‘मुफ्त’ अनाज में ‘मुनाफा’: लाभार्थी बेच रहे, व्यापारी कमा रहे शासन पर करोड़ों का बोझ

PDS in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राज्य सरकार करीब 73 लाख जरूरतमंद लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध करा रही है, जिससे गरीब और कमजोर वर्ग को बड़ी राहत मिली है। यह योजना लंबे समय तक देश में अपनी प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था के लिए सराही जाती रही है। गरीबों की इस महत्वपूर्ण योजना की देशभर में सराहना हुई, लेकिन बेईमानों ने इसमें भी कमाई का जरिया बना लिया। आरोप है कि कुछ लाभार्थी मिलने वाला राशन दुकानों और कुछ अनाज विक्रेताओं को बेच देते हैं, जिससे बाजार में कालाबाजारी को बढ़ावा मिल रहा है। इस योजना के चावल से व्यापारी करोड़ों रुपये का लाभ कमा रहे हैं। वहीं धान से चावल बनाने से लेकर राशन को अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचाने में राज्य सरकार को प्रति किलो लगभग 40 रुपये का खर्च वहन करना पड़ रहा है। इससे शासन पर हर महीने भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है और बजट पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है।
विक्रम सिंह ठाकुर
बिलासपुर/नवप्रदेश। छत्तीसगढ़ में हर महीने सरकार द्वारा बीपीएल, एपीएल एवं अन्य योजनाओं के तहत 26 लाख 34 हजार 7 सौ 35 क्विंटल चावल पीडीएस दुकानों के माध्यम से आम लोगों तक नि:शुल्क पहुंचाई जा रही है। धान खरीदी से लेकर चावल पीडीएस दुकान तक पहुंचाने में सरकार को करीब 40 रुपए प्रति किलो ग्राम खर्च आ रही है। इस तरह 10 करोड़ 53 लाख 89 हजार 2 सौ रुपए सरकार अपने खजाने से आम लोगों के लिए मुफ्त अनाज देकर हर महीना खर्च कर रही है, लेकिन इस धान-चावल के खेल में आम लोगों सहित व्यापारी वर्ग लाल हो गए हैं और सरकार पर करोड़ों का बोझ है। हितग्राही भी सरकार की इस मुफ्त योजना का पूरा लाभ ले रहे हैं और चावल की आवश्यकता नहीं होने पर भी कार्डधारी बने हुए हैं। मुफ्त योजना से मिलने वाले राशन को पीडीएस दुकान में ही बिक्री कर दे रहे हैं।
घोषणा पत्र बना अवैध कमाई का जरिया
चावल वितरण कार्यक्रम भी खाद्य विभाग की मोटी कमाई का जरिया बन गया है और पीडीएस दुकान संचालकों से स्टॉक घोषणा पत्र जमा करने के नाम पर एक से दो हजार रुपए हर महीने अवैध वसूली की जा रही है। प्रदेश में संचालित पीडीएस दुकानों से हर महीना घोषणा पत्र भरवाया जाता है। छत्तीसगढ़ में इस समय करीब साढ़े 13,800 पीडीएस दुकानें संचालित हैं। दुकान संचालकों से हर महीना ऑनलाइन घोषणा पत्र लिया जाता है, जिसमें उन्हें महीने की स्टॉक की जानकारी देनी होती है। घोषणा पत्र जमा नहीं करने पर आबंटन रुकने का डर होता है। ऑनलाइन घोषणा पत्र दुकान संचालक कहीं से भी जमा कर सकते हैं, लेकिन खाद्य विभाग के अधीन ऐसी व्यवस्था बना ली गई है, ताकि दुकानदारों से हर महीना वसूली कर सके। वर्ष 2015 तक रजिस्टर में ही राशन वितरण का हिसाब-किताब रखा जाता था। बाद में इसे ऑनलाइन जमा करना जरूरी कर दिया गया। यह काम दुकान संचालक कहीं से भी कर सकता है, लेकिन खाद्य निरीक्षकों के द्वारा आईडी नहीं दी जाती है। घोषणा पत्र भरने की जगह निश्चित कर दी गई है, ताकि अवैध वसूली की जा सके।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली
