Illegal Possession : बेदखली की कार्यवाही का विरोध क्यों? - Navpradesh

Illegal Possession : बेदखली की कार्यवाही का विरोध क्यों?

Illegal Possession: Why Oppose Eviction Proceedings?

Illegal Possession

Illegal Possession : देश की राजधानी नई दिल्ली में बेजा कब्जाधारियों के खिलाफ वहां की एमसीडी ने बुलडोजर का उपयोग कर अवैध कब्जों को हटाना शुरू किया है। बेदखली की इस कार्यवाही का बेजा कब्जाधारी तो विरोध कर ही रहे है कुछ राजनीतिक पार्टियां भी इस कार्यवाही के खिलाफ सड़क पर उतर आई है। बेदखली की इस कार्यवाही का विरोध समझ से परे है। नई दिल्ली में जगह जगह अवैध कब्जे हो चुके है। सरकारी जमीन कर कब्जा कर अवैध कालोनियां और बस्तियां बसा दी गई है। ऐसे लोगों की संख्या ६० लाख से भी अधिक बताई जाती है।

इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि नई दिल्ली में बेजा कब्जों (Illegal Possession) की किसी कदर बाढ़ आई हुई है। रोहिंगियाओं और बाग्लादेशी घुसपैठियों को भी वहा बेजा कब्जा कराया गया है और उनकी बस्तियां आबाद कर दी गई है। इसी तरह नई दिल्ली की सड़कों पर भी बेतहाशा बेजा कब्जे हो चुके है। जब से वहां आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है तब से वहां बेजा कब्जाधारियों के हौसले बुलंद हो गए है।

अब जबकि एमसीबी ने इन बेजा कब्जाधारियों के खिलाफ अभियान चलाना शुरू किया है तो उसका विरोध होने लगा है। शाहीन बाग में तो बेजा कब्जा तोडऩे गए दल को वहां के लोगों ने बैरंग लौटा दिया।दिल्ली के ही मदनपुर इलाके में जब बेजा कब्जा कब्जाधारियों के साथ तोड़ फोड़ की कार्यवाही शुरू की गई तो आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान ने अपने साथियों के साथ वहां पहुंच कर विरोध जताया।

उन्होने लोगों को विरोध के लिए बरगलाया। नतीजतन वहां एकत्रित हुई अतिक्रमणकारियों की भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी कर दी और बुलडोजर के सामने लेटकर सरकारी काम में बाधा डाली। इसके बाद हरकत में आई पुलिस ने अमानतुल्ला खान और उनके साथियों को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया है। पुलिस प्रशासन की इस कार्यवाही का विरोध करते हुए आम आदमी पार्टी के नेता और नई दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बेदखली की कार्यवाही का विरोध किया है और कहा है कि बुलडोजर से बेजा कब्जा तोडऩे की कार्यवाही का आगे भी विरोध किया जाएगा।

समझ में नहीं आता कि अतिक्रमणकारियों (Illegal Possession) की हिमायत क्यों की जा रही है। इससे तो इस संदेह को बल मिलता है कि इन नेताओं ने ही दिल्ली में बेजा कब्जों को प्रश्रय दिया है। सरकार को चाहिए कि बेजा कब्जाधारियों के साथ ही उनके हिमायतियों पर भी कड़ी कार्यवाही करें।

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