पश्चिम बंगाल में चर्चित निजी सहायक हत्याकांड ने अब नया मोड़ (Shubhendu Adhikari) ले लिया है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। शुरुआती गिरफ्तारी के बाद जिस तरह पहचान को लेकर गड़बड़ी सामने आई, उसने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
जांच एजेंसियों की पड़ताल में अब कई नई बातें निकलकर सामने आ रही हैं। परिवार की तरफ से पहले ही गलत गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा था, जिसके बाद अब केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई ने पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी है। मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर सवाल : Shubhendu Adhikari
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में स्थानीय पुलिस ने पहले तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें बिहार के बक्सर से मयंक मिश्रा और विक्की मौर्य को पकड़ा गया था। वहीं उत्तर प्रदेश के बलिया से राज सिंह नाम के एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर बाद में गिरफ्तार किया गया। स्थानीय पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए कस्टडी में भी लिया था।
जांच में सामने आई पहचान की गड़बड़ी
मामले की जांच जब केंद्रीय एजेंसी ने संभाली तो पता चला कि जिस व्यक्ति को राज सिंह समझकर गिरफ्तार किया गया था, वह असली आरोपी नहीं था। परिवार की ओर से पहले ही दावा किया गया था कि गिरफ्तार व्यक्ति घटना के समय अयोध्या में मौजूद था। बाद में जांच में पहचान को लेकर भ्रम की बात सामने आई।
मुजफ्फरनगर से पकड़ा गया मुख्य आरोपी
केंद्रीय जांच एजेंसी ने हाल ही में मुजफ्फरनगर से राजकुमार नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जिसे राज सिंह के नाम से भी जाना (Shubhendu Adhikari) जाता है। जांच एजेंसी के अनुसार वही इस पूरे हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता और प्लानर बताया जा रहा है। अदालत में यह जानकारी पेश किए जाने के बाद पहले गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को रिहा कर दिया गया।
एक और गिरफ्तारी से जांच आगे बढ़ी
जांच एजेंसी ने बनारस से विनय राय नाम के एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। अब तक इस मामले में कुल चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क और हत्या की साजिश से जुड़े बाकी पहलुओं की भी जांच कर रही हैं।
गलत गिरफ्तारी से बढ़े सवाल
मामले में गलत पहचान के चलते हुई गिरफ्तारी ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े (Shubhendu Adhikari) कर दिए हैं। एक जैसे नाम होने के कारण हुई इस चूक को गंभीर माना जा रहा है। अब मामले में आगे की जांच और बाकी आरोपियों की भूमिका को लेकर भी नजर बनी हुई है।