- प्रदेश के 73 लाख जरूरतमंद लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा
- 40 रुपए प्रति किलो खर्च आ रही राशन पहुंचाने में
- 10 करोड़ 53 लाख 89 हजार 2 सौ रुपए हर महीने सरकार कर रही खर्च
- हर महीने 26 लाख 34 हजार 7 सौ 35 क्विंटल चावल पीडीएस दुकानों में
पीडीएस दुकान में ही हितग्राही बेच रहे चावल
कई राशनकार्डधारी हितग्राहियों द्वारा अपात्र होने के बाद भी सरकार की चावल बांटने की योजना का लाभ लिया जा रहा है और इन हितग्राहियों के द्वारा पीडीएस दुकान में ही चावल को 20 से 22 रुपए प्रतिकिलो ग्राम के दर से बेच दिया जाता है। हितग्राही अंगूठा लगाकर अपना चावल दुकान में ही छोड़ दे रहे हैं। दुकानदार अपनी शार्टेज की भरपाई के लिए साथ ही मिलरों से सौदा कर सरकारी चावल की रिसाइकलिंग कर रहे हैं। हालांकि खाद्य विभाग द्वारा पीडीएस चावल की खरीदी-बिक्री को लेकर कई प्रकरण दर्ज भी किए गए हैं। दुकानों में सीसीटीवी कैमरा नहीं होने के कारण दुकानदार आसानी से हेराफेरी कर रहे हैं। जबकि सरकार द्वारा पहले ही आदेश जारी कर कहा गया है कि सभी पीडीएस दुकानों में सीसीटीवी कैमरा आवश्यक है, लेकिन आज भी कई दुकानों में कैमरा नहीं लगाया गया है और सरकारी चावल का अवैध कारोबार धड़ल्ले से किया जा रहा है। दुकानों में चोरी की घटनाएं भी आम हो गई है और अपराधी सीसीटीवी कैमरा नहीं होने का पूरा फायदा उठा रहे हैं।
प्रदेश के कई संपन्न परिवार भी बीपीएल कार्डधारी
प्रदेश में बीपीएल राशनकार्डों की संख्या लाखों में है। स्थिति यह है कि सरकारी कर्मचारी के परिवारों, संपन्न और बड़े किसानों के नाम पर भी बीपीएल कार्ड है। यदि पड़ताल की जाए तो लंबी-चौड़ी सूची बन सकती है। सरकार द्वारा अत्यंत गरीब व आर्थिक रुप से कमजोर लोगों की पहचान निर्धारित करने के लिए बीपीएल कार्ड बनाया गया है। इसकी एक रूपरेखा है जिसके तहत सरकार एक निश्चित मापदंड के तहत गुजर-बसर करने वाले परिवारों को चिंहित कर उनके कल्याण के लिए योजना बनाती है। कानून में प्रावधान के अनुसार यदि कोई गलत दस्तावेजों के आधार पर राशन कार्ड लेता है तो आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 9 के तहत दंडनीय अपराध है। साथ ही जनपदों के बिना अनुमोदन के भी बीपीएल कार्ड बन जाता है। जनपद पंचायत के सीईओ के द्वारा निगरानी नहीं किए जाने के कारण आज भी बीपीएल कार्ड बनवाना आसान है।
खाद्य विभाग के लिए 6216 करोड़ से अधिक का बजट
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयालदास बघेल के विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 6216 करोड़ 73 लाख रुपये की अनुदान मांगें सर्वसम्मति से पारित हुईं। मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों और गरीब परिवारों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 73 लाख से अधिक राशन कार्डधारियों को मुफ्त चावल दिया जा रहा है। इसके साथ ही नमक, चना और गुड़ जैसी योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। अनुसूचित क्षेत्रों में हर राशन कार्ड पर 2 किलो और अन्य क्षेत्रों में 1 किलो आयोडीन युक्त नमक मुफ्त वहीं 85 विकासखंडों में 5 रुपये किलो की दर से 2 किलो चना वितरित हो रहा है। बस्तर संभाग में रियायती दर पर 2 किलो गुड़ भी दिया जा रहा है। इन योजनाओं के लिए अलग-अलग बजट प्रावधान किया गया है।
