संपादकीय

संपादकीय: रामभक्तों में न्याय की उम्मीद बंधी

Hopes for justice : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बहुचर्चित मामले में आखिरकार रामजन्मभूमि ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया और एक अन्य मानोनित ट्रस्टी गोपाल राय को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। चढ़ावा चोरी का मामला उजागर होने के बाद से ही ट्रस्ट के इन तीनों ही पदाधिकारियों की भूमिका पर सवालिया निशान लग रहे थे जिसके चलते ही एक सप्ताह पूर्व ही चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था। किन्तु उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ था। ट्रस्ट के कई सदस्य चंपत राय को उनके पद से मुक्त करने के लिए तैयार ही नहीं थे क्योंकि उनका मानना है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्मार्ण से लेकर अब तक वहां की व्यवस्था को संभालने में उनका सबसे बड़ा योगदान रहा है वे उनकी कार्यक्षमता और इमानदारी से भी प्रभावित रहे हैं।

किन्तु चंपत राय की नाक के नीचे चढ़ावा चोरी होती रही और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी यह बात भी किसी को हजम नहीं हो रही थी। बहरहाल ट्रस्ट की बैठक में भी सभी सदस्य चंपत राय का इस्तीफा स्वीकारने के लिए तैयार नहीं थे लेकिन एक ट्रस्टी ने ट्रस्ट के नियमों का हवाला देते हुए बताया कि यदि ट्रस्ट का कोई पदाधिकारी स्वेच्छा से इस्तीफा देता है तो उसे स्वीकारने या न स्वीकारने का ट्रस्ट को कोई अधिकार नहीं है। ऐसा इस्तीफा दिये जाने के साथ ही स्वीकृत माना जाता है। इस नियम का पता चलने के बाद ट्रस्टियों ने दोनों इस्तीफों पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी। अब रामक्तों को यह उम्मीद बंधी है कि चढ़ावा चोरी के मामले की निष्पक्ष जांच हो पाएगी और करोड़ो रामभक्त जिनकी भावनाएं आहत हुई हैं उन्हें न्याय मिल पाएगा।

ट्रस्ट की बैठक के बाद कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने पत्रकारवार्ता लेकर ट्रस्ट द्वारा लिये गये निर्णय की जानकारी दी और यह कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का अब ट्रस्ट से कोई संबंध नहीं रह गया है और न ही वे भविष्य में ट्रस्ट में लौटेंंगे। अब ट्रस्ट का काम कृष्ण मोहन देखेंगे जिन्हें ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। कृष्ण मोहन रिटार्यड आईएफएस अधिकारी रहे हैं और सेवानृवित्त के बाद से ही ट्रस्ट से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा एक तीन सदस्यी कमेटी का भी गठन किया गया है।

स्वामी गोविंद देवगिरी ने यह स्वीकार किया की चढ़ावे की रकम में चोरी हुई है यह बात सत्य है लेकिन इस चोरी में ट्रस्ट के सदस्यों का कोई हाथ नहीं है बल्कि ट्रस्ट के सदस्यों ने इस काम के लिए जिन कर्मचारियों की नियुक्ति की थी उन लोगों ने विश्वासघात किया है और वे सभी आठ आरोपी जेल में हैं। एसआईटी की जांच जारी है और इस मामले के लिए जो लोग भी जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने मंदिर परिसर से चढ़ावे में मिली वस्तुओं के चोरी किये जाने की अफवाहों का भी खंडन किया और लगभग 2800 वस्तुएं मीडिया के सामने रखीं जिसमें सोने की रामचरित मानस सहित सोने चांदी का जखीरा भी शामिल था।

गौरतलब है कि चढ़ावा चोरी का मामला उजागर होने के बाद कई विपक्षी नेताओं ने मंदिर से सोना चांदी के भी चोरी होने के आरोप लगाए थे जो निराधार निकले। बहरहाल अब चढ़ावा चोरी के इस मामले की जांच में एसआईटी ने तेजी से काम करना शुरू कर दिया है और उसकी प्रारंभिक रिर्पोट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं जिनमें सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की व्यवस्था लचर पाई गई है तथा स्ट्रांग रूप की सुरक्षा में भी कमी दरशाई गई है। यही नहीं बल्कि सिर्फ तीन माह के सीसीटीवी फुटेज में भी गिरफ्तार आरोपियों को 70 बार नोट चुराते हुए देखा गया है। अब जांच जैसे जैसे आगे बढ़ेगी लोगों की न्याय की उम्मीद भी बढ़ेगी।

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