शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से चल रही गिरावट ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क (Share Market Outlook India) कर दिया है। Share Market Outlook India को लेकर अब यही सवाल उठ रहा है कि क्या बाजार फिर से संभलेगा या उतार चढ़ाव जारी रहेगा। ट्रेडिंग फ्लोर से लेकर छोटे निवेशकों तक हर जगह यही चर्चा है।
जमीन पर माहौल देखें तो कई निवेशक फिलहाल वेट एंड वॉच के मूड में दिख रहे हैं। कुछ लोग गिरावट को खरीदारी का मौका मान रहे हैं, तो कई लोग अभी भी जोखिम लेने से बच रहे हैं। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कुछ बड़े फैक्टर तय करने वाले हैं।
किन फैक्टर पर टिकी है नजर (Share Market Outlook India)
पश्चिम एशिया की मौजूदा भू राजनीतिक स्थिति, कंपनियों के वित्तीय नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। इस हफ्ते शुक्रवार को महाराष्ट्र दिवस के कारण घरेलू बाजार बंद रहेंगे, जिससे ट्रेडिंग पर असर देखने को मिल सकता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में बाजार खबरों के आधार पर ज्यादा मूव कर सकता है और उतार चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत, कच्चे तेल की कीमतों और ग्लोबल संकेतों पर बनी रहेगी। अगर तेल की कीमतों में स्थिरता आती है तो बाजार को थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन तनाव बढ़ने पर अस्थिरता भी बढ़ सकती है।
Q4 रिजल्ट और कंपनियों का प्रदर्शन
चौथी तिमाही के नतीजे भी इस समय बाजार के लिए बड़ा फैक्टर बने हुए हैं। निवेशक कंपनियों के प्रदर्शन, भविष्य के गाइडेंस और सेक्टर के ट्रेंड पर नजर रख रहे हैं। यही वजह है कि अलग अलग शेयरों में अलग मूवमेंट देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर से जुड़े फैसले पर भी बाजार की नजर टिकी हुई है।
पिछले हफ्ते बाजार में गिरावट
पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार में अच्छी खासी गिरावट दर्ज की गई थी। सेंसेक्स में 1829.33 अंक यानी करीब 2.33 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी 455.6 अंक यानी 1.87 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका ईरान के बीच बातचीत में अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजारों पर दबाव बना हुआ है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है, जो 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है।
आगे क्या रहेगा रुख
भारत जैसे देश के लिए तेल की कीमतें एक अहम फैक्टर होती हैं, क्योंकि इससे महंगाई, रुपये की स्थिति और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ता है। ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर ग्लोबल घटनाओं, कंपनियों के नतीजों और आर्थिक संकेतों पर बनी रहेगी। इन्हीं के आधार पर तय होगा कि बाजार में तेजी लौटेगी या अभी उतार चढ़ाव जारी रहेगा।
