
- कमर्शियल डीजल 142 रुपए लीटर पार, रिटेल में करीब 97 रुपए, 45 के भारी अंतर ने मचाई अफरा-तफरी
- शहर के पेट्रोल पंपों पर ट्रकों-हाईवा की लंबी कतारें, आम लोग घंटों परेशान
- कोयला परिवहन प्रभावित होने से बिजली संकट का खतरा, विकास कार्यों की रफ्तार भी थमी
ईश्वर चंद्रा
कोरबा। ऊर्जाधानी कोरबा इस समय एक बड़े डीजल संकट की चपेट में है। पेट्रोलियम कंपनियों की नई मूल्य व्यवस्था ने शहर की यातायात और औद्योगिक व्यवस्था को पूरी तरह झकझोर दिया है। कमर्शियल वाहनों के लिए डीजल की कीमत जहां 132 प्रति लीटर तक पहुंच गई है, वहीं रिटेल पंपों पर यही डीजल करीब 97 में मिल रहा है।
यानी प्रति लीटर 45 का सीधा अंतर। यही अंतर अब शहर की सबसे बड़ी मुसीबत बन चुका है। कमर्शियल ट्रांसपोर्टरों ने महंगे डिपो से दूरी बनाकर शहर के रिटेल पेट्रोल पंपों पर धावा बोल दिया है। नतीजा यह है कि कोरबा के अधिकांश पंप भारी वाहनों के कब्जे में आ गए हैं। सुबह से लेकर देर रात तक ट्रकों, हाईवा और ट्रेलरों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। शहर का ट्रैफिक सिस्टम चरमरा गया है और आम लोग बूंद-बूंद डीजल-पेट्रोल के लिए परेशान हो रहे हैं।
कोयला सप्लाई पर संकट, ब्लैकआउट का खतरा
इस संकट का सबसे बड़ा असर एसईसीएल से जुड़े कोयला परिवहन पर दिखाई देने लगा है। खदानों से कोयला ढुलाई में लगी करीब 2000 भारी गाडिय़ां महंगे डीजल और सीमित उपलब्धता के बीच फंस गई हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि ?138 प्रति लीटर की दर से डीजल खरीदकर गाड़ी चलाना घाटे का सौदा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो अगले 48 घंटों में सैकड़ों गाडिय़ों के पहिये थम सकते हैं। इसका सीधा असर पावर प्लांटों तक कोयला आपूर्ति पर पड़ेगा। कोयला सप्लाई बाधित हुई तो प्रदेश ही नहीं, देश के कई हिस्सों में बिजली उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ सकती है।
पेट्रोल पंपों पर ‘कब्जा, आम जनता बेहाल
कोरबा के अमझर, बाल्को मार्ग, छुरी, टीपी नगर और कोसाबाड़ी सहित शहर के अधिकांश पंपों पर हालात बेकाबू नजर आ रहे हैं।
आम उपभोक्ता परेशान
दोपहिया और कार चालकों को भारी वाहनों की कतारों के बीच घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। जो काम पहले 5 मिनट में हो जाता था, अब उसके लिए 1 से 2 घंटे लग रहे हैं।
कई पंपों पर ‘नो स्टॉक
अचानक बढ़ी मांग के कारण कई रिटेल पंप समय से पहले खाली हो रहे हैं। कुछ जगहों पर शाम होते-होते ‘नो स्टॉकÓ के बोर्ड लगने लगे हैं।
विकास कार्यों पर भी असर
सड़क निर्माण, औद्योगिक प्रोजेक्ट और निर्माण कार्यों में लगी भारी मशीनें भी डीजल संकट से प्रभावित होने लगी हैं। कई साइटों पर मशीनें खड़ी हो गई हैं और काम की गति धीमी पड़ गई है।
ट्रांसपोर्टरों का फूटा गुस्सा
कोरबा जिले के अंतर्गत रोडसेल में संचालित लगभग 35 हजार गाडिय़ों पर डीजल का खतरा मंडरा रहा है। अगर समाधान नहीं निकला तो चक्काजाम की स्थिति बन सकती है। उन्होंने कहा कि हम ट्रेलर मालिक प्रशासन से जल्द ही पूछने वाले है कि गाड़ी खड़ा कहां करेंगे । – सुबोध सिंह, अध्यक्ष, जिला ट्रक एवं ट्रेलर ट्रांसपोर्ट मालिक एसोसिएशन, कोरबा
आम लोगों की बढ़ी मुश्किलें
पेट्रोल पंपों पर ट्रकों की लाइन के कारण ऑफिस और बच्चों को स्कूल छोडऩे में देरी हो रही है। कई जगह जाम लग रहा है। प्रशासन को भारी वाहनों के लिए अलग व्यवस्था करनी चाहिए। – मनीष राठौर, स्थानीय निवासी
फ्यूल सप्लाई पर लगातार हो रही मॉनिटरिंग – कंवर
ईंधन की सप्लाई पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। कमर्शियल डीजल के दाम बढऩे से रिटेल पेट्रोल पंपों में दबाव तो बढ़ा है। जल्द ही ईंधन वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा। – घनश्याम कंवर, जिला खाद्य अधिकारी, कोरबा
प्रशासन अलर्ट मोड पर
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पेट्रोलियम कंपनियों के अधिकारियों के बीच लगातार चर्चा चल रही है। सूत्रों के मुताबिक प्रशासन भारी वाहनों के लिए अलग समय निर्धारण, रूट डायवर्जन और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि, जब तक कमर्शियल और रिटेल डीजल के बीच भारी मूल्य अंतर बना रहेगा, तब तक संकट खत्म होता नहीं दिख रहा।



