दिल्ली के आदेश दिनांक 25 अप्रैल 1991 से प्रसारित राष्ट्रपति के निर्देशों के अनुसार भर्तियां ‘अखिल भारतीय स्तर’ पर होने पर अनुसूचित जाति, जन जाति को क्रमशः 15% व 7.50% आरक्षण प्रदान किया जाता है, वहीं जब भर्तियां उसी राज्य जैसे मध्यप्रदेश के ‘स्थानीय या क्षेत्रीय उम्मीदवारों’ के लिए आरक्षित होती हैं तब केवल अनुसूचित जाति व जनजाति को क्रमशः मध्य प्रदेश का 15% व 20% आरक्षण दिया जाता है। बकौल पटेल, इसका गलत अर्थ निकालकर एनसीएल सिंगरौली (Singrauli) इन भर्तियों को केवल मध्यप्रदेश के ‘स्थानीय व क्षेत्रीय उम्मीदवारों’ के लिए आरक्षित बताकर सबको गुमराह कर रहा है। जबकि ये भर्तियां अखिल भारतीय स्तर पर हो रही हैं। इनमें भारत सरकार के आरक्षण नियमों का खुला उलंघन है।

-किसी भी भर्ती की प्रक्रिया में एससी, एसटी, ओबीसी का आरक्षण प्रतिशत ‘भर्ती करने वाला कार्यालय किस राज्य में स्थित है’ से नहीं अपितु ‘किन क्षेत्रों के उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किये गए हैं’ के आधार पर तय होता है। एनसीएल सिंगरौली के अधीन मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश दो राज्यों की कोयला खदानें आती हैं और वैसे भी उत्तरप्रदेश में ओबीसी को राज्य स्तर पर 27 फीसदी आरक्षण मिल ही रहा है।

 डीओपीटी के आरक्षण ब्रोशर के अनुसार भी ओबीसी 27 फीसदी पदों के हकदार

 पटेल ने बताया कि 1993 से देश में ओबीसी आरक्षण आने के बाद पुनः भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय के डीओपीटी ने 2013 के आरक्षण ब्रोशर के चैप्टर क्रमांक दो में स्पष्ट किया है कि जब भर्तियां अखिल भारतीय स्तर  पर खुली प्रतियोगिता के आधार पर की जाएंगी तो आरक्षण का प्रतिशत अनुसूचित जाति (SC) हेतु 15%, अनुसूचित जनजाति (ST) हेतु 7.50% व अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) हेतु 27% होगा। वहीं भर्तियां जब स्थानीय या क्षेत्रीय उम्मीदवारों अर्थात किसी राज्य के उम्मीदवारों के लिए होने पर इसी ब्रोशर के चैप्टर क्रमांक II में ही दिए डीओपीटी के आदेश दिनांक 05.07.2005 द्वारा राज्यवार निर्धारित SC, ST, OBC के आरक्षण का प्रतिशत लागू होगा। लेकिन एनसीएल सिंगरौली की इन भर्तियों में उक्त आदेशों का दूर दूर तक कोई संबंध दिखाई नहीं देता।

एक ही सार्वजनिक उपक्रम की दो अनुषांगिक कंपनियों में अलग-अलग नियम

इस दौरान एक आश्चर्जनक तथ्य यह भी सामने आया कि कोल इंडिया लिमिटेड कोलकोता  के ही अधीन कार्यरत वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड नागपुर ओबीसी को भर्तियों में पूरा 27% आरक्षण दे रहा है। डब्ल्यूसीएल नागपुर के भर्ती के विज्ञापन क्रमांक 2610 दिनांक 05.09.2018 के कुल 333 पदों में से ओबीसी को 101 पद व विज्ञापन क्रमांक 2135 दिनांक 26.06.2019 के कुल 99 पदों में से ओबीसी को 27 पद दिए गए हैं। ऐसी गंभीर विसंगतियों पर कोल इंडिया लिमिटेड कोलकोता  द्वारा पूरे एक दशक तक आंख मूंदे रखना भी आश्चर्जनक है। यह रवैया विभिन्न शंकाओं को जन्म देता है।

 जब जातियों की सूची व जाति प्रमाण पत्र केन्द्र का तब आरक्षण राज्य का कैसे?

एनसीएल सिंगरौली की रोजगार अधिसूचनाओं में उल्लेख है कि ‘केन्द्रीय सूची में आने वाले अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को ही इस आरक्षण की पात्रता होगी। ऐसे में मध्यप्रदेश राज्य के आरक्षण प्रतिशत को लागू करने का प्रश्न ही नहीं उठता। आज मध्यप्रदेश की 50 जातियां केंद्रीय पिछड़ा वर्ग सूची में शामिल ही नहीं हैं, फिर उनका क्या होगा।

2009 से ही 27% ओबीसी आरक्षण की मांग व आंदोलन की चेतावनी

अखिल भारतीय अपाक्स ने मांग की है कि वर्ष 2009 से एनसीएल सिंगरौली द्वारा की गई समस्त अखिल भारतीय स्तर  की भर्तियों में अन्य पिछड़ा वर्ग को वर्ष 2009 से ही 27% आरक्षण प्रदान करते हुए ओबीसी के बैकलॉग पदों की आज की स्थिति में पुनः गणना कर उन पदों पर अन्य पिछड़ा वर्ग की पुनः भर्ती की जाए। अन्यथा ओबीसी को लगातार हो रहे इस भारी नुकसान व अन्याय के चलते अखिल भारतीय अपाक्स एनसीएल सिंगरौली के विरुद्ध राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन करेगा।

 ओबीसी महासभा ने भी शिकायत

एनसीएल सिंगरौली द्वारा अखिल भारतीय स्तर की भर्तियों में असंवैधानिक तरीके से ओबीसी को 27 फीसदी के स्थान पर केवल 15 फीसदी आरक्षण देने की शिकायत ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओबीसी ललित कुमार, भोपाल ने भी भारत सरकार से की है। ललित कुमार ने भी मांग पूरी नहीं किए जाने पर राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन की चेतावनी दी है।


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