Editorial: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के सरकारी वाहनों के लिए पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी करने का फैसला लिया है, जो सराहनीय कदम है। गौरतलब है कि मिडिल ईस्ट में निर्मित होते जंग के हालात को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से अपील की थी कि वे पेट्रोल और डीजल का उपयोग कम करें और निजी वाहनों की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिकतम उपयोग करें।
खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या में भारी कटौती कर दी है। पहले उनके काफिले में दर्जनों गाडिय़ा हुआ करती थी, जो प्रधानमंत्री की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए जरूरी भी थी, लेकिन अब पीएम मोदी के काफिले में सिर्फ दो गाडिय़ां हैं। एक में वो खुद बैठते हैं और दूसरे में सुरक्षाकर्मी।
हालांकि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिहाज से उनके काफिले में वाहनों की संख्या घटाना बड़े ही जोखिम का काम है और इस पर उन्हें पुनर्विचार करना चाहिए। पीएम मोदी ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या में भारी कटौती करके अन्य मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के सामने एक मिसाल पेश की है। सभी केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों तथा मंत्रियों ने प्रधानमंत्री की इस पहल का अनुसरण करने की घोषणा की है।
इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी सभी सरकारी वाहनों में पेट्रोल व डीजल की कटौती करने का निर्णय लिया है और जल्द ही इस बारे में दिशा निर्देश जारी किये जाएंगे। प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भी पीएम मोदी की अपील पर पायलट, फालोगाड़ी और प्रोटोकॉल का उपयोग न करने का निर्णय लिया है। प्रदेश के कुछ आईपीएस और आईएएस अधिकारियों ने भी अपने वाहनों में कम से कम ईधन का उपयोग करना शुरू किया है।
इस तरह सभी मंत्रियों और अधिकारियों को भी मितव्ययिता बरतनी पड़ेगी और वह भी दिखावे के लिए कुछ दिनों तक ही नहीं बल्कि जब तक मिडिल ईस्ट में जंग के हालात कम नहीं हो जाते और तेल और गैस की आपूर्ति यथावत शुरू नहीं हो जाती। अन्यथा पीएम मोदी की अपील का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।
सिर्फ कुछ मंत्रियों और अधिकारियों के मितव्ययिता बरतने से पेट्रोल और डीजल की खपत कम नहीं होगी। वैसे भी सरकारी वाहनों में ईधन का भारी दुरूपयोग होना आम बात है। सरकारी वाहनों का संबंधित मंत्री और अधिकारी सरकारी वाहनों का किस प्रकार दुरुपयोग करते हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। इसके दुरूपयोग पर प्रभावी रोक लगाने के लिए भी कड़े कदम उठाने होंगे तभी बात बनेगी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील सार्थक सिद्ध होगी।
