Sarvshresth institute : स्टेथेस्कोप रखकर पकड़ी कलम और बारहवीं पास अंकित ने तैयार कर दिए डाक्टर -

Sarvshresth institute : स्टेथेस्कोप रखकर पकड़ी कलम और बारहवीं पास अंकित ने तैयार कर दिए डाक्टर

Sarvshrestha Institute: Holding a pen with a stethoscope and 12th pass Ankit prepared the doctor

Sarvshrestha Institute

रायपुर/नवप्रदेश। Sarvshresth institute : देश के नामी कोचिंग संस्थान में कोचिंग के बाद जब नीट की परीक्षा में चयन नहीं हुआ तो एनसीईआरटी की किताब से तैयारी की और मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के साथ ही एम्स की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली।

छोटे से गांव सांकरा के अंकित गोयल ने रायपुर के मेडिकल कालेज में डाक्टरी की पढ़ाई शुरु की पर मन में इन कोचिंग कक्षाओं के जाल को तोड़ने की टीस थी। आखिरकार एक दिन स्टेथेस्कोप रखकर सीधे कलम उठाने का निर्णय लिया और ऐसे बच्चों को शिक्षित करने का काम शुरु किया जिन्हें पढ़ाई में औसत समझा जाता था। तीन साल पहले 6 बच्चों को पढ़ाने से शुरु हुआ यह सफर अब सैकड़ों बच्चों तक पहुंच चुका है। इनके पढ़ाए कई बच्चे ऐसे भी हैं जो अब नीट की परीक्षा उत्तीर्ण कर एमबीबीएस की पढ़ाई कर (Sarvshrestha Institute) रहे हैं।

बड़े संस्थान जहां होनहार बच्चों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं। अंकित के कोचिंग संस्थान में पहली शर्त यह है कि छात्र औसत हो या नीट की परीक्षा में उसके अंक ३६० से कम आए हों। इसके पीछे उनका मानना है, कोचिंग की असली जरूरत ऐसे ही औसत बच्चों को है। इसके लिए अपने पिता की मदद से तीन साल पहले उन्होंने नीट की परीक्षा की तैयारी के लिए सर्वश्रेष्ठ इंस्टीट्यूट के नाम से शिक्षण संस्थान की शुरुआत की। विशेष बात यह है अन्य संस्थान जहां एक लाख से डेढ़ लाख रुपये कोचिंग फीस लेते हैं, अंकित केवल पचास हजार रुपये ही सलाना फीस ले रहे हैं।

खुद के दर्द को प्रेरणा बनाकर ठाना बच्चों का बोझ करेंगे कम

अंकित बताते हैं, वे कक्षा ८ वीं तक सांकरा में हिन्दी माध्यम स्कूल के छात्र थे। इस वजह से अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा उनके लिए चुनौती की तरह ही थी। इसके बाद नीट की परीक्षा के लिए कोटा के संस्थान में गए। यहां पढ़ाए जा रहे विषय उनके लिए नए और बहुत अधिक थे। कोचिंग संस्थानों का भी ध्यान केवल अव्वल विद्यार्थियों पर ही था। एक कक्षा में २५०-३०० बच्चे होते थे और छह से आठ घंटे की कोचिंग। इससे बन रहे दबाव की वजह से अब १५-१५ घंटे एक ही टेबल पर बैठकर पढ़ते रहना मजबूरी हो गई थी। कोर्स पूरा करने में वक्त की कमी की वजह से अंकित सिर्फ एक वक्त का खाना खाते थे और मूत्र त्याग भी वहीं बैठे-बैठे बोतल में करते थे। इतनी कड़ी मेहनत के बाद भी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सके। कोचिंग के लिए दिल्ली गए लेकिन तब भी सफलता नहीं मिली।आखिरकार जब खुद की पढ़ाई से सफलता मिली तो तभी ठान लिया था एक दिन वे दूसरे बच्चों के कंधों से पढ़ाई का बोझ कम करेंगे।

16 की जगह अब आठ घंटे की ही पढ़ाई

कोचिंग संस्थानों की शिक्षण व्यवस्था से तंग आकर अंकित ने नीट की पढ़ाई की शिक्षा प्रणाली को ही बदलकर रख दिया। इससे पढ़ाई के लिए लगने वाला समय कम हुआ और तैयारी बेहतर हुई। इसके लिए अंकित ने विषय को सीमित करने के लिए अनावश्यक चीजों को बाहर कर, एनसीईआरटी पर केन्द्रित सिलेबस तैयार किया । पढ़ाई को आसान बनाने के लिए इमेज और थ्रीडी एनिमेशन को शामिल किया। यह भी ध्यान रखा कि एक बैच में २० ही बच्चे हों ताकि सब पर ध्यान दिया जा सके। कक्षा में अभिवादन की जगह कान्सेप्ट विश शुरु की, जिसमें पढ़ाए गए विषयों के बारे में बच्चों को जानकारी देनी होती है। अंकित के इस प्रयास को डॉ रमन सिंह, एजाज ढेबर, कुलदीप सिंह जुनेजा जैसे कई सारे नामी हस्तीयों ने काफी सराहा है।

रतन टाटा से प्रेरित, रिलायंस के राजीव मार्गदर्शक

अंकित ने बताया वे रतन टाटा से प्रेरित हैं। अंकित अपने संस्थान (Sarvshrestha Institute) को देशव्यापी करना चाहते हैं। इसके लिए रिलायंस इंफ्रा के पूर्व असिस्टेंट वाइज प्रेसिडेंट राजीव कुमार इनके मार्गदर्शक हैं। अंकित इस कंपनी को अब और भी गति देने की इच्छा रखते हैं।


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