संपादकीय: प्रधानमंत्री की चिंता स्वाभाविक

Editorial: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया के हालाताओं को मद्देनजर रखकर जो चिंता जाहिर की है वह स्वाभाविक है। पीएम मोदी ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में आ रही कमी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है और देशवासियों से अपील की है कि जब तक युद्ध के हालात खत्म नहीं हो जाते तब तक देशवासी मितव्ययीता बर्ते उनका कहना है कि कम से कम एक साल तक लोग सोना न खरीदें और विदेश यात्रा को टालें। इसके साथ ही उन्होंने पेट्रोल और डीजल का कम से कम उपयोग करने और इसकी जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की भी अपील की है अब उनकी इस अपील से देश में सियायसत गर्मा गई है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पीएम की अपील का विरोध करते हुए कहा है कि पीएम मोदी की यह अपील उनकी नाकामी को दर्शाती है। अब जनता को यह बताया जा रहा है कि वे क्या न खरीदे क्या न खरीदें और कहां जाएं या कहां नहीं जाएं। मोदी सरकार अब देश को चलाने में असफल हो गई है। समाजवादी पार्टी के सुप्रीमों अखिलेश यादव तथा आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर तिखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और आरोप लगाया है कि उनके नेतृत्व में सरकार वैश्विक चुनौतियों से निपटने में विफल सिद्ध हो रही है इस तरह का आरोप लगाने वाले विपक्षी पार्टी के नेता यह भूल गये हैंं कि अमेरिका और इरान के बीच दो माह से जंग चल रही है।

हालांकि अभी संघर्ष विराम हो गया है लेकिन होर्मूज में अभी भी तनाव बना हुआ है जिसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल और गैस का संकट मंडरा रहा है। खुद अमेरिका में तेल की कीमत 50 प्रतिशत बढ़ गई है। पाकिस्तान में तो पेट्रोल और डीजल की कीमत तीन गुनी बढ़ चुकी है। अन्य देशों में भी तेल ओर गैस का संकटठ विकट रूप धारण कर चुका है किन्तु भारत की विदेश निति के चलते भारत में हालात अभी बेकाबू नहीं हुए हैं। रसोई गैस की किल्लत जरूर है लेकिन पेट्रोल और डीजल के दामों में एक रूपये की भी वृद्धि नहीं की गई है।

अभी भी देश में 60 दिनों के और 45 दिनों के लिए एलपीजी गैस का भंडार मौजूद है। किन्तु आगे चलकर इसकी किल्लत हो सकती है। क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग होने की संभावना बढ़ गई है और यह जंग कब तक जारी रहेगी इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। रूस और यूक्रेन के बीच जंग को तीन साल हो गये हैं। यदि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध लबी चली तो दुनिया के अन्य देशों कह तरह भारत को भी तेल और गैस के साथ भी रासायनिक खाद की संकट का सामना करना पड़ जाएगा।

इसलिए एहतियाती कदम उठाना जरूरी है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार खाली न रह पाये। उल्लेखनीय है कि भारत खाड़ी देशों से 85 प्रतिशत तेल और गैस का आयात करता है जिसपर भारत को भारी विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। यदि हम पेट्रोल और डीजल की खपत कम करते हैं तो भारत पर आर्थिक दबाव कम हो सकता है। इसी तरह भारत 95 प्रतिशत सोना विदेशों से आयात करता है और भारतीय लोग सोने के सबसे बड़े खरीदार माने जाते हैं क्योंकि बचत और आर्थिक सिक्योरिटी के लिए सोने की खरीद सबसे सुरक्षित निवेश मानी जाती है। एक अनुमान के मुताबिक भारतीय हर साल आठ सौ टन सोना खरीदते हैं जिनकी कीमत 58 अरब डॉलर है।

यदि हम साल भर सोने की खरीदी कम करते हैं तो अरबों डॉलर बचाये जा सकते हैं। हालांकि सरकार ने सोने की खरीद पर कोई रोक नहीं लगाई है सिर्फ लोगों से इसकी अनावश्यक खरीद न करने की अपील की है जिसे लेकर राजनीतिक करना अनुचित है। खासतौर पर तो कांग्रेस को इस बारे में कोई टिप्पणी करनी ही नहीं चाहिए क्योंकि जब 2013 में यूपीए की सरकार थी।

उस समय वित्त मंत्री पी चिंबरम ने लोगों से शादी ब्याह के लिए भी सोने की खरीद आधी करने की अपील की थी जबकि उस समय दुनिया में कहीं भी युद्ध के हालात नहीं थे इसके पूर्व भी पङ्क्षडत जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी जब प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने भी लोगों से इसी तरह की मितव्ययीता बरतने की अपील की थी इसलिए विपक्ष को राष्ट्रहित में सरकार का साथ देना चाहिए। न कि इसे लेकर राजनीतिक करनी चाहिए।

Exit mobile version