India-EU Deal: सभी यूरोपियन कारों पर ड्यूटी कम नहीं होगी, कन्फ्यूजन दूर करें; सिर्फ ‘इन’ कारों को सस्ती एंट्री मिलेगी

India-EU deal: Duties will not be reduced on all European cars; clear up the confusion; only 'these' cars will get cheaper entry.

India-EU deal

नई दिल्ली। India-EU deal: इंडिया और यूरोपियन यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत ऑटोमोबाइल सेक्टर के बारे में एक ज़रूरी जानकारी सामने आई है। घरेलू कार बनाने वालों के हितों की रक्षा के लिए, सरकार ने ‘मास मार्केट’ कारों को इस डील से बाहर रखा है। बुधवार को जारी एक ऑफिशियल बयान में साफ किया गया कि इंपोर्ट ड्यूटी में कोई भी छूट सिफऱ् 25 लाख (15,000 यूरो) से ज़्यादा कीमत वाली पैसेंजर कारों को ही दी जाएगी। भारत के कुल कार मार्केट का लगभग 90प्रतिशत हिस्सा 25 लाख से कम कीमत वाली कारों का है, जो इस डील के तहत पूरी तरह सुरक्षित हैं।

महंगी कारों पर टैक्स में कमी

सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी में छूट को तीन अलग-अलग प्राइस ब्रैकेट में बांटा है। क्15,000 (लगभग 13.5 लाख सीआईएफ वैल्यू) से कम कीमत वाली कारों को कोई छूट नहीं दी जाएगी। 15,000 और 35,000 के बीच की कारों पर पहले साल 35 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी लगेगी। तो, 35,000 से 50,000 यूरो और उससे ज़्यादा कीमत वाली महंगी कारों पर ड्यूटी पहले साल में घटाकर 30 प्रतिशत कर दी गई है। इन कैटेगरी के लिए हर साल करीब 33,000 से 34,000 गाडिय़ों का कोटा तय किया गया है।

इम्पोर्ट कोटा लिमिट और लिमिटेड असर

इस एग्रीमेंट के तहत, भारत ने यूरोपियन कंपनियों को एक तय कोटा दिया है। यह रियायती इम्पोर्ट ड्यूटी हर साल कुल 2.5 लाख कारों तक ही लागू होगी। इसमें से 1.6 लाख कारें डीज़ल और पेट्रोल इंजन की होंगी, जबकि 90,000 कारें इलेक्ट्रिक कैटेगरी की होंगी। इसकी तुलना में, भारत में कुल कार मार्केट में हर साल 4.3 लाख से ज़्यादा कारें बिकती हैं, जिसके मुकाबले यह रियायती कोटा कुल मार्केट का 2.5 प्रतिशत से भी कम है। इसलिए, मर्सिडीज़, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी कंपनियों की महंगी कारें कुछ सस्ती हो सकती हैं, लेकिन इसका छोटे और मीडियम कार मार्केट पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

2.5 गुना ज़्यादा कोटा देगा

इंडियन एक्सपोर्ट के लिए बड़ा मौका यह एग्रीमेंट सिफऱ् इम्पोर्ट तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इंडियन कार मैन्युफैक्चरर्स के लिए भी फायदेमंद होगा। अधिकारियों के मुताबिक, यूरोपियन यूनियन इंडियन कार मैन्युफैक्चरर्स को इंडिया के दिए गए कोटे से 2.5 गुना ज़्यादा कोटा देगा। इसका मतलब है कि इंडियन ऑटो कंपनियों के लिए अपनी गाडिय़ों को यूरोपियन मार्केट में एक्सपोर्ट करने का रास्ता साफ़ हो गया है। इंडियन कारें अपनी सस्ती कीमतों और बढ़ती क्वालिटी के लिए जानी जाती हैं, इसलिए यह एग्रीमेंट इंडिया को ग्लोबल ‘एक्सपोर्ट हब’ बनने में बहुत मदद करेगा।