प्रदेश में हर महीने राशन दुकानों में बंट रहा चावल (मात्रा क्विंटल में)
- जिले का नाम प्राथमिकता अंयोदय कुल चावल
- बस्तर 46530.66 16092.65 73210.12
- बीजापुर 14562.53 8983.8 30532.43
- दतेवाड़ा 14324.41 9707.25 30594.61
- कांकेर 46003.66 12545.4 68542.54
- कडागांव 37067.43 11718.35 54230.58
- नारायणपुर 5217.03 5476.1 14175.73
- सुकमा 12794.07 10113.25 27848.37
- बलासपुर 122094.94 34245.75 176635.24
- गौरेला-पेंड्रा-मरवाही 22672.69 9697.45 35550.24
- जांजगीर-चांपा 82999.18 17359.3 109652.24
- कोरबा 81428.06 19578.65 113954.56
- मुंगेल 58482.88 19783.05 83133.13
- रायगढ़ 67814.91 22894.9 105253.26
- बालोद 59867.54 11003.65 80432.74
- बेमेतरा 71151.44 16367.75 93322.24
- दुर्ग 95694.08 26161.8 152436.98
- कवर्धा 63432.71 22379.7 92930.51
- राजनांदगांव 61668.68 12997.6 85470.96
- बलौदाबाजार-भाटापारा 97069.13 17303.65 124987.98
- धमतरी 57707.51 19134.85 85593.46
- गरियाबंद 45240.62 19416.25 69951.92
- महासमुंद 78949.26 16522.45 109051.11
- रायपुर 140937.76 23989.35 196793.31
- बलरामपुर 51074.33 20460.65 78520.64
- जशपुर 57922.66 21745.85 87941.61
- कोरिया 18575.67 7360.85 29330.27
- सरगुजा 56292.5 30698.15 95620.1
- सूरजपुर 52351.81 20879.25 80927.61
- खैरागढ़-छुईखदान-गडंई 30251.9 6046.6 39129.5
- मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौका 18620.84 5884.9 27102.24
- सक्ती 54584.56 14556.85 75104.56
- सारंगढ़-बिलाईगढ़ 47761.61 17438.4 70619.61
- मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर 20751.35 10411.8 36151.32
- कुल 1791901 538957 2634733
‘चाउर वाले बाबा’ ने किया सबके दिलों पर राज, योजनाओं ने छत्तीसगढ़ दिलाई थी खास पहचान
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में क्रांतिकारी सुधारों के कारण देशभर में प्रसिद्धी मिली और उन्हें ‘चाउर वाले बाबा’ (चावल वाले बाबा) के नाम से जाना जाने लगा था। डॉ. रमन सिंह की सरकार ने गरीबों को सस्ती दरों पर चावल उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना लागू की, जो 2012 के आसपास अपने चरम पर थी। इसके तहत, 35 किलो चावल बेहद रियायती दरों (शुरुआत में 1 व 2 प्रति किलो की दर से) पर बांटा गया था।
इस योजना के कारण रमन सिंह को ग्रामीण क्षेत्रों में भारी लोकप्रियता मिली और उन्हें ‘चाउर वाले बाबा’ का नया नाम मिला। डॉ. रमन सिंह की सरकार ने 2012 में छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम लागू किया, जिससे छत्तीसगढ़ ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य बना। छत्तीसगढ़ में चावल के अलावा, इस योजना के तहत गरीबों को रियायती दरों पर सेंधा नमक (आयोडीन युक्त) और चना भी वितरित किया जाता था। यह योजना उनके 15 साल के कार्यकाल के दौरान राज्य में गरीबी कम करने और भारतीय जनता पार्टी की लगातार तीन जीतों में एक महत्वपूर्ण कारक मानी जाती है।



