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Sanju Devi Kabaddi : एशियन गेम्स में तिरंगा फहराना अब संजू का अगला बड़ा लक्ष्य

कबड्डी मेरे लिए सिर्फ खेल नहीं, कुछ कर गुजरने की उम्मीद है।” यह कहते हुए संजू देवी की आंखों में वही चमक दिखती है जिसने उन्हें महिला वर्ल्ड कप में दमदार प्रदर्शन तक पहुंचाया। अब उनकी पूरी तैयारी एशियन गेम्स के लिए है। तेलंगाना में होने वाले नेशनल गेम्स में वे छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगी। वर्ल्ड कप में 13 रेड में 16 अंक हासिल करने वाली संजू (Sanju Devi Kabaddi) आज उस मुकाम पर हैं, जहां गांव की तंग गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने की उनकी कहानी लाखों लड़कियों को प्रेरित कर रही है।

https://youtu.be/Me1h37lIppk

कोरबा की संजू देवी ने बताया कि मेरे माता-पिता ने अभावों में भी मेरे सपनों को जिंदा रखा। अब मेरी बारी है कि उनके त्याग को जीत में बदलूं। एशियन गेम्स में तिरंगा फहराना ही अब सबसे बड़ा सपना है। उन्होंने कहा कि लड़की होकर कबड्डी खेलने पर समाज में ताने सुनने पड़े। कई लोगों ने कहा कि इससे क्या मिलेगा? पढ़-लिखकर घर संभालो। लेकिन माता-पिता हर बार उनके ढाल बने रहे। जब मेरे जूते टूट जाते थे तो पिता जी अपने लिए कपड़े नहीं खरीदते थे, मेरे जूते ले आते थे। मां दो दिन ज्यादा मजदूरी कर लेती थीं ताकि मैं मैट पर प्रैक्टिस कर सकूं।

हार से डरो मत, अभ्यास मत छोड़ो

संजू ने देश की लड़कियों के लिए संदेश दिया कि शुरुआत में असफलता जरूर मिलेगी। गिरोगी, चोट लगेगी, लोग बातें करेंगे, लेकिन हिम्मत मत हारो। एक दिन वही लोग गर्व करेंगे। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता रोज़ी-मजदूरी करते हैं और शुरुआती ट्रेनिंग बिना स्पेशल डाइट के की गई।

सरकार से अच्छी नौकरी की उम्मीद

संजू कहती हैं अगर सरकार मुझे एक अच्छी सरकारी नौकरी दे दे तो घर की आर्थिक दिक्कत कम होगी। बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर ट्रेनिंग, डाइट और संसाधन चाहिए। मैं देश के लिए और बेहतर करना चाहती हूं। वर्ल्ड कप के बाद जहां उम्मीदें बढ़ी हैं, वहीं अब तैयारी का खर्च भी बढ़ गया है।

https://youtu.be/H654eA-QJ6c

खेल प्रेमियों ने एयरपोर्ट में किया भव्य स्वागत

संजू बुधवार को स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट रायपुर पहुंचीं, जहां प्रशंसकों और खेल प्रेमियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। एयरपोर्ट “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा। वह फिलहाल कोच के प्रोटोकॉल के अनुसार रायपुर में रहेंगी, इसके बाद अपने गांव केराकछार जाएंगी जहां उनके स्वागत की तैयारियां ज़ोरों पर हैं।

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