संपादकीय

संपादकीय: पेट्रोलियम पदार्थों के मुल्य में वृद्धि

Editorial: आखिरकार भारत में भी पेट्रोलियम पदार्थों के मुल्य में वृद्धि की नौबत आ ही गई। ईरान और अमेरिका के बीच पिछले 45 दिनों से चल रही तनातनी के कारण आधी दुनिया में तेल और गैस का संकट विकट रूप धारण कर चुका है लेकिन भारत में हालात काबू मेें रहे थे। लेकिन अब सरकार को पेट्रोल और डीजल के मूल्य में तीन रूपय लीटर तथा सीएनजी में दो रूपये की वृद्धि करनी पड़ गई। इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा और पहले से ही आसमान पर चढ़ी महंगाई और परवान चढ़ेगी।

हालांकि पेट्रोल और डीजल के मूल्य में सिर्फ तीन रूपये की वृद्धि की गई है लेकिन यह वृद्धि भी महंगाई की आग को भड़काएगी। पहले ही महंगाई में आम आदमी का जीना मुहाल कर रखा है और अब यात्री किराया तथा माल भाड़ा बढ़ जाने के कारण दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं के दाम भी आसमसन छुने लगेंगे। इसका तत्काल प्रभाव भी पडऩा शुरू हो गया है। दैनिक उपभोग की चीजों सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं के दामों में वृद्धि होने लगी है। आगे चलकर हालात और भी खराब हो सकते हैं। सरकार को दाम बांधने के लिए तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाने होंगे अन्यथा जमाखोर और मुनाफाखोर आपदा की इस घड़ी में अपने लिए अवसर तलाश लेंगे।

केन्द्र सरकार के इस निर्णय को जनविरोधी करार देते हुए विपक्ष ने पेट्रोलियम पदार्थों के मुल्य में की गई वृद्धि की आलोचना की है। प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस पर तंज कसते हुए कहा है कि महंगाई में नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता पर हंटर चलाया है और पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होते ही उसमें हुए खर्च की वसूली के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिये हैं। अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है किन्तु सरकार ने इस बारे में अभी कोई स्पस्टीकरण नहीं दिया है। रही बात आम जनता की तो उसके लिए तो यह मूल्य वृद्धि दुबर पर दो आषाढ़ वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है।

छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में पेट्रोल डीलजल और रसोई गैस की पहले ही किल्लत मची हुई है। पेट्रोल पंपों पर लंबी लंबी कतारें लग रही है और अब ऊपर से इनके दाम भी बढ़ा दिये गये हैं। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित कृषि प्रधान भारत का कृषि क्षेत्र होगा। डीजल के दाम बढऩे से ना सिर्फ सिंचाई के लिए किसानों को दिक्कत होगी बल्कि कृषि कार्य में उपयोग किये जाने वाले ट्रेक्टर और हारवेस्टर सहित अन्य डीजल चालित यंत्रों का उपयोग करना महंगा पड़ेगा। जाहिर है कृषि उत्पादन की लागत और बढ़ेगी। जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा।

किसान पहले ही रासायनिक खादों की कमी से जूझ रहे हैं और उन्हें बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है। अब डीजल के महंगे होने से उनकी परेशानी में और इजाफा होगा। इसलिए सरकार को चाहिए कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीजल उपलब्ध कराने की तत्काल व्यवस्था करें। ईरान और अमेरिका के बीच अभी तक समझौता वार्ता अधर में लटकी हुई है और इसके विफल होने पर मिडिल ईस्ट में जंग के हालात निर्मित होने की प्रबल संभावाना नजर आ रही है। यदि ऐसा हुआ तो भारत में भी दुनिया के अन्य देशों की तरह ही तेल और गैस का संकट विकराल रूप धारण कर सकता है तथा निकट भविष्य में पेट्रोल और डीजल के दाम और भी बढ़ सकते हैं।

गौरतलब है कि चार साल के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गये हैं। सरकार का कहना है कि अभी भी तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है 3 रूपये की वृद्धि के बावजूद तेल कंपनियों को प्रतिदिन 1000 करोड़ रूपये का घाटा सहन करना पड़ रहा है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में जग के हालात निर्मित होते हैं और उसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आता है तो भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम और ज्यादा बढऩे की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

इसलिए यह आवश्यक है कि निकट भविष्य में सामने आने वाली चुनौती से निपटने के लिए सरकार एक सुस्पष्ट नीति निर्धारित करें और उस पर युद्ध स्तर पर अमल करे क्योंकि भारत में 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात किया जाता है और उसके आयात की राह में बाधा खड़ी होती है तो उसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल पर की कीमतों पर पड़ेगा।

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