संपादकीय: द्विपक्षीय संबंधों को नया आयाम

Editorial: भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय इजराइल दौरे से इन दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नया आयाम मिला है। नौ साल पहले जब पीएम मोदी इजराइल गये थे तो दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए थे। रक्षा क्षेत्र में दोनों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई। इजराइल ऐसा तीसरा सबसे बड़ा देश है जिससे भारत हथियार लेता है। इसका अलावा विज्ञान अनुसंधान, साइबर सुरक्षा और नवाचार में भी भारत और इजराइल के बीच भागीदारी बढ़ी है। इजराइल भारत का सबसे विश्वसनीय सहयोगी रहा है।
वहां के प्रधानमंत्री बैंजामिन नेतन्याहू और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संबंध भी मधुर हैं। इस बार पीएम मोदी का इजराइल में ऐतिहासिक स्वागत हुआ। उनके स्वागत के लिए प्रोटोकॉल तोड़कर प्रधानमंत्री नेतन्याहू खुद सपत्नीक एयरपोर्ट पहुंचे थे। जहां दोनों गर्मजोशी से गले मिले।
बैंजामिन नेतन्याहू की धर्मपत्नी सारा नेतन्याहू ने भगवा ड्रेस पहन रखी थी और नरेंद्र मोदी भगवा रुमाल रखे हुए थे। इसे लेकर हास परिहास हुआ और दोनों नेताओं ने ठहाके लगाए। यह दृष्य देखकर अमेरिका और पाकिस्तान ही नहीं बल्कि भारत का विपक्ष भी हतप्रभ रह गया होगा। बाद में पीएम मोदी ने इजराइल की संसद को भी संबोधित किया और ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। इजराइल की संसद मोदी…मोदी… के नारों से गूंज उठी। कई बार सांसदों ने खड़े होकर तालियां बजाई।
जिस भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके ही देश की लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष ने षडय़ंत्र रचकर बोलने नहीं दिया था उनको सुनने के लिए इजराइल के सांसद आतुर थे। यही नहीं बल्कि पीएम मोदी को इजराइल का सर्वोच्च सम्मान भी प्रदान किया गया। बैंजामिन नेतन्याहू ने अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी को अपना दोस्त ही नहीं भाई बताते हुए उन्हें वल्र्ड लीडर बताया। इजराइल की संसद को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने मिडिल इस्ट में शांति कायम करने की आवश्यकता प्रतिपादित की।
गाजा और हमास का जिक्र करते हुए उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत पर भी बल दिया। इजराइल की धरती से पीएम मोदी ने आतंक का पर्याय बन चुके पड़ौसी देश पाकिस्तान को भी कड़ा संदेश दिया और स्पष्ट किया कि भारत पूरी ताकत के साथ आतंकवाद का खात्मा करने के लिए कटिबद्ध है। गौरतलब है कि भारतीय पीएम मोदी का ऐसे समय में इजराइल दौरा हुआ है जब अमेरिका लगातार ईरान पर हमले की धमकी दे रहा है और इसके लिए इजराइल को भी उकसा रहा है।
पूर्व में इजराइल और ईरान के बीच जंग हो चुकी है। उस दौरान भी भारत ने तटस्थ रुख अख्तियार किया था क्योंकि भारत के ईरान के साथ भी अच्छे संबंध हैं। कभी भी पीएम मोदी यह चाहते हैं कि ईरान के साथ इजराइल के जंग की नौबत टाली जाए क्योंकि यह युद्ध किसी के हित में नहीं है। पहले ही कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और ऐसे में ईरान युद्ध की आग में झुलेगा तो कच्चे तेल की किल्लत बढ़ेगी और इसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा।
उम्मीद है कि इजराइल प्रवास के दौरान पीएम मोदी बैंजामिन नेतन्याहू को इस जंग के खतरे से आगाह जरूर करेंगे। यदि उनके प्रयास से संभावित जंग टल जाती है तो यह दुनिया के हित में होगा और भारत की एक बड़ी उपलब्धि माना जाएगा। बहरहाल पीएम मोदी के इजराइल दौरे से दोनों देशों के बीच रिश्ते और मजबूत होंगे और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।



