Editorial: बिहार में पूर्णियां से जीते निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने महिलाओं को लेकर जो अभद्र टिप्पणी की है वह घोर निंदनीय है। पप्पू यादव इसके पहले भी चर्चा में बने रहने के लिए अनाप सनाप बयानबाजी करते रहे हैं। लेकिन इस बार तो उन्होंने मर्यादा की सारी सीमा रेखाएं ही लांघ डाली।
एक ओर जब संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर पूरे देश में विमर्श चल रहा है ऐसे में पप्पू यादव ने महिलाओं के प्रति अपनी गृणित सोच को दर्शाते हुए यह बयान दिया है कि राजनीति में आने वाली 90 प्रतिशत महिलाओं को बेडरूम से गुजरना पड़ता है।
इस तरह का अपमानजनक बयान देने के पहले पप्पू यादव को अन्य महिला नेत्रियों की बात छोड़ दें कम से कम अपनी पत्नि के बारे में भी तो सोचना चाहिए था जो न सिर्फ राजनीति में हैं बल्कि सम्मानीय सांसद भी हैं। पप्पू यादव का यह बेहुदा बयान कतई स्वीकार्य नहीं है और इसका सभी राजनीतिक पार्टियों की महिलाओं ने प्रबल विरोध किया है
और पप्पू यादव से मांग की है कि वे मात्र शक्ति का अपमान करने के लिए देश से मांफी मांगे किन्तु अभी तक पप्पू यादव ने अपने इस बेहद आपत्तिजनक बयान के लिए मांफी नहीं मांगी है। ऐसे बद्जुबान नेताओं के खिलाफ अब नारी शक्ति को खुद सामने आना चाहिए और उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही के विकल्पों पर विचार करना चाहिए। तभी इनकी विशैली जुबान पर लगाम लग पाएगी।
