संपादकीय: पंजाब के सीएम मान पर विपक्ष का आरोप

Editorial: एक मई मजदूर दिवस पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था जिसमें विपक्ष ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पर आरोप लगाया कि वे शराब पीकर सदन में आए हैं इसलिए उनका मेडल चेकअप कराया जाए. विपक्ष के नेता बाजवा ने मुख्यमंत्री मान के शराब पीकर आने को पंजाब विधानसभा के इतिहास का काला दिन बताया और कहा कि जिस राज्य का मुख्यमंत्री ही शराब के नशे में चूर रहता हो वह नशे के खिलाफ लड़ाई क्या करेगा.
कांग्रेस और अकाली दल शिरोमणि के विधायकों ने सीएम मान पर सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया और सदन में जमकर हंगामा किया.इस पर भगवंत सिंह मान भड़क गए विपक्ष के नेता का विधानसभा के खर्चे पर इलाज कराने की बात करने लगे. उनकी जुबान लडख़ड़ा रही थी और अंधे को भी दिखाई दे रहा था कि वे शराब के नशे में धुत हैं. भगवंत मान पर पहले भी शराबखोरी के आरोप लगते रहे हैं लेकिन यह पहली बार हुआ है कि वे दिन दहाड़े शराब पीकर सदन में पहुंच गए. अब पूरी आम आदमी पार्टी मान के बचाव में उतर आई है और विपक्ष के आरोप को राजनीति प्रेरित करार दे रही है. इस मामले को लेकर पंजाब में नया सियासी बवाल खड़ा है गया है.
जिसका खामियाजा आम आदमी पार्टी को अगले साल होने जा रहे पंजाब विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है. गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने पंजाब को उड़ता बनाने का पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया था पंजाब को नशे के अभिशाप से मुक्ति दिलाने का वादा करते हुए चुनाव लड़ा था. जो प्रभावी सिद्ध हुआ और पंजाब में आम आदमी पार्टी को ऐतिहासिक बहुमत प्राप्त हुआ. किंतु नशे के खिलाफ मान सरकार कैसी लडाई रही है इसका सहज ही अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां का मुख्यमंत्री खुद नशे में चूर रहने के आरोप से घिरता रहता है. निश्चित रुप से उनका यह आचरण शर्मनाक है और इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए।



