Loud Speaker Controversy : महाराष्ट्र में विरासत की जंग - Navpradesh

Loud Speaker Controversy : महाराष्ट्र में विरासत की जंग

Loud Speaker Controversy: War of Heritage in Maharashtra

Loud Speaker Controversy

Loud Speaker Controversy : महाराष्ट्र में सत्ता पर काबिज महाअघाड़ी सरकार के खिलाफ लाऊड स्वीकर मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने जो हल्ला बोला है उससे वहां की राजनीति में भूचाल आ गया है। अजान और हनमान चालीसा को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहे है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे सरकार को अल्टीमेटम दिया हुआ था कि तीन मई के बाद यदि मस्जिदों से लाऊड स्पीकर नहीं हटाए गए तो मनसे कार्यकर्ता उसके सामने लाऊड स्पीकर से हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे।

राज ठाकरे के आव्हान (Loud Speaker Controversy) पर मुंबई से लेकर नासिक तक कई जगहों पर मस्जिदों के सामने मनसे कार्यकर्ताओं ने हनुमान चालीसा का पाठ कर उद्धव ठाकरे सरकार को खुली चुनौती दी। महाराष्ट्र सरकार ने राज ठाकरे की धमकी को मद्देनजर रखकर पुलिस के पुख्ता इंतजाम किए थे और कई मनसे कार्यकर्ताओं व नेताओं के खिलाफ जिला बदर की कार्यवाही भी की थी जिसकी वजह से मनसे का यह कार्यक्रम ज्यादा सफल नहीं हो पाया।

अब राज ठाकरे को भी नोटिस दी गई है और उनके ऊपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है लेकिन राज ठाकरे अपने फैसले पर अडिग़ है। दरअसल महाराष्ट्र में विरासत की लड़ाई चल रही है। शिवसेना के खिलाफ मनसे ने मोर्चा खोल रखा है और खुद को सच्चा हिन्दु बताने के लिए वे लड़ाई लड़ रहे है। इसी उद्देश्य से मनसे कार्यर्ताओं ने कई जगह शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे का पुराना विडीयों चलाया जिसमें उन्होने मस्जिदों से लाऊड स्पीकर हटाने की बात कही थी। उन्होने घोषणा की थी कि यदि महाराष्ट्र में शिव सेना की सरकार बनी तो लाऊड स्पीकरों को हटा दिया जाएगा। उनके इसी बयान का प्रचार कर मनसे खुद को बाल ठाकरे का वास्तविक अनुयायी साबित करने की कोशिश कर रही है।

मनसे की यह कोशिश शिव सेना को नागवार लग रही है यही वजह है कि शिव सेना के प्रवक्ता संजय राउत मनसे को लेकर लगातार विवादास्पद बयानबाजी कर रहे है। जिससे दोनों पार्टियों के बीच तनाव और बढ़ रहा है और शिवसेना में फूट पडऩे का खतरा भी मंडरा रहा है। यदि लाऊड स्पीकर के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे सरकार का रवैया ऐसा ही ढुलमुल रहा तो मनसे को अपनी राजनीति चमकाने का और मौका मिल जाएगा जो आगे चलकर शिवसेना के लिए ही परेशानी का सबब बन सकता है।

महाराष्ट्र की सियासत (Loud Speaker Controversy) में बाला साहब ठाकरे परिवार के दबदबे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकते हैं कि बिना विधायक, सासंद बने ही करीब चार दशकों से महाराष्ट्र की सियासत को यह परिवार प्रभावित कर रहा है। ठाकरे परिवार की सियासत हमेशा गैर मराठियों के खिलाफ ही घूमती रही. बाल ठाकरे के निधन के बाद उनके बेटे उद्धव ठाकरे और पोते आदित्य ठाकरे के हाथों शिवसेना की कमान संभाली है। 2002 में राज ठाकरे ने पहली बार खुली बगावत कर दी.2006 में राज ठाकरे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना नाम से नई पार्टी बनाई.

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