राजनीति

Punjab Politics Crisis : चारों तरफ संकट से घिरे भगवंत मान, अब ‘पंथ’ के सहारे बचाने में जुटे सियासी किला!

पंजाब की राजनीति में आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री Bhagwant Mann इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजरते दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है, दूसरी ओर पार्टी के भीतर टूट और दलबदल ने सरकार की सियासी चिंता बढ़ा दी है। ऐसे हालात में भगवंत मान अब खुलकर टकराव और पंथिक राजनीति – दोनों रास्तों पर आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में सियासी संघर्ष और तीखा हो सकता है। आम आदमी पार्टी के लिए यह केवल सत्ता बचाने की लड़ाई नहीं बल्कि राजनीतिक अस्तित्व की परीक्षा बनती जा रही है।

ED-सीबीआई कार्रवाई से बढ़ा दबाव

पंजाब सरकार पर दबाव उस समय और बढ़ गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया। वहीं पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा से जुड़े ठिकानों पर भी केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई हुई।

इसी बीच सतर्कता ब्यूरो की सक्रियता और लगातार छापों ने राज्य की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया। आप इसे केंद्र सरकार का राजनीतिक दबाव अभियान बता रही है, जबकि भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रही है।

राज्यसभा में बढ़ी BJP की ताकत

पंजाब की राजनीति में सबसे बड़ा झटका तब लगा जब आम आदमी पार्टी के कई राज्यसभा सांसदों ने पाला बदल लिया। पार्टी इसे “ऑपरेशन लोटस” करार दे रही है।

राज्यसभा सांसद Raghav Chadha की अगुआई में हुए इस घटनाक्रम के बाद भाजपा की राज्यसभा में ताकत बढ़ गई। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि दबाव और राजनीतिक प्रबंधन के जरिए उसके नेताओं को तोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने राष्ट्रपति से मिलकर उन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग भी उठाई, जिन्हें उन्होंने “पंजाब के गद्दार” बताया।

धमाकों के बाद BJP पर सीधा हमला

6 मई को पंजाब में हुए दो कम तीव्रता वाले धमाकों के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया। एक धमाका बीएसएफ मुख्यालय के बाहर और दूसरा अमृतसर सैन्य क्षेत्र के पास हुआ। घटना के बाद भगवंत मान ने सीधे भाजपा पर निशाना साध दिया। हालांकि भाजपा नेताओं ने इसे गैरजिम्मेदार बयान बताया। भाजपा नेता Sunil Jakhar और Tarun Chugh ने मुख्यमंत्री से सबूत मांगते हुए हमला बोला।

उधर पंजाब पुलिस प्रमुख गौरव यादव ने शुरुआती जांच में पाकिस्तान समर्थित तत्वों की आशंका जताई, जिसके बाद भाजपा ने मान सरकार को घेरने की कोशिश तेज कर दी।

अब ‘पंथिक राजनीति’ पर बड़ा दांव

राजनीतिक दबाव के बीच भगवंत मान ने पंथिक मुद्दों पर भी आक्रामक रणनीति शुरू कर दी है। उन्होंने “शुकराना यात्रा” निकालकर सिख धार्मिक भावनाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

राज्य सरकार ने “जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन कानून 2026” लागू किया है, जिसमें बेअदबी मामलों में उम्रकैद और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

हालांकि इस कानून को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। कई सिख संस्थाओं और धार्मिक विद्वानों ने आरोप लगाया कि पंथिक मर्यादा और परंपराओं की अनदेखी की गई है।

कारोबारी और शहरी चेहरों के जाने से बढ़ी चिंता

पार्टी से दूर हुए नेताओं में कारोबारी और प्रभावशाली चेहरे भी शामिल बताए जा रहे हैं। इससे आम आदमी पार्टी के शहरी नेटवर्क और फंडिंग आधार को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भगवंत मान अब ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां उन्हें एक साथ प्रशासनिक दबाव, राजनीतिक टूट और पंथिक असंतोष तीनों मोर्चों से जूझना पड़ रहा है।

पंजाब की राजनीति में निर्णायक मोड़?

पंजाब में मौजूदा हालात को आने वाले विधानसभा चुनाव का शुरुआती ट्रेलर माना जा रहा है। भाजपा पंजाब में अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जबकि आम आदमी पार्टी अपने मजबूत गढ़ को बचाने में जुटी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भगवंत मान टकराव और पंथिक रणनीति के सहारे राजनीतिक संकट से बाहर निकल पाएंगे, या पंजाब की राजनीति एक बड़े सत्ता परिवर्तन की ओर बढ़ रही है।

